फिनलैंड में यूरोपीय नेताओं ने आर्कटिक की बढ़ती रणनीतिक अहमियत पर चर्चा की। जलवायु परिवर्तन से नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं, जबकि प्राकृतिक संसाधनों की प्रतिस्पर्धा, रूस की सैन्य गतिविधियां, चीन की व्यापारिक मौजूदगी और ग्रीनलैंड से जुड़े मुद्दे यूरोप की चिंताएं बढ़ा रहे हैं।
हेलसिंकी: फिनलैंड में सोमवार को यूरोपीय देशों के शीर्ष नेता आर्कटिक क्षेत्र को लेकर बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा पर चर्चा के लिए जुटे। जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से पिघलती बर्फ नए समुद्री मार्ग खोल रही है, जबकि आर्कटिक के विशाल प्राकृतिक संसाधन दुनिया का ध्यान खींच रहे हैं। इसी बीच रूस की सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी ने यूरोप की सुरक्षा चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
रोवानिएमी में दो दिवसीय यूरोपीय आर्कटिक शिखर सम्मेलन
फिनलैंड के रोवानिएमी शहर में दो दिवसीय European Arctic Summit का आयोजन किया जा रहा है। यह शहर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने Santa Claus Village के लिए जाना जाता है। सम्मेलन की शुरुआत रविवार को हुई और सोमवार को भी यूरोपीय नेताओं की बैठक जारी रही।
सम्मेलन में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन सहित कई यूरोपीय नेता शामिल होने वाले हैं। बैठक का मुख्य उद्देश्य आर्कटिक क्षेत्र में तेजी से बदलती परिस्थितियों और उससे यूरोप के सामने पैदा हो रही रणनीतिक चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण तैयार करना है।
आर्कटिक की सुरक्षा और समृद्धि पर फिनलैंड का जोर
फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो ने कहा कि यूरोप की सुरक्षा और समृद्धि के लिए आर्कटिक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने इस क्षेत्र के सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर यूरोपीय देशों के बीच साझा समझ और ठोस कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।
ओर्पो ने पत्रकारों से कहा कि आर्कटिक में प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं और जलवायु परिवर्तन के कारण नए समुद्री मार्ग खुल रहे हैं। हालांकि, उन्होंने साथ ही क्षेत्र में मौजूद खतरों की ओर भी ध्यान दिलाया।
उन्होंने कहा, "हमारे पास प्राकृतिक संसाधन हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण हमारे पास नए समुद्री मार्ग हैं। लेकिन हमारे सामने खतरे भी हैं। इसलिए हमें ठोस कदम उठाने की जरूरत है।"
ओर्पो ने यूरोपीय देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर जोर देते हुए कहा कि वे मिलकर बहुत कुछ कर सकते हैं।
रूसी पोत की जब्ती के बाद बढ़ा तनाव
यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब आर्कटिक क्षेत्र से जुड़ा रूस और यूरोपीय देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। सम्मेलन की शुरुआत से कुछ समय पहले नॉर्वे ने यूक्रेन के अनुरोध पर सुदूर आर्कटिक Svalbard द्वीपसमूह में एक रूसी पोत को जब्त किया था।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस कार्रवाई की निंदा की। इस घटना ने आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री गतिविधियों और रूस के साथ यूरोपीय देशों के संबंधों को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है।
जलवायु परिवर्तन से खुल रहे नए समुद्री रास्ते
आर्कटिक में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव इस क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत को तेजी से बदल रहा है। बर्फ की मोटाई कम होने के कारण ऐसे समुद्री मार्ग धीरे-धीरे अधिक सुलभ हो रहे हैं, जो पहले बेहद कठिन परिस्थितियों के कारण सीमित रूप से ही इस्तेमाल किए जा सकते थे।
इन बदलावों से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं। हालांकि, इसके साथ ही रूस, चीन और अन्य देशों के बीच आर्कटिक के खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों को लेकर प्रतिस्पर्धा भी तेज हो रही है।
आर्कटिक अब केवल पर्यावरण और जलवायु से जुड़ा क्षेत्र नहीं रह गया है। समुद्री परिवहन, ऊर्जा, खनिज संसाधन और सुरक्षा के लिहाज से इसका महत्व तेजी से बढ़ रहा है।
