Yes Bank ने शनिवार को सितंबर तिमाही के नतीजे जारी किए। बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 65% बढ़कर ₹1,080 करोड़ रहा। हालांकि, ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड विवाद से संभावित वित्तीय असर को लेकर चिंता बनी हुई है।
मुंबई: Yes Bank ने जुलाई-सितंबर तिमाही में मजबूत प्रदर्शन करते हुए शुद्ध मुनाफे और नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में बढ़ोतरी दर्ज की। बैंक का मुनाफा सालाना आधार पर 65% बढ़कर ₹1,080 करोड़ और NII 22.7% बढ़कर ₹2,822.5 करोड़ हो गई। हालांकि, AT-1 बॉन्ड से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद संभावित वित्तीय देनदारी बैंक के लिए अहम चुनौती बनी हुई है।
Yes Bank की कमाई और मुनाफे में बढ़ोतरी
Yes Bank ने सितंबर तिमाही में बेहतर वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) पिछले साल की समान अवधि के ₹2,301 करोड़ से बढ़कर ₹2,822.5 करोड़ हो गई। इस तरह ब्याज से होने वाली मुख्य आय में सालाना आधार पर 22.7% की वृद्धि हुई।
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बैंक की अन्य आय भी बढ़कर ₹1,881.5 करोड़ पहुंच गई, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹1,644.3 करोड़ थी। इसके अलावा, सितंबर तिमाही में प्रोविजन घटकर ₹317.4 करोड़ रह गए, जो जून तिमाही में ₹395 करोड़ थे। अन्य आय में बढ़ोतरी और प्रोविजन में कमी ने बैंक के मुनाफे को सहारा दिया।
एसेट क्वालिटी, लोन और जमा में सुधार
बैंक की एसेट क्वालिटी के आंकड़ों में भी सुधार दिखा। सितंबर तिमाही में ग्रॉस NPA अनुपात घटकर 1.2% रह गया, जबकि जून तिमाही में यह 1.3% था। नेट NPA अनुपात 0.2% पर स्थिर रहा।
हालांकि, NPA की कुल राशि में बढ़ोतरी हुई। ग्रॉस NPA जून तिमाही के ₹3,704 करोड़ से बढ़कर ₹3,875 करोड़ हो गया। वहीं, नेट NPA ₹677 करोड़ से बढ़कर ₹757 करोड़ पहुंच गया।
बैंक के पहले जारी बिजनेस अपडेट के मुताबिक, लोन और एडवांस में सालाना आधार पर 23.8% की वृद्धि हुई और यह ₹3.09 लाख करोड़ पर पहुंच गए। जमा राशि 19.5% बढ़कर ₹3.54 लाख करोड़ हो गई, जबकि पिछले साल यह ₹2.96 लाख करोड़ थी।
इस दौरान CASA अनुपात भी पिछले साल के 30% से बढ़कर 33.7% हो गया। CASA में चालू और बचत खातों की जमा शामिल होती है। हालांकि, FCNR(B) जमा के प्रवाह का असर हटाने पर लोन ग्रोथ 17.7% और जमा ग्रोथ 13.2% रही।
₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर
Yes Bank के सामने सबसे बड़ी चुनौती ₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड से जुड़ा मामला है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसने मार्च 2020 में इन बॉन्ड को पूरी तरह राइट-ऑफ करने के फैसले को रद्द कर दिया था।
AT-1 बॉन्ड बैंकों के लिए अतिरिक्त पूंजी जुटाने का एक माध्यम हैं। साल 2020 में Yes Bank के वित्तीय संकट के दौरान बैंक के रिस्ट्रक्चरिंग प्लान के तहत इन बॉन्ड को पूरी तरह राइट-ऑफ कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बॉन्ड की मूल राशि और संबंधित भुगतान को लेकर बैंक पर संभावित वित्तीय प्रभाव का सवाल उठ रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में बैंक की कमाई पर करीब ₹5,300–₹5,400 करोड़ तक का संभावित असर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक अकाउंटिंग और वित्तीय प्रभाव का समय अभी स्पष्ट नहीं है। बैंक ने फैसले के असर की समीक्षा करने की बात कही है और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की तैयारी भी कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बैंक के शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। 15 अक्टूबर को शेयर करीब 14.5% गिरकर ₹18.15 पर बंद हुआ था, जबकि 16 अक्टूबर को यह और गिरकर करीब ₹17.5 पर आ गया।
तिमाही नतीजे बैंक की कमाई में मजबूती दिखाते हैं, लेकिन AT-1 बॉन्ड मामले का संभावित वित्तीय असर एक अहम जोखिम बना हुआ है। आगे निवेशकों की नजर बैंक की कानूनी रणनीति, संभावित देनदारी की अकाउंटिंग और पूंजी की स्थिति पर रहेगी।











