मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट, हूती हमलों के बाद सऊदी अरब हाई अलर्ट पर

सऊदी: मे हूती हमलो के बीच मक्का, जेद्दा और ताइफ में इमरजेंसी अलर्ट जारी किए गए। मक्का में पहली बार ऐसी चेतावनी सामने आई। नागरिकों को खुली जगह से दूर रहने को कहा

सऊदी अरब में हूती हमलों के बीच मंगलवार को मक्का, जेद्दा और ताइफ में इमरजेंसी अलर्ट जारी किए गए। मक्का में पहली बार ऐसी चेतावनी सामने आई। नागरिकों को घरों के अंदर रहने और खिड़कियों, छतों तथा खुले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई।

मक्का: सऊदी अरब में यमन के हूती विद्रोहियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच मंगलवार को मक्का, जेद्दा और ताइफ में इमरजेंसी अलर्ट जारी किए गए। मक्का में इस तरह की चेतावनी पहली बार जारी होने की खबर है। सऊदी सिविल डिफेंस ने लोगों को घरों के अंदर रहने, खिड़कियों और खुले इलाकों से दूर रहने तथा आधिकारिक निर्देशों का पालन करने को कहा।

मक्का में पहली बार इमरजेंसी चेतावनी

मंगलवार को सऊदी अरब के नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म फॉर इमरजेंसी के जरिए मक्का में संभावित खतरे की चेतावनी जारी की गई। सऊदी सिविल डिफेंस ने लोगों से शांत रहने और तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की। कुछ देर बाद अधिकारियों ने बताया कि मक्का में खतरा टल गया है। लोगों से भीड़ वाले इलाकों से दूर रहने और घटनाओं की फोटो या वीडियो बनाने से बचने को कहा गया।

इसी दिन जेद्दा और ताइफ में भी अलर्ट जारी किए गए। इन शहरों के लोगों को घर के अंदर रहने और खिड़कियों, बालकनी, छत तथा खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी गई। बाहर मौजूद लोगों से नजदीकी इमारत में जाने या किसी मजबूत ढांचे की आड़ लेने को कहा गया।

हूती हमलों के बीच बढ़ी मक्का की सुरक्षा चिंता

मक्का दुनिया का प्रमुख इस्लामिक तीर्थस्थल है और यहां मस्जिद अल-हरम तथा काबा स्थित हैं। ऐसे में मिसाइल या ड्रोन हमले की आशंका के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है।

मंगलवार की चेतावनी ऐसे समय आई है, जब हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ मिसाइल और ड्रोन हमले तेज किए हैं। इससे पहले 8 सितंबर को सऊदी अधिकारियों ने बताया था कि हूती हमलों में अबहा, खमिस मुशैत, जाजान और नजरान में 73 नागरिक घायल हुए थे। हमलों में ऊर्जा क्षेत्र की कुछ सुविधाओं को भी नुकसान पहुंचा और कुछ जगहों पर आग लगने की सूचना सामने आई थी।

9 सितंबर को भी अबहा और खमिस मुशैत समेत दक्षिणी सऊदी शहरों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमलों की सूचना मिली थी। सऊदी अधिकारियों ने बाद में वहां जारी नागरिक चेतावनियां हटा दी थीं।

2017 में भी मक्का की ओर दागी गई थी मिसाइल

मक्का को पहले भी हूती हमले की आशंका का सामना करना पड़ा है। 2017 में हूती विद्रोहियों की ओर से मक्का की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइल दागे जाने की खबर आई थी। सऊदी अधिकारियों के अनुसार, मिसाइल को मक्का से करीब 69 किलोमीटर दूर अल-वसिलिया इलाके में रोक दिया गया था।

अब 2026 में मक्का के आसपास फिर सुरक्षा अलर्ट जारी होने से इस पवित्र शहर की हवाई सुरक्षा पर ध्यान बढ़ गया है। 16 सितंबर को सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यह भी कहा कि मक्का के पास एक हूती ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया। हालांकि, हूती पक्ष ने मक्का को निशाना बनाने से इनकार किया है।

