ट्रम्प की डाक वोटिंग योजना पर सुप्रीम कोर्ट की रोक बरकरार, 7-2 से फैसला

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के डाक वोटिंग नियम सख्त करने वाले आदेश पर लगी रोक हटाने से इनकार किया। 7-2 फैसले में निचली अदालत का आदेश बरकरार रहा।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के डाक मतदान नियम सख्त करने वाले आदेश पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया। 7-2 के फैसले में अदालत ने निचली अदालत का आदेश बरकरार रखा। मामला 3 नवंबर 2026 के मिडटर्म चुनाव से जुड़ा है।

वॉशिंगटन: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के डाक से मतदान के नियमों को सख्त करने वाले आदेश को लागू करने की राह में बड़ा झटका दिया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को हटाने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के 9 में से 7 जजों ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखने के पक्ष में फैसला दिया, जबकि 2 जज इसके विरोध में थे।

यह मामला नवंबर 2026 में होने वाले अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से जुड़ा है। ट्रम्प प्रशासन ने डाक से मतदान में कथित गड़बड़ियों को रोकने के उद्देश्य से मार्च में नए नियम लागू करने का आदेश दिया था। इसके तहत राज्यों से डाक मतदाताओं की जानकारी अमेरिकी डाक सेवा यानी USPS को उपलब्ध कराने की योजना थी।

ट्रम्प के आदेश में क्या था?

ट्रम्प के प्रस्तावित नियमों के तहत राज्यों को डाक से मतदान करने वाले मतदाताओं की सूची अमेरिकी डाक सेवा को देने की बात कही गई थी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि डाक के जरिए भेजे गए बैलेट तय नियमों और मतदाता की पहचान से मेल खाते हों। अगर किसी बैलेट की जानकारी नए नियमों के अनुरूप नहीं होती या मतदाता का नाम निर्धारित सूची में नहीं मिलता, तो USPS को उस बैलेट को रोकने का अधिकार मिल सकता था।

हालांकि, इस आदेश के खिलाफ डेमोक्रेटिक पार्टी की सरकार वाले कई राज्यों और मतदान अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने अदालत का रुख किया।

इन संगठनों और राज्यों का तर्क था कि नई व्यवस्था चुनाव के दौरान मतदाताओं के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती है। उनका कहना था कि नए नियमों के कारण वैध मतपत्रों की प्रक्रिया प्रभावित होने का जोखिम हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा

निचली अदालत पहले ही ट्रम्प के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा चुकी थी। प्रशासन ने इस रोक को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने 7-2 के फैसले में निचली अदालत की रोक को हटाने से इनकार कर दिया। इसका मतलब है कि नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों के लिए ट्रम्प प्रशासन की प्रस्तावित डाक मतदान व्यवस्था फिलहाल लागू नहीं हो सकेगी।

इस फैसले में अदालत ने चुनाव प्रक्रिया में बदलाव की टाइमिंग को भी महत्वपूर्ण माना। मामला केवल प्रस्तावित नियमों की वैधता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि चुनाव से पहले उन्हें लागू करने के लिए उपलब्ध समय भी अहम मुद्दा बना।

चुनाव से पहले नियम बदलने की टाइमिंग पर सवाल

जस्टिस ब्रेट कावानॉ ने कहा कि ट्रम्प की योजना को भविष्य में होने वाले चुनावों में लागू किया जा सकता है। लेकिन नवंबर में होने वाले चुनाव से ठीक पहले पूरी व्यवस्था बदलना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो सकता है।

अमेरिकी राज्यों में चुनाव से संबंधित तैयारियां काफी पहले शुरू हो जाती हैं। कई राज्यों में नवंबर के चुनाव के लिए बैलेट भेजने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

ऐसे में नई व्यवस्था लागू करने के लिए चुनाव अधिकारियों को नए नियम समझने, उन्हें राज्यों में लागू करने और पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया तैयार करने के लिए पर्याप्त समय की जरूरत होती। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में इसी समय-सीमा को महत्वपूर्ण माना गया।

ट्रम्प पहले भी डाक वोटिंग पर उठा चुके हैं सवाल

डोनाल्ड ट्रम्प लंबे समय से डाक से मतदान को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। खास तौर पर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद उन्होंने मेल-इन वोटिंग की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठाए थे।

ट्रम्प ने उस चुनाव के बाद बिना सबूत यह दावा किया था कि चुनाव में गड़बड़ी हुई और उनसे जीत छीन ली गई। हालांकि, वह खुद भी डाक से मतदान कर चुके हैं।

इस साल फ्लोरिडा के रिपब्लिकन प्राइमरी चुनाव में ट्रम्प ने मेल बैलेट के जरिए वोट किया था। इस तथ्य को उनके डाक मतदान पर सार्वजनिक रुख के संदर्भ में भी देखा गया।

अमेरिका में 3 नवंबर को होंगे मिडटर्म चुनाव

अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में कांग्रेस के दोनों सदनों—हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट—के लिए मतदान होगा।

फिलहाल अमेरिकी कांग्रेस में रिपब्लिकन पार्टी के पास डेमोक्रेटिक पार्टी की तुलना में अधिक सीटें हैं। हालांकि, दोनों दलों के बीच सीटों का अंतर बहुत बड़ा नहीं है।