चीन की बढ़ती व्यापारिक गतिविधियों पर भी नजर
Centres for European Policy Network नामक थिंक टैंक ने सम्मेलन की पृष्ठभूमि को "बेहद गतिशील" बताया है। संस्था ने आर्कटिक में तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ चीन की बढ़ती व्यापारिक गतिविधियों को भी महत्वपूर्ण कारक बताया।
थिंक टैंक के अनुसार, Strait of Hormuz के आसपास जारी संघर्ष और उससे जुड़ी बाधाओं ने भी वैकल्पिक समुद्री मार्गों की ओर ध्यान बढ़ाया है। ऐसे में Northeast Passage को समुद्री माल ढुलाई के संभावित वैकल्पिक रास्ते के रूप में देखा जा रहा है।
Hormuz मार्ग में व्यवधान के कारण वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। इस स्थिति में आर्कटिक के समुद्री मार्गों की रणनीतिक उपयोगिता पर भी नए सिरे से विचार किया जा रहा है।
EU की नई Arctic Policy के लिए 'ड्रेस रिहर्सल'
रोवानिएमी सम्मेलन को यूरोपीय संघ की आर्कटिक नीति में संभावित बदलाव की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है। थिंक टैंक ने इसे EU की नई Arctic Policy के लिए एक तरह की "ड्रेस रिहर्सल" बताया है।
यूरोपीय संघ की आर्कटिक नीति में इस वर्ष शरद ऋतु में संशोधन की उम्मीद है। प्रस्तावित बदलाव में पहली बार सुरक्षा को केंद्रीय स्थान मिलने की संभावना जताई गई है।
यह बदलाव इस बात का संकेत है कि यूरोप आर्कटिक को अब केवल जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और आर्थिक अवसरों के नजरिए से नहीं देख रहा, बल्कि इसे व्यापक रणनीतिक और सुरक्षा दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मान रहा है।
ग्रीनलैंड ने बढ़ाई आर्कटिक की रणनीतिक अहमियत
आर्कटिक की रणनीतिक स्थिति को लेकर ग्रीनलैंड भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वशासित क्षेत्र है और डेनमार्क यूरोपीय संघ का सदस्य देश है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार संसाधनों से समृद्ध ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लाने में रुचि जताई है। हालांकि, ग्रीनलैंड की सरकार ने इस विचार का विरोध किया है।
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच रणनीतिक हितों की यह स्थिति आर्कटिक क्षेत्र की बदलती भू-राजनीति को और जटिल बनाती है। क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों, समुद्री मार्गों और सुरक्षा हितों के कारण प्रमुख शक्तियों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।
EU ने ग्रीनलैंड के लिए 200 मिलियन यूरो के समर्थन का ऐलान किया
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने पिछले सप्ताह ग्रीनलैंड के लिए अगले दो वर्षों के दौरान 200 मिलियन यूरो यानी करीब 232 मिलियन अमेरिकी डॉलर की EU सहायता की पेशकश की।
इस पैकेज का उद्देश्य ग्रीनलैंड को जलवायु परिवर्तन से निपटने और इंटरनेट कनेक्टिविटी मजबूत करने में मदद करना है। इसके साथ ही हाइड्रोपावर, मत्स्य पालन और शिक्षा के क्षेत्रों को भी समर्थन देने की योजना है।
यह सहायता ऐसे समय में सामने आई है जब ग्रीनलैंड आर्कटिक की बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के केंद्र में है। यूरोपीय संघ की ओर से आर्थिक और बुनियादी ढांचे से जुड़ा समर्थन क्षेत्र के साथ यूरोप की भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यूरोप के लिए आर्कटिक क्यों बन रहा है अहम?
आर्कटिक में बदलती जलवायु, नए समुद्री मार्गों की संभावनाएं, प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता और रूस की सैन्य गतिविधियां इसे यूरोपीय सुरक्षा और आर्थिक नीति के लिए महत्वपूर्ण बना रही हैं।
इसके अलावा चीन की बढ़ती व्यापारिक गतिविधियां, Hormuz मार्ग में व्यवधान और ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की रुचि ने क्षेत्र की रणनीतिक जटिलता को और बढ़ाया है।
रोवानिएमी में हो रही बैठक इसी बदलते परिदृश्य में यूरोपीय देशों को एक साझा रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर दे रही है। आने वाले समय में EU की नई Arctic Policy में सुरक्षा को मिलने वाली प्रमुख भूमिका इस बात को रेखांकित कर सकती है कि आर्कटिक अब यूरोप की विदेश नीति, व्यापार और सुरक्षा एजेंडे का अहम हिस्सा बन चुका है।










