Nikesh Arora: गाजियाबाद से अमेरिका तक का सफर, आज Palo Alto Networks के CEO

Nikesh Arora: गाजियाबाद से अमेरिका तक का सफर तय करने वाले निकेश अरोड़ा आज Palo Alto Networks के CEO हैं। जानें उनकी पढ़ाई, करियर और सफलता की पूरी कहानी।

गाजियाबाद में जन्मे निकेश अरोड़ा की सफलता की कहानी संघर्ष और मेहनत से भरी है। अमेरिका पहुंचने के बाद पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए उन्होंने बर्गर तक बेचे और नौकरी के लिए भेजी गई 400 से ज्यादा अर्जियां भी खारिज हुईं।

Nikesh Arora Success Story: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से अमेरिका तक पहुंचकर दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में शीर्ष पद हासिल करने वाले निकेश अरोड़ा की कहानी संघर्ष और करियर बदलावों से भरी है। एक दौर में अमेरिका में पढ़ाई का खर्च जुटाने के लिए उन्होंने बर्गर बेचने और दूसरी छोटी नौकरियां करने का काम किया। नौकरी की तलाश के दौरान उन्हें सैकड़ों बार रिजेक्शन का सामना भी करना पड़ा। आज वह अमेरिकी साइबर सिक्योरिटी कंपनी Palo Alto Networks के चेयरमैन और CEO हैं।

उनकी यात्रा यह भी दिखाती है कि एक व्यक्ति किस तरह अलग-अलग क्षेत्रों में अनुभव हासिल करते हुए टेक्नोलॉजी और बिजनेस की दुनिया में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच सकता है।

गाजियाबाद में जन्म और एयरफोर्स परिवार में परवरिश

निकेश अरोड़ा का जन्म 9 फरवरी 1968 को गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता भारतीय वायुसेना में अधिकारी थे। पिता की पोस्टिंग के कारण उनका बचपन देश के अलग-अलग हिस्सों में बीता। उन्होंने कई केंद्रीय विद्यालयों में पढ़ाई की और बाद में दिल्ली स्थित एयर फोर्स स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की।

अनुशासित माहौल और सीमित संसाधनों के बीच हुई परवरिश ने उनके शुरुआती जीवन को प्रभावित किया। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने तकनीकी शिक्षा को चुना और IIT (BHU), वाराणसी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।

Wipro से शुरू हुआ प्रोफेशनल सफर

1989 में इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद निकेश अरोड़ा ने Wipro में काम शुरू किया। यहां वह सरकारी ग्राहकों को कंप्यूटर सिस्टम बेचने से जुड़े काम में थे। इस नौकरी के दौरान उन्हें फील्ड में जाकर ग्राहकों से मिलने और बिक्री का अनुभव मिला। हालांकि, उनका लक्ष्य सिर्फ नौकरी करना नहीं था। उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका जाने का फैसला किया। 

आर्थिक सीमाओं को देखते हुए उन्होंने ऐसी यूनिवर्सिटीज में आवेदन किए जहां आवेदन शुल्क नहीं था। बाद में उन्हें Northeastern University में प्रवेश और स्कॉलरशिप मिली।

अमेरिका में बर्गर बेचकर निकाला पढ़ाई का खर्च

अमेरिका पहुंचने के बाद उनके सामने आर्थिक चुनौतियां थीं। उन्होंने पढ़ाई के साथ कई तरह के काम किए। इनमें सुरक्षा गार्ड की नौकरी, दिव्यांग छात्रों के लिए नोट्स तैयार करने और Burger King में काम करने जैसे काम शामिल थे। उनके अनुसार, अमेरिका पहुंचते समय उनके पास केवल दो सूटकेस और करीब 200 डॉलर थे। स्कॉलरशिप की शर्त के तहत उन्हें कंप्यूटर साइंस पढ़ाने की जिम्मेदारी भी मिली। 

आगे चलकर उन्होंने Northeastern University से MBA और Boston College से फाइनेंस में मास्टर डिग्री हासिल की। इसके साथ उन्होंने CFA योग्यता भी प्राप्त की।

400 से ज्यादा रिजेक्शन के बाद मिली पहली बड़ी नौकरी

पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश में निकेश ने सैकड़ों कंपनियों में आवेदन किया। उन्होंने बताया है कि उन्हें 400 से अधिक बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। इन असफलताओं के बावजूद उन्होंने प्रयास जारी रखा। आखिरकार 1992 में उन्हें Fidelity Investments में नौकरी मिली। इसके बाद उन्होंने Putnam Investments समेत कई संस्थानों में काम किया। धीरे-धीरे उनका करियर फाइनेंस से टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम सेक्टर की ओर बढ़ता गया।

Google में मिला करियर का बड़ा ब्रेक

2004 में निकेश अरोड़ा ने Google ज्वाइन किया। उनका इंटरव्यू भी सामान्य तरीके से नहीं हुआ था। Google के सह-संस्थापक Sergey Brin ने लंदन के British Museum में उनके साथ बातचीत के दौरान इंटरव्यू लिया था। Google में उन्होंने यूरोपीय कारोबार से जुड़े वरिष्ठ पदों पर काम किया और बाद में Senior Vice President तथा Chief Business Officer बने। कंपनी में करीब एक दशक के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बिजनेस और विज्ञापन कारोबार के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

SoftBank से Palo Alto Networks तक

2014 में निकेश अरोड़ा SoftBank से जुड़े और वहां President तथा COO की जिम्मेदारी संभाली। वह कंपनी के प्रमुख Masayoshi Son के साथ काम करते थे। कुछ समय बाद उन्होंने SoftBank छोड़ दिया। 2018 में उनके करियर का एक और बड़ा अध्याय शुरू हुआ, जब Palo Alto Networks ने उन्हें CEO और Chairman नियुक्त किया। साइबर सिक्योरिटी में पारंपरिक तकनीकी पृष्ठभूमि न होने के बावजूद उन्होंने कंपनी की रणनीति में क्लाउड सिक्योरिटी, AI और अधिग्रहणों पर जोर दिया।

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