यूपी में सियासी संग्राम, विधानसभा घेराव के दौरान अफरा-तफरी, कई लोग गिरफ्तार

लखनऊ में कांग्रेस का विधानसभा घेराव प्रदर्शन। मनरेगा और कानून व्यवस्था को लेकर मार्च, पुलिस से टकराव, लाठीचार्ज और कई कार्यकर्ता हिरासत में।

लखनऊ में कांग्रेस ने मनरेगा और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर विधानसभा घेराव किया। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर मार्च रोका, जिससे टकराव और लाठीचार्ज की स्थिति बनी। कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मनरेगा और कानून व्यवस्था के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने राजधानी लखनऊ में विधानसभा घेराव का ऐलान किया। तय कार्यक्रम के अनुसार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सुबह विधानसभा की ओर कूच किया। बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने पहले से ही व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। जैसे ही प्रदर्शनकारी आगे बढ़े, पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया, जिसके बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।

प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन पहले से अलर्ट था। कई स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। इसके बावजूद कार्यकर्ताओं ने विधानसभा की ओर बढ़ने की कोशिश जारी रखी।

बैरिकेडिंग पर चढ़े नेता

सुबह करीब 11 बजे विधानसभा मार्च की योजना बनाई गई थी। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय से निकलकर विधानसभा की तरफ बढ़े। पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान कुछ कार्यकर्ता और नेता बैरिकेड्स के ऊपर चढ़ गए।

स्थिति धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती गई। कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया और कुछ को मौके से गिरफ्तार किया गया।

प्रदर्शन स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल रहा। पुलिस ने दावा किया कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी। वहीं कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया।

प्रदेश भर से पहुंचे कांग्रेस कार्यकर्ता

इस प्रदर्शन में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय, नेता विधानमंडल कांग्रेस आराधना मिश्रा मोना, विधायक वीरेंद्र चौधरी सहित कई सांसद, पूर्व विधायक और वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

प्रदेश के अलग-अलग जिलों से कार्यकर्ता लखनऊ पहुंचे थे। कई कार्यकर्ताओं ने रात पार्टी कार्यालय में ही बिताई ताकि सुबह के मार्च में हिस्सा ले सकें। पार्टी का कहना है कि यह प्रदर्शन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि जनहित से जुड़े मुद्दों की आवाज उठाने के लिए आयोजित किया गया था।

कानून व्यवस्था बना मुख्य मुद्दा

कांग्रेस ने अपने प्रदर्शन का मुख्य आधार मनरेगा और राज्य की कानून व्यवस्था को बताया है। पार्टी का आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत रोजगार के अवसर पर्याप्त नहीं मिल रहे हैं और भुगतान में भी देरी हो रही है।

इसके साथ ही कांग्रेस ने राज्य में बढ़ते अपराध को लेकर सरकार पर निशाना साधा। पार्टी नेताओं का कहना है कि मौजूदा सरकार अपराध रोकने में विफल रही है। उनका आरोप है कि कानून व्यवस्था कमजोर हुई है और आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।

बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखे आरोप लगाए। पार्टी का कहना है कि प्रदेश में अपराध लगातार बढ़ रहा है।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव कर रही है। उनका दावा है कि दलितों, अल्पसंख्यकों और गरीब वर्ग के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही अपराधियों को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया गया।

कई कार्यकर्ता नजरबंद

पार्टी सूत्रों के अनुसार कई जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पहले ही नजरबंद कर दिया गया था ताकि वे लखनऊ न पहुंच सकें। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कार्यकर्ता राजधानी पहुंचे।

प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर कई स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई। अधिकारियों का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

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