योगिनी एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में शुभ मुहूर्त के अनुसार किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार विधिपूर्वक पारण करने से व्रत पूर्ण माना जाता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
योगिनी एकादशी व्रत: योगिनी एकादशी पारण व्रत का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी का व्रत तभी पूर्ण होता है, जब द्वादशी तिथि में शुभ समय पर विधि-विधान से पारण किया जाए। सही नियमों का पालन करने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होने की मान्यता है।
द्वादशी तिथि में करें योगिनी एकादशी व्रत का पारण
सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत श्रद्धा, भक्ति और आत्मसंयम का प्रतीक माना जाता है। हालांकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार केवल उपवास रखने से ही व्रत पूरा नहीं होता, बल्कि द्वादशी तिथि में विधि-विधान से पारण करना भी उतना ही आवश्यक माना गया है। यदि पारण सही समय पर नहीं किया जाए, तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। इसलिए श्रद्धालुओं को पंचांग में बताए गए शुभ मुहूर्त के अनुसार ही पारण करना चाहिए।

पारण से पहले भगवान विष्णु का ध्यान करें, उन्हें प्रणाम करें और पूरे श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना करें। पूजा के दौरान भगवान को तुलसी दल, पुष्प, धूप और नैवेद्य अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके बाद व्रत समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाती है।
इस विधि से करें पारण
योगिनी एकादशी का पारण हमेशा सरल और सात्विक तरीके से करना चाहिए। पूजा के बाद सबसे पहले जल ग्रहण करें। कई श्रद्धालु फल या पंचामृत लेकर भी व्रत खोलते हैं। इसके बाद सात्विक भोजन करना शुभ माना गया है। भोजन में प्याज, लहसुन और तामसिक पदार्थों से बचना चाहिए।
धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रत पूरा होने के बाद अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से पुण्य फल में वृद्धि होती है। कई स्थानों पर ब्राह्मण भोजन कराने और गौ सेवा करने की भी परंपरा निभाई जाती है।
पारण का धार्मिक महत्व क्यों माना जाता है?
धार्मिक ग्रंथों में पारण को एकादशी व्रत का अभिन्न हिस्सा माना गया है। मान्यता है कि उपवास के बाद निर्धारित समय पर पारण करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसके साथ ही जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है।
पारण केवल भोजन करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह व्रत के संकल्प को पूर्ण करने का धार्मिक विधान भी है। इसलिए इसे पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ संपन्न करना चाहिए। सही समय पर पारण करने से व्रत का संपूर्ण आध्यात्मिक और धार्मिक लाभ प्राप्त होता है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
योगिनी एकादशी का पारण करते समय शुभ मुहूर्त का पालन करना सबसे जरूरी माना जाता है। पारण से पहले भगवान विष्णु की पूजा अवश्य करें और बिना पूजा किए सीधे भोजन न करें। सात्विक भोजन ग्रहण करें तथा क्रोध, असत्य और नकारात्मक व्यवहार से बचें। यदि संभव हो तो पारण के दिन दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता भी करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और व्रत का संपूर्ण फल मिलता है।








