भारत के पूर्व क्रिकेटर Yuvraj Singh को पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने मामले पर संज्ञान लेते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है।
स्पोर्ट्स न्यूज़: भारत के पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह को अपने पर्सनैलिटी राइट्स (Personality Rights) की सुरक्षा से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने सोशल मीडिया पर मौजूद उनके खिलाफ आपत्तिजनक और बिना अनुमति इस्तेमाल किए गए कंटेंट को हटाने के संबंध में अंतरिम आदेश पारित करने की बात कही है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान, नाम, तस्वीर, आवाज और व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा जरूरी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि युवराज सिंह से जुड़े ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट और ऑनलाइन सामग्री, जिनका इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना किया गया है या जो अपमानजनक हैं, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर हटाया जाए।
कोर्ट ने 48 घंटे में कंटेंट हटाने के दिए निर्देश
मामले की सुनवाई कर रहीं न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने कहा कि युवराज सिंह के पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अंतरिम आदेश जारी किया जाएगा। कोर्ट ने संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि आपत्तिजनक पोस्ट और लिंक को 48 घंटे के भीतर हटाया जाए। युवराज सिंह की ओर से पेश वकील ने अदालत में उन ऑनलाइन पोस्ट और लिंक की सूची पेश की, जिनमें पूर्व क्रिकेटर के नाम और छवि का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया था। वकील ने बताया कि सूची में शामिल दो लिंक पहले ही हटा दिए गए हैं।
युवराज सिंह की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कुछ लोग उनकी लोकप्रियता और पहचान का इस्तेमाल आर्थिक लाभ हासिल करने के लिए कर रहे हैं। आरोप है कि उनकी अनुमति के बिना उनके व्यक्तित्व से जुड़े तत्वों का उपयोग कर सामान और अन्य सामग्री को प्रचारित किया जा रहा है। युवराज के वकील ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति की पहचान और प्रतिष्ठा का व्यावसायिक इस्तेमाल करने से पहले उनकी अनुमति लेना जरूरी है। उन्होंने अदालत से उनके नाम, तस्वीर और व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा की मांग की।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद

सुनवाई के दौरान युवराज सिंह की ओर से कुछ ऐसे पोस्ट का भी जिक्र किया गया, जिनमें उनके खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था। इनमें से एक लिंक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट से जुड़ा बताया गया। रेडिट की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि संबंधित पोस्ट करीब दो साल पुराना है और यह मामला पर्सनैलिटी राइट्स से ज्यादा मानहानि (Defamation) से जुड़ा हुआ है। हालांकि, अदालत ने मामले को मुकदमे के रूप में दर्ज करते हुए अंतरिम निषेधाज्ञा आवेदन पर नोटिस जारी किया है।
मध्यस्थों को जवाब दाखिल करने का निर्देश
दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और संबंधित मध्यस्थों (Intermediaries) को इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कंटेंट अपलोड करने वाला व्यक्ति निर्धारित समय में पोस्ट या लिंक नहीं हटाता है, तो युवराज सिंह को मध्यस्थों की मदद से उसे हटाने की अनुमति दी जा सकती है। अदालत ने कहा कि यदि अपलोडर कार्रवाई नहीं करता है, तो मध्यस्थों को 36 घंटे के भीतर संबंधित सामग्री हटाने की प्रक्रिया में सहयोग करना होगा।
क्या होते हैं पर्सनैलिटी राइट्स?
पर्सनैलिटी राइट्स किसी व्यक्ति को अपने नाम, पहचान, फोटो, आवाज, हस्ताक्षर, लोकप्रियता और अन्य व्यक्तिगत विशेषताओं के अनधिकृत इस्तेमाल से सुरक्षा प्रदान करते हैं। खासतौर पर अभिनेता, खिलाड़ी और सार्वजनिक हस्तियां इन अधिकारों को लेकर अदालत का रुख करती रही हैं, क्योंकि उनकी पहचान का व्यावसायिक इस्तेमाल अक्सर बिना अनुमति के किया जाता है।
युवराज सिंह भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कई यादगार प्रदर्शन किए हैं और 2011 वनडे विश्व कप में भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। उनकी लोकप्रियता और सार्वजनिक छवि को देखते हुए यह मामला पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।