ऐसे में नवंबर के चुनाव राष्ट्रपति ट्रम्प के राजनीतिक एजेंडे के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अगर डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों सदनों में पर्याप्त सीटें हासिल करके बहुमत की स्थिति में आती है, तो वह ट्रम्प प्रशासन के कई फैसलों को चुनौती देने और सरकार के कामकाज की जांच करने में अधिक सक्षम हो सकती है।

अमेरिका में डाक मतदान का इतिहास

अमेरिका में डाक के जरिए मतदान की व्यवस्था नई नहीं है। इसकी शुरुआत मुख्य रूप से सैनिकों और ऐसे मतदाताओं की सुविधा के लिए हुई थी, जो चुनाव के दिन मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच सकते थे।

समय के साथ कई राज्यों ने इस सुविधा का दायरा बढ़ाया और आम मतदाताओं के लिए भी डाक से मतदान को आसान बनाया।

2020 के राष्ट्रपति चुनाव में कोरोना महामारी के कारण मेल-इन वोटिंग का इस्तेमाल काफी बढ़ गया। बड़ी संख्या में मतदाताओं ने मतदान केंद्र जाने के बजाय घर से डाक के जरिए अपना वोट भेजा।

इसके बाद डाक से मतदान की सुरक्षा, मतदाता पहचान और बैलेट की गिनती को लेकर अमेरिका में राजनीतिक बहस तेज हुई।

डाक वोटिंग में होती हैं कई सुरक्षा जांच

डाक से मतदान की प्रक्रिया में मतदाता की पहचान और उसके बैलेट की पुष्टि के लिए अलग-अलग सुरक्षा प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। चुनाव अधिकारी यह भी जांच करते हैं कि मतदाता ने एक से अधिक बार मतदान तो नहीं किया है।

2020 के बाद कई राज्यों ने डाक से मतदान के नियमों में बदलाव किए। कुछ राज्यों ने पहचान सत्यापन और बैलेट की निगरानी से जुड़े नियमों को और सख्त किया।

हालांकि, अमेरिका में डाक मतदान के नियम सभी राज्यों में एक जैसे नहीं हैं। अलग-अलग राज्यों में बैलेट भेजने, पहचान सत्यापित करने, उसे प्राप्त करने और उसकी गिनती से संबंधित प्रक्रियाएं अलग हो सकती हैं।

ट्रम्प प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट से पहले भी झटके

डाक वोटिंग से जुड़े मामले से पहले भी ट्रम्प प्रशासन को कई कानूनी मामलों में सुप्रीम कोर्ट से चुनौती का सामना करना पड़ा है।

टैरिफ मामला

फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के टैरिफ को अवैध ठहराया और कहा कि राष्ट्रपति को इस तरह टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।

इलिनॉय में नेशनल गार्ड

दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को इलिनॉय में नेशनल गार्ड तैनात करने की तत्काल अनुमति नहीं दी थी।

बर्थराइट सिटीजनशिप

जून 2026 में ट्रम्प प्रशासन के उस आदेश से जुड़ा मामला भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसमें अमेरिका में जन्म लेने वाले कुछ बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की कोशिश की गई थी। अदालत ने कहा कि मौजूदा कानून राष्ट्रपति को ऐसा बदलाव करने की अनुमति नहीं देता।

बर्थ टूरिज्म से जुड़ा मामला

सितंबर 2026 में बर्थराइट सिटीजनशिप को लेकर सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बाद ट्रम्प प्रशासन ने बर्थ टूरिज्म रोकने और कुछ मामलों में बच्चों की नागरिकता सीमित करने से जुड़ा नया आदेश जारी किया। इस पर भी अदालत ने रोक लगा दी।

फेडरल रिजर्व गवर्नर का मामला

जून 2026 में ट्रम्प द्वारा फेडरल रिजर्व की गवर्नर लिसा कुक को पद से हटाने की कोशिश का मामला भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अदालत ने फिलहाल इस कार्रवाई पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि फेड गवर्नर को राष्ट्रपति बिना उचित कानूनी कारण और निर्धारित प्रक्रिया के नहीं हटा सकते।

नवंबर चुनाव से पहले बढ़ी कानूनी और राजनीतिक अहमियत

सुप्रीम कोर्ट का ताजा फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका नवंबर के मिडटर्म चुनाव की तैयारी कर रहा है। डाक मतदान से जुड़े नियमों में बदलाव की ट्रम्प प्रशासन की कोशिश फिलहाल अदालत की रोक के कारण आगे नहीं बढ़ पाएगी।

फैसले का तत्काल असर नवंबर 2026 के चुनावों पर पड़ सकता है, क्योंकि राज्यों में मतदान की तैयारियां पहले से जारी हैं। वहीं, भविष्य के चुनावों में ट्रम्प प्रशासन की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर कानूनी बहस जारी रहने की संभावना बनी हुई है।

इस मामले ने एक बार फिर अमेरिका में डाक से मतदान, मतदाता पहचान, चुनावी सुरक्षा और राज्यों की चुनाव प्रक्रिया के अधिकारों को लेकर चल रही राजनीतिक और कानूनी बहस को केंद्र में ला दिया है।

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