उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल तेजी से गहराने लगा है। मिशन-2027 को लेकर भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है। पिछले एक महीने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लखनऊ दौरे ने भी बड़े राजनीतिक संदेश को उजागर किया।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मिशन-2027 की तैयारी के लिए राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। भाजपा, सपा और बसपा सभी दल आगामी विधानसभा और पंचायत चुनाव के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रदेश के दौरे कर चुनावी पिच तैयार की है, वहीं सपा प्रयागराज विवाद को गरमाकर और बसपा ब्राह्मण वोट को साधने की कोशिश कर रही है।
भाजपा की रणनीति: ओबीसी, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद
भाजपा मिशन-2027 को लेकर ओबीसी वोट बैंक, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद पर केंद्रित रणनीति अपना रही है। पार्टी ने कुर्मी वोटों को साधने के लिए पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। चौधरी ने अपनी नई पारी की शुरुआत मथुरा से की और हार्डकोर हिंदुत्व को आधार बनाकर पार्टी की गतिविधियों को गति दी।प्रधानमंत्री मोदी ने 25 दिसंबर को लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की मूर्तियों का उद्घाटन कर राष्ट्रवाद और हिंदुत्व का संदेश दिया।

इस दौरान उन्होंने बिरसा मुंडा, सुहेलदेव, निषादराज, राजा महेंद्र सिंह और चौरी चौरा के बलिदानियों का स्मरण कर सपा के पीडीए को टक्कर देने वाले जातीय समीकरणों पर भी संकेत दिए। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने मथुरा, गोरखपुर, अयोध्या और काशी का दौरा कर धार्मिक आधार मजबूत किया, वहीं गन्ना बेल्ट और मेरठ जाकर किसानों की समस्याओं पर भी ध्यान दिया। केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने लखनऊ में आयोजित बैठक में गांवों में चौपाल लगाने और किसानों तक संदेश पहुँचाने की रणनीति तय की।
अमित शाह ने 24 जनवरी को यूपी दिवस-2026 में ‘एक जिला-एक व्यंजन’ और ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजनाओं की सराहना कर छोटे व्यापारियों, रेहड़ी ठेला और लघु उद्योग से जुड़े वर्ग को साधने का संदेश दिया।
सपा की चाल: प्रयागराज विवाद और युवाओं पर फोकस
समाजवादी पार्टी संतों और पुलिस विवाद को लेकर प्रयागराज में स्थिति को गरमाने में लगी है। पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने युवाओं के रोजगार और सामाजिक मुद्दों पर रणनीति तैयार की है। दिसंबर में बेंगलुरु और जनवरी में भुवनेश्वर में हुई बैठकों के जरिए सपा ने अपने राष्ट्रीय एजेंडे को मजबूती देने की तैयारी की है।
सपा का उद्देश्य है कि पीडीए (पूर्व डेमोक्रेटिक अलायंस) को मात देकर प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत की जा सके। पार्टी युवा मतदाताओं और स्थानीय मुद्दों को चुनावी रणनीति का केंद्र बना रही है। बसपा अपनी रणनीति में ब्राह्मण वोट को साधने में लगी है। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने हाल ही में कहा कि ब्राह्मणों का सम्मान केवल बसपा में सुरक्षित है। इसके अलावा बसपा प्रदेश में आकाश आनंद के दौरे की रणनीति पर भी काम कर रही है, ताकि पंचायत और विधानसभा चुनाव में पार्टी को मजबूत किया जा सके।











