थाईलैंड के पटाया में तीन भारतीय पर्यटकों के अपहरण के मामले में पुलिस ने पांच भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पीड़ितों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और फिरौती की साजिश की जांच जारी है।
बैंकॉक: थाईलैंड के लोकप्रिय पर्यटन शहर पटाया में तीन भारतीय पर्यटकों के कथित अपहरण का मामला सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस ने पांच भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, पीड़ितों को सस्ते टूर पैकेज का लालच देकर थाईलैंड बुलाया गया और वहां पहुंचने के बाद उन्हें बंधक बनाकर उनके परिवारों से फिरौती मांगी गई। पुलिस ने समय रहते कार्रवाई करते हुए तीनों पीड़ितों को सुरक्षित मुक्त करा लिया है। मामले की जांच अब एक संभावित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क तक पहुंच चुकी है।
कैसे हुई घटना?
पुलिस के अनुसार, तीनों भारतीय युवक पर्यटन के उद्देश्य से थाईलैंड पहुंचे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि उन्हें आकर्षक और कम कीमत वाले सात दिन के टूर पैकेज का प्रस्ताव दिया गया था। पटाया पहुंचने के बाद उन्हें एक मकान में ले जाकर कथित रूप से बंधक बना लिया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि इसके बाद पीड़ितों के परिवारों से प्रत्येक के बदले लगभग 40 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। कुल मिलाकर आरोपियों ने करीब 1.20 करोड़ रुपये की मांग की थी।
पांच भारतीय नागरिक गिरफ्तार
थाई पुलिस ने इस मामले में पांच भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने दावा किया कि वे एक ऐसे व्यक्ति के संपर्क में थे, जो दुबई से निर्देश दे रहा था। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने यह भी बताया कि कथित मास्टरमाइंड पाकिस्तानी नागरिक है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि अभी जांच का विषय है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क, उसके वित्तीय लेन-देन और अन्य संभावित सहयोगियों की पहचान करने में जुटी हैं।
फिरौती के लिए कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि फिरौती की रकम क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से प्राप्त करने की योजना बनाई गई थी। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल संपत्तियों का उपयोग सीमा पार वित्तीय लेन-देन को छिपाने के उद्देश्य से किया जा सकता है। हालांकि, इस मामले में सभी वित्तीय पहलुओं की विस्तृत जांच अभी जारी है।
पीड़ितों ने लगाए प्रताड़ना के आरोप
रेस्क्यू किए गए पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि उन्हें कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया। उनके अनुसार, उन्हें भोजन नहीं दिया गया, हाथ-पैर बांध दिए गए और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से रस्सियां, टेप और अन्य सामान भी बरामद हुआ है, जिन्हें साक्ष्य के रूप में जब्त किया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, पीड़ितों के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं और उनका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया है।

वीडियो कॉल के जरिए परिवारों पर दबाव
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर पीड़ितों के शरीर पर लाल रंग का स्प्रे लगाया ताकि वीडियो कॉल के दौरान ऐसा लगे कि वे गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस का कहना है कि इस तरीके का उद्देश्य परिवारों पर मानसिक दबाव बनाकर जल्द से जल्द फिरौती वसूलना था।
भारतीय दूतावास की सूचना के बाद हुई कार्रवाई
पीड़ितों के परिवारों ने भारतीय दूतावास से संपर्क कर मामले की जानकारी दी। इसके बाद दूतावास ने संबंधित थाई अधिकारियों को सतर्क किया। स्थानीय पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और खुफिया सूचनाओं के आधार पर पटाया स्थित एक मकान पर छापा मारा।
छापेमारी के दौरान तीनों भारतीय नागरिक अलग-अलग कमरों में बंधे हुए मिले। पुलिस ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकालकर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि उनके वहां पहुंचने से पहले भी एक अन्य भारतीय नागरिक को उसी स्थान पर बंधक बनाया गया था। कथित तौर पर उसके परिवार द्वारा फिरौती दिए जाने के बाद उसे छोड़ दिया गया था। पुलिस इस दावे की भी जांच कर रही है और पुराने मामलों से संभावित संबंध तलाश रही है।
थाईलैंड में बढ़ते अंतरराष्ट्रीय अपराध पर चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह पर्यटन, साइबर धोखाधड़ी और फिरौती जैसे अपराधों के लिए विभिन्न देशों के नागरिकों को निशाना बनाते हैं। थाईलैंड एक प्रमुख पर्यटन केंद्र होने के कारण यहां बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे अपराधी भीड़ का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।
हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि अधिकांश पर्यटक बिना किसी समस्या के यात्रा पूरी करते हैं और ऐसे मामले अपवाद स्वरूप होते हैं। फिर भी यात्रियों को केवल विश्वसनीय ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से ही यात्रा बुक करने और संदिग्ध प्रस्तावों से सावधान रहने की सलाह दी जाती है।
क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग जांच के दायरे में
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ अपराधी समूह डिजिटल मुद्राओं का इस्तेमाल इसलिए करते हैं क्योंकि सीमा पार भुगतान अपेक्षाकृत तेज़ी से किया जा सकता है। हालांकि, यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है कि क्रिप्टो लेन-देन का कभी पता नहीं लगाया जा सकता। आधुनिक ब्लॉकचेन विश्लेषण तकनीकों की मदद से कई मामलों में जांच एजेंसियां संदिग्ध लेन-देन का पता लगाने में सफल रही हैं।










