अफ्रीका की सबसे बड़ी शेयर बिक्री शुरू, डांगोटे रिफाइनरी में 3% हिस्सेदारी आम लोगों को ऑफर

अफ्रीकी अरबपति अलिको डांगोटे ने रिफाइनरी की 3% हिस्सेदारी की शेयर बिक्री शुरू की है। IPO से 2.1 अरब डॉलर तक जुटाने और क्षमता दोगुनी करने की योजना है।

अफ्रीका के सबसे अमीर व्यक्ति अलिको डांगोटे ने अपनी तेल रिफाइनरी की करीब 3% हिस्सेदारी आम निवेशकों को बेचने की प्रक्रिया शुरू की है। इस IPO से 2.1 अरब डॉलर तक जुटाने और रिफाइनरी की क्षमता दोगुनी करने की योजना है।

लागोस: अफ्रीका के सबसे अमीर व्यक्ति और नाइजीरियाई अरबपति अलिको डांगोटे ने महाद्वीप की अब तक की सबसे बड़ी शेयर बिक्री शुरू की है। इस ऑफर के तहत उनकी विशाल तेल रिफाइनरी में करीब 3% हिस्सेदारी आम लोगों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है। इस शेयर बिक्री से करीब 2.1 अरब डॉलर तक जुटाए जाने की उम्मीद है।

डांगोटे का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य आम नाइजीरियाई नागरिकों को भी रिफाइनरी की सफलता में हिस्सेदार बनने का अवसर देना है। 2024 में उत्पादन शुरू करने वाली डांगोटे रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में शामिल है और इसे पूरा होने में एक दशक से अधिक समय लगा।

आम नाइजीरियाई बन सकेंगे रिफाइनरी के हिस्सेदार

शेयर बिक्री शुरू होने के साथ ही कई नाइजीरियाई नागरिकों में रिफाइनरी का हिस्सा खरीदने को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। निवेशकों के लिए न्यूनतम खरीद 10 शेयर तय की गई है, जिसकी कीमत लगभग 4 डॉलर है।

बीबीसी से बातचीत में निवेशक इसाह सालिसु ने बताया कि उन्होंने निवेश के लिए अपनी बचत से 50,000 नायरा निकाले हैं। यह राशि करीब 28 पाउंड या 37 डॉलर के बराबर है।

सालिसु ने कहा कि उनकी उम्मीद है कि उनका छोटा निवेश भविष्य में बड़ा हो सकता है और वह इस अवसर से चूकना नहीं चाहते, क्योंकि उनके जानने वाले कई लोग भी निवेश कर रहे हैं।

एक महीने तक चलेगा IPO

डांगोटे रिफाइनरी की यह प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश यानी IPO करीब एक महीने तक चलेगी। इसके जरिए आम निवेशकों को कंपनी में छोटी हिस्सेदारी खरीदने का अवसर मिलेगा।

हालांकि, अर्थव्यवस्था और कारोबार विशेषज्ञ डॉ. अब्दुलरजाक इब्राहिम फागे ने निवेशकों को शेयर बाजार से जुड़े जोखिमों के प्रति आगाह किया है। उन्होंने इस शेयर बिक्री को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि निवेशकों को यह समझना चाहिए कि शेयर की कीमत गिर भी सकती है और ऐसी स्थिति में उन्हें अपने निवेश का कुछ हिस्सा गंवाना पड़ सकता है।

पहली बार निवेश करने वालों को सलाह

डॉ. फागे ने खास तौर पर पहली बार शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी पूरी बचत या उस पैसे का निवेश नहीं करना चाहिए जिसकी उन्हें अगले कुछ महीनों में जरूरत पड़ सकती है।

उनके अनुसार, निवेशकों को केवल ऐसी रकम लगानी चाहिए जिसके बिना वे अगले तीन, चार या पांच साल तक काम चला सकें।

यह सलाह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बड़ी संख्या में आम नागरिक पहली बार किसी बड़ी औद्योगिक परियोजना में प्रत्यक्ष हिस्सेदारी खरीदने के अवसर को लेकर उत्साहित हैं।

धोखाधड़ी से बचने की चेतावनी

विशेषज्ञ ने संभावित निवेशकों को साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी से भी सावधान रहने को कहा है। उन्होंने चेताया कि प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी नहीं रखने वाले लोगों को निशाना बनाने के लिए धोखेबाज सक्रिय हो सकते हैं।

उन्होंने निवेशकों को केवल उन संस्थानों के माध्यम से लेनदेन करने की सलाह दी है जिन्हें शेयर बिक्री के लिए आधिकारिक तौर पर सूचीबद्ध किया गया है।

इस चेतावनी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि बड़ी संख्या में छोटे निवेशक पहली बार इस तरह के सार्वजनिक शेयर ऑफर में हिस्सा ले सकते हैं।

नाइजीरिया के लिए क्यों महत्वपूर्ण है डांगोटे रिफाइनरी?