लोगों के लिए जारी की गईं ये सुरक्षा हिदायतें

सऊदी सिविल डिफेंस ने अलर्ट के दौरान लोगों को कई सावधानियां बरतने को कहा। इनमें शामिल हैं:

  • घर के अंदर और सुरक्षित जगह पर रहना।
  • खिड़कियों, बालकनी और छत से दूर रहना।
  • खुले मैदान और भीड़ वाले स्थानों पर जाने से बचना।
  • बाहर होने पर नजदीकी मजबूत इमारत में शरण लेना।
  • आधिकारिक सुरक्षा निर्देशों का पालन करना।
  • किसी घटना की फोटो या वीडियो बनाने से बचना।
  • वाहन चलाते समय पुलों और ऊंची इमारतों से दूर सुरक्षित स्थान पर रुकना।

इन निर्देशों का उद्देश्य संभावित मिसाइल या ड्रोन हमले की स्थिति में नागरिकों को जोखिम से दूर रखना है।

यमन में भी तेजी से बदल रहे हैं हालात

सऊदी अरब पर हमलों के साथ-साथ यमन में भी हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थित बलों के बीच लड़ाई तेज हो गई है। पिछले दिनों हूतियों ने यमन के पश्चिमी लाल सागर तट पर अपना नियंत्रण बढ़ाया है।

14 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार, हूतियों ने ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीपों पर कब्जा कर लिया। ये द्वीप बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 160 किलोमीटर उत्तर में स्थित हैं। इससे लाल सागर और बाब अल-मंदेब क्षेत्र में हूतियों की स्थिति मजबूत होने की रिपोर्ट सामने आई है।

इससे पहले हूती बलों ने मोखा बंदरगाह और मायून द्वीप पर भी कब्जा किया था। बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है।

यमन में 500 से ज्यादा सरकारी लड़ाके मारे जाने का दावा

यमन की सरकार समर्थित नेशनल रेजिस्टेंस फोर्स ने दावा किया है कि 9 अगस्त से 10 सितंबर के बीच पश्चिमी तट पर हुई लड़ाई में उसके 500 से अधिक लड़ाके मारे गए और करीब 1,500 घायल हुए। संगठन ने यह भी दावा किया कि इसी अवधि में 1,000 से ज्यादा हूती लड़ाके मारे गए।

हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए दोनों पक्षों द्वारा बताए गए हताहतों के आंकड़ों को दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

सऊदी की मदद पर पाकिस्तान की भूमिका चर्चा में

हूती हमलों के बढ़ने के बीच सऊदी अरब की सुरक्षा सहायता को लेकर पाकिस्तान की भूमिका भी चर्चा में है। The Jerusalem Post ने रिपोर्ट किया है कि पाकिस्तान ने हूतियों के खिलाफ यमन में लड़ने के लिए अपने सैनिक भेजने से इनकार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सऊदी अरब की रक्षा के लिए समर्थन की बात कर सकता है, लेकिन किसी दूसरे देश की जमीन पर युद्ध में सीधे शामिल होने से बच रहा है।

इसी बीच सऊदी अरब की ओर से हूती खतरे से निपटने के लिए दूसरे देशों से मदद लेने की खबरें भी सामने आई हैं। The Jerusalem Post के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के माध्यम से सऊदी और इजराइल के बीच संभावित खुफिया सहयोग को लेकर संपर्क हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बातचीत का फोकस हूती सैन्य तैनाती और संभावित खतरों से जुड़ी खुफिया जानकारी पर हो सकता है।

बढ़ते तनाव का असर सऊदी से आगे तक

यमन में हूती गतिविधियों का असर केवल सऊदी अरब और यमन तक सीमित नहीं है। बाब अल-मंदेब क्षेत्र में बढ़ता तनाव समुद्री परिवहन, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। इसी वजह से हालिया घटनाक्रम पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जा रही है।

फिलहाल मक्का, जेद्दा और ताइफ में जारी किए गए मंगलवार के अलर्ट को हटा दिया गया है। लेकिन सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच लगातार हमलों तथा यमन में बदलते सैन्य हालात के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर तनाव बना हुआ है।

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