योगी सरकार आज कैबिनेट का दूसरा विस्तार करेगी, जिसमें 6 नए मंत्री शपथ लेंगे। मंत्रिमंडल में ब्राह्मण, ओबीसी और दलित वर्ग को प्रतिनिधित्व देकर भाजपा सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश में जुटी है।
लखनऊ: भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की सरकार आज अपने दूसरे बड़े कैबिनेट विस्तार की ओर बढ़ रही है। रविवार दोपहर करीब 3:30 बजे छह नए मंत्री शपथ लेंगे। यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब राज्य में जातीय और सामाजिक समीकरणों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है और विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, नए मंत्रियों की सूची राज्यपाल Anandiben Patel को सौंप दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार शाम राज्यपाल से मुलाकात कर मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम चर्चा की।
यह विस्तार 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। भाजपा सरकार सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।
कौन-कौन बनेगा मंत्री?
योगी सरकार में जिन छह नेताओं को शामिल किए जाने की तैयारी है, उनमें:
- Manoj Pandey
- Bhupendra Chaudhary
- Surendra Diler
- Krishna Paswan
- Hansraj Vishwakarma
- Kailash Singh Rajput
शामिल हैं।
इन छह चेहरों में एक ब्राह्मण, तीन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और दो दलित समुदाय से आते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विस्तार पूरी तरह सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
मनोज पांडेय की एंट्री क्यों अहम?
इस विस्तार का सबसे चर्चित नाम मनोज पांडेय का है। रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज पांडेय पहले समाजवादी पार्टी में बड़े ब्राह्मण चेहरे के तौर पर जाने जाते थे।
वे 2012 से 2017 तक समाजवादी पार्टी सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और विधानसभा में मुख्य सचेतक की भूमिका भी निभा चुके हैं। हाल के वर्षों में सपा से दूरी बनाने के बाद भाजपा ने उन्हें अपने साथ जोड़ा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ब्राह्मण मतदाताओं के बीच संदेश देना चाहती है कि पार्टी अब भी इस समुदाय को मजबूत प्रतिनिधित्व दे रही है।
ब्राह्मण नाराजगी दूर करने की कोशिश
उत्तर प्रदेश में हाल के महीनों में कई मुद्दों को लेकर ब्राह्मण समुदाय की नाराजगी चर्चा में रही है। इनमें धार्मिक विवाद, भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादित सवाल और कुछ प्रशासनिक फैसले शामिल रहे हैं।
भाजपा नेतृत्व और संघ के बीच हुई बैठकों में भी इस मुद्दे पर चर्चा होने की खबरें सामने आई थीं। ऐसे में मनोज पांडेय को मंत्रिमंडल में शामिल करना एक राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।

फिलहाल योगी सरकार में डिप्टी सीएम Brajesh Pathak समेत कई ब्राह्मण मंत्री पहले से मौजूद हैं। लेकिन केंद्रीय राजनीति में कुछ नेताओं के जाने के बाद मंत्रिमंडल में एक जगह खाली मानी जा रही थी।
दलित राजनीति पर भाजपा का फोकस
इस विस्तार में दलित वर्ग से दो नेताओं को जगह दी जा रही है — कृष्णा पासवान और सुरेंद्र दिलेर।
Krishna Paswan फतेहपुर जिले की खागा सीट से विधायक हैं। उनका राजनीतिक सफर काफी संघर्षपूर्ण माना जाता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में शुरुआत करने वाली कृष्णा पासवान अब भाजपा की प्रमुख दलित महिला नेताओं में गिनी जाती हैं।
वहीं Surendra Diler अलीगढ़ जिले की खैर सीट से विधायक हैं और भाजपा के युवा दलित चेहरों में शामिल हैं। उनका परिवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में अनुसूचित जाति के लिए बड़ी संख्या में सीटें आरक्षित हैं और भाजपा इन वर्गों में अपना समर्थन मजबूत बनाए रखना चाहती है।
महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने का प्रयास
कृष्णा पासवान को मंत्रिमंडल में शामिल करना महिला प्रतिनिधित्व की रणनीति से भी जोड़ा जा रहा है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में फिलहाल 51 महिला विधायक हैं। इनमें भाजपा की सबसे अधिक महिला विधायक हैं। इसके बावजूद योगी सरकार में महिला मंत्रियों की संख्या सीमित रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा महिला मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत रखने के लिए महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति अपना रही है।
ओबीसी वोट बैंक पर भी नजर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अन्य पिछड़ा वर्ग हमेशा निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। भाजपा पहले से ही ओबीसी नेतृत्व को मजबूत करने की कोशिश करती रही है।
इस विस्तार में Bhupendra Chaudhary, Hansraj Vishwakarma और Kailash Singh Rajput को शामिल कर पार्टी ने अलग-अलग पिछड़े समुदायों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है।
हंसराज विश्वकर्मा लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं और उन्हें वाराणसी क्षेत्र में भाजपा के मजबूत रणनीतिक चेहरों में गिना जाता है।
26 महीने बाद क्यों अहम है यह विस्तार?
योगी सरकार का पहला कैबिनेट विस्तार मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हुआ था। अब करीब 26 महीने बाद दूसरा विस्तार हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा भी है। भाजपा उत्तर प्रदेश में अपने सामाजिक गठबंधन को और मजबूत करना चाहती है।
विपक्ष ने साधा निशाना
समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने इस कैबिनेट विस्तार को लेकर भाजपा पर तंज कसा है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “क्या दिल्ली से पर्ची आ गई है?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की शक्तियों में कटौती हो रही है और मंत्रिमंडल के फैसले कहीं और से तय किए जा रहे हैं।
विपक्ष का आरोप है कि भाजपा सामाजिक असंतोष और जातीय नाराजगी को संतुलित करने के लिए यह विस्तार कर रही है।
2027 की राजनीति की तैयारी
विश्लेषकों के अनुसार, यह कैबिनेट विस्तार भाजपा की दीर्घकालिक चुनावी रणनीति का हिस्सा है। ब्राह्मण, दलित, महिला और ओबीसी प्रतिनिधित्व को संतुलित कर पार्टी व्यापक सामाजिक संदेश देने की कोशिश कर रही है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं और यही वजह है कि योगी सरकार का यह विस्तार राष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है।