नाइजीरिया अफ्रीका का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। इसके बावजूद डांगोटे रिफाइनरी के शुरू होने से पहले देश को अपनी रिफाइनिंग क्षमता की कमी के कारण बड़ी मात्रा में ईंधन आयात करना पड़ता था।

2024 में उत्पादन शुरू करने के बाद डांगोटे रिफाइनरी नाइजीरिया के ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रिफाइनरी अब देश की ऊर्जा खपत का 70% से अधिक हिस्सा आपूर्ति करती है।

यही वजह है कि रिफाइनरी में आम नागरिकों को हिस्सेदारी देने का फैसला केवल वित्तीय बाजार के लिहाज से ही नहीं, बल्कि नाइजीरिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

650,000 बैरल प्रतिदिन की क्षमता

लागोस के पास लेक्की फ्री जोन में स्थित डांगोटे रिफाइनरी की कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता 650,000 बैरल प्रतिदिन है। यह क्षमता इसे दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी रिफाइनरी बनाती है।

इतनी बड़ी परियोजना तैयार करने के लिए बड़े पैमाने पर निर्माण और भूमि विकास कार्य किए गए। परियोजना के लिए जमीन को समुद्र से पुनः प्राप्त करने की प्रक्रिया में लगभग 6.5 करोड़ घन मीटर रेत स्थानांतरित की गई।

रिफाइनरी का निर्माण पूरा करना एक लंबी प्रक्रिया रही। इसकी घोषणा पहली बार 2013 में की गई थी और उस समय परियोजना की अनुमानित लागत करीब 19 अरब डॉलर बताई गई थी।

हालांकि, निर्माण कार्य 2017 में शुरू हुआ और बाद में कोविड-19 महामारी के कारण परियोजना में और देरी हुई।

डांगोटे ने सीमेंट और चीनी से बनाया कारोबार

67 वर्षीय अलिको डांगोटे का जन्म नाइजीरिया के कानो में हुआ था। फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति करीब 28 अरब डॉलर है।

उन्होंने नाइजीरिया में सीमेंट और चीनी कारोबार के जरिए अपनी संपत्ति बनाई और बाद में अपने कारोबारी विस्तार को अफ्रीका के अन्य देशों तक पहुंचाया। उनका कारोबार अब नाइजीरिया के अलावा 16 अन्य अफ्रीकी देशों तक फैला हुआ है।

उनकी कंपनी डांगोटे सीमेंट अफ्रीका की सबसे बड़ी सीमेंट उत्पादक कंपनी है। तेल रिफाइनरी परियोजना ने उनके कारोबारी साम्राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है।

रिफाइनरी की क्षमता दोगुनी करने की योजना

शेयर बिक्री से जुटाई जाने वाली रकम का इस्तेमाल रिफाइनरी की क्षमता बढ़ाने के लिए किया जाना है। योजना के तहत इसकी मौजूदा क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।

यदि यह विस्तार योजना आगे बढ़ती है, तो डांगोटे रिफाइनरी की भूमिका नाइजीरिया की घरेलू ईंधन जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ व्यापक क्षेत्रीय ऊर्जा बाजार में भी बढ़ सकती है।

अफ्रीकी पूंजी बाजार के लिए बड़ा कदम

डांगोटे रिफाइनरी की हिस्सेदारी आम जनता को बेचने का फैसला अफ्रीका के पूंजी बाजार के लिए भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। संभावित रूप से 2.1 अरब डॉलर तक की यह शेयर बिक्री महाद्वीप की अब तक की सबसे बड़ी शेयर बिक्री होगी।

एक ओर यह आम नाइजीरियाई नागरिकों को देश की प्रमुख औद्योगिक संपत्तियों में हिस्सेदारी लेने का अवसर देती है, वहीं दूसरी ओर निवेशकों को शेयर बाजार के जोखिमों को समझकर फैसला लेने की जरूरत होगी।

रिफाइनरी की क्षमता विस्तार के लिए पूंजी जुटाने की यह कोशिश नाइजीरिया के ऊर्जा क्षेत्र, घरेलू ईंधन आपूर्ति और वित्तीय बाजार—तीनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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