कनाडा यूरोपीय संघ के साथ चाहता है ‘अनोखा गठबंधन’, अमेरिका से व्यापार युद्ध बढ़ने के बीच कार्नी की नई रणनीति

टोरंटो: अमेरिका से बढ़ते व्यापार तनाव के बीच कनाडा के PM मार्क कार्नी EU के साथ ‘अनोखा गठबंधन’ चाहते हैं। उन्होंने पूर्ण सदस्यता की योजना से इनकार किया है।

अमेरिका से बढ़ते व्यापार तनाव के बीच कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने यूरोपीय संघ के साथ “अनोखा गठबंधन” बनाने की बात कही है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि कनाडा EU की औपचारिक सदस्यता नहीं चाहता और सहयोग बढ़ाने पर जोर देगा।

टोरंटो: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि उनका देश यूरोपीय संघ (EU) के साथ एक “अनोखा गठबंधन” बनाने की दिशा में बातचीत शुरू करेगा। हालांकि, कनाडा की यूरोपीय संघ में औपचारिक सदस्यता लेने की कोई योजना नहीं है। कार्नी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

EU के साथ संबंध मजबूत करने की तैयारी

मार्क कार्नी ने रविवार को टोरंटो में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि कनाडा यूरोपीय संघ के साथ एक ऐसे गठबंधन की तलाश कर रहा है, जो दोनों पक्षों की साझा प्राथमिकताओं और मूल्यों पर आधारित हो। उन्होंने कहा कि इस दिशा में जल्द ही बातचीत शुरू की जाएगी।

कार्नी के मुताबिक, कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच कई समानताएं हैं। उन्होंने कहा, “हम समान मूल्यों को साझा करते हैं। हमारी प्राथमिकताएं समान हैं और हमारी ताकतें एक-दूसरे की पूरक हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि दोनों पक्ष साथ मिलकर अधिक मजबूत हो सकते हैं। कार्नी ने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया अधिक खतरनाक और विभाजित हो रही है और ऐसे समय में मित्र देशों को एक-दूसरे के साथ खड़ा रहना चाहिए।

‘एसोसिएट सदस्य’ बनने की रिपोर्ट पर कार्नी ने किया इनकार

कार्नी का यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि यूरोपीय संघ के कुछ अधिकारी कनाडा को ब्लॉक का “एसोसिएट सदस्य” बनाने के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए तैयार हैं।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों के अधिकारियों ने संकेत दिया था कि कार्नी की ओर से कनाडा को यूरोपीय संघ के साथ किसी तरह की सहयोगी सदस्यता देने का सुझाव सामने आया था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कार्नी ने यूरोप के लिए अपने विशेष दूत को पूर्ण सदस्यता से अलग रहते हुए सबसे महत्वाकांक्षी संभावनाओं का आकलन करने के निर्देश दिए हैं।

हालांकि, कार्नी ने कनाडा की औपचारिक EU सदस्यता की किसी योजना से इनकार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कनाडा का लक्ष्य यूरोपीय संघ के साथ संबंधों को एक नए और अधिक महत्वाकांक्षी स्तर तक ले जाना है, न कि संगठन का पूर्ण सदस्य बनना।

अमेरिका के साथ बढ़ रहा व्यापार तनाव

कनाडा और अमेरिका के बीच हाल के सप्ताहों में व्यापार तनाव तेज हुआ है। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता अगस्त के अंत में टूटने के बाद स्थिति और गंभीर हुई।

अमेरिका ने कनाडा के स्टील, एल्युमीनियम और लकड़ी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर टैरिफ लगाए हैं। इसके अलावा अमेरिका ने कनाडा से आने वाले करीब C$28 अरब यानी लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर और 15 अरब पाउंड मूल्य के सामान पर अतिरिक्त 50 प्रतिशत शुल्क भी लगाया है।

इन अमेरिकी शुल्कों के जवाब में कनाडा ने भी अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी शुल्क लगाया है। ओटावा ने करीब C$28 अरब के अमेरिकी सामान पर 50 प्रतिशत तक का शुल्क लगाया है। इसमें स्टील से लेकर फर्नीचर और कॉटन की टी-शर्ट तक कई उत्पाद शामिल हैं।

इस तरह दुनिया की दो पड़ोसी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक विवाद अब व्यापक आर्थिक संबंधों को प्रभावित करने लगा है।

यूरोप दौरे पर जाएंगे मार्क कार्नी

मार्क कार्नी इस सप्ताह यूरोप की यात्रा पर जाएंगे। उनके दौरे में ब्रिटेन और फ्रांस शामिल हैं। फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में वह यूरोपीय संसद को संबोधित करेंगे।

यूरोप यात्रा के दौरान कार्नी यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के स्टेट ऑफ द यूरोपियन यूनियन संबोधन में भी शामिल होंगे। इसके अलावा कनाडाई प्रधानमंत्री ब्रिटेन के लिवरपूल जाएंगे, जहां उनकी मुलाकात ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम से होनी है।

यह दौरा कनाडा के लिए ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब ओटावा अमेरिका पर अपनी आर्थिक निर्भरता को कम करने और दूसरे साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने की रणनीति पर जोर दे रहा है।

‘अधिक स्वतंत्र और लचीली अर्थव्यवस्था’ पर जोर

पद संभालने के बाद से कार्नी ने कनाडा की अर्थव्यवस्था को अधिक स्वतंत्र और मजबूत बनाने की रणनीति को प्राथमिकता दी है। उनका जोर ऐसी “अधिक स्वतंत्र, अधिक लचीली अर्थव्यवस्था” तैयार करने पर है, जो बाहरी दबावों और बदलती वैश्विक परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम हो।

अमेरिकी प्रशासन की कनाडा के प्रति बढ़ती सख्त नीतियों ने इस रणनीति को और महत्वपूर्ण बना दिया है। कार्नी सरकार अब यूरोप समेत अन्य सहयोगी देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

ट्रंप की ‘51वां राज्य’ वाली टिप्पणी से भी बढ़ा तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी कनाडा को अमेरिका का “51वां राज्य” बनाने की बात कह चुके हैं। इससे दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक संबंधों में तनाव बढ़ा है।

हाल ही में ट्रंप ने अमेरिकी सरकार को लेक ओंटारियो का नाम बदलकर “लेक अमेरिका” करने का आदेश भी दिया। कनाडा के संदर्भ में अमेरिका की ऐसी नीतियों और टिप्पणियों के बीच कार्नी सरकार अपनी स्वतंत्र आर्थिक और विदेश नीति को मजबूत करने पर जोर दे रही है।

वैश्विक स्तर पर ‘मिडिल पावर्स’ को साथ आने की अपील

मार्क कार्नी ने इससे पहले जनवरी में स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान भी मध्यम शक्तियों वाले देशों से एक साथ आने की अपील की थी।

उनकी मौजूदा यूरोपीय पहल को इसी व्यापक रणनीति के हिस्से के तौर पर देखा जा सकता है, जिसमें कनाडा वैश्विक स्तर पर अपने पारंपरिक साझेदारों के साथ संबंधों को मजबूत करना चाहता है।

यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित “अनोखा गठबंधन” कनाडा को व्यापार, अर्थव्यवस्था और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर दे सकता है। हालांकि, कार्नी ने साफ किया है कि इसका मतलब यूरोपीय संघ की पूर्ण सदस्यता नहीं है।

अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध के बढ़ते दबाव के बीच कनाडा अब अपने आर्थिक विकल्पों को व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कार्नी का यूरोप दौरा इस रणनीति को आगे बढ़ाने और कनाडा-यूरोप संबंधों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

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