अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के सीईओ पद पर एयर मार्शल सेवानिवृत्त जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति को लेकर उठ रहे सवालों के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंददेव गिरि ने कहा कि सीईओ के चयन में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है और पूरी प्रक्रिया तय नियमों के अनुसार पारदर्शी तरीके से पूरी की गई। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ने सीईओ पद के लिए बाकायदा साक्षात्कार दिया था।
दरअसल, पिछले दिनों जितेंद्र मिश्र के साक्षात्कार में शामिल होने को लेकर अलग-अलग तरह की बातें सामने आई थीं। सोशल मीडिया और इंटरनेट मीडिया पर ऐसी खबरें प्रसारित हुईं कि उन्होंने सीईओ पद के लिए इंटरव्यू नहीं दिया था। इसके बाद राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से आधिकारिक तौर पर स्थिति साफ की गई। ट्रस्ट के मुताबिक जितेंद्र मिश्र ने 11 अगस्त को अयोध्या में आयोजित साक्षात्कार में हिस्सा लिया था। उनका इंटरव्यू 11 अगस्त की पहली पाली में हुआ था।
स्वामी गोविंददेव गिरि ने चयन प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा कि सीईओ के चयन के लिए बाकायदा खोज समिति बनाई गई थी। इस समिति ने देशभर से आए आवेदनों की जांच की। ट्रस्ट के अनुसार, सीईओ पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। इन आवेदनों की स्क्रीनिंग और विशेषज्ञों की ओर से मैनुअल मूल्यांकन के बाद उम्मीदवारों को अलग-अलग चरणों में शॉर्टलिस्ट किया गया।
ट्रस्ट के मुताबिक चयन प्रक्रिया केवल आवेदन प्राप्त करने तक सीमित नहीं थी। आवेदनों की प्रारंभिक जांच के लिए एआई स्क्रीनिंग का भी इस्तेमाल किया गया और इसके साथ विशेषज्ञों ने मैनुअल मूल्यांकन किया। दिल्ली-एनसीआर, पुणे और संभलपुर में स्क्रीनिंग की प्रक्रिया हुई। इसके बाद बहुस्तरीय चयन प्रक्रिया के जरिए 16 उम्मीदवारों को अंतिम सूची में शामिल किया गया। इन्हीं उम्मीदवारों को अयोध्या बुलाकर साक्षात्कार लिया गया।
सीईओ पद के लिए चयनित उम्मीदवारों के साक्षात्कार 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में हुए थे। जितेंद्र मिश्र भी इसी प्रक्रिया के तहत इंटरव्यू देने पहुंचे थे। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि उनके इंटरव्यू में शामिल नहीं होने की खबर तथ्यात्मक रूप से गलत थी। यही वजह है कि बाद में ट्रस्ट के महासचिव की ओर से बयान जारी कर पूरे मामले में स्थिति साफ की गई।
चयन समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें एक सितंबर को ट्रस्ट को सौंप दी थीं। इसके बाद दो सितंबर को शीर्ष तीन उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक किए गए। इन नामों में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के अलावा संजय प्रतापसिंह विश्वास राव और श्रुति भारद्वाज शामिल थे। इसके बाद जितेंद्र मिश्र को राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ पद की जिम्मेदारी दिए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
स्वामी गोविंददेव गिरि ने कहा कि पूरी चयन प्रक्रिया संस्थागत शासन और पारदर्शिता के मानकों के अनुरूप अपनाई गई। उनका कहना है कि चयन के प्रत्येक चरण का दस्तावेजीकरण किया गया है। यानी आवेदन से लेकर स्क्रीनिंग, शॉर्टलिस्टिंग, इंटरव्यू और अंतिम सिफारिश तक की प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखा गया है। ट्रस्ट ने यह भी कहा है कि प्रक्रिया से जुड़े तथ्य जरूरत पड़ने पर किसी भी जांच के लिए उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल रहे हैं और उनके पास लंबे प्रशासनिक एवं संगठनात्मक अनुभव को महत्वपूर्ण माना गया है। राम मंदिर के विस्तार और आने वाले समय में बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए ट्रस्ट को ऐसे अधिकारी की जरूरत थी, जो बड़े स्तर पर व्यवस्थाओं का समन्वय कर सके। उनकी नियुक्ति को इसी व्यापक प्रशासनिक जरूरत से जोड़कर देखा जा रहा है।
राम मंदिर के सीईओ की जिम्मेदारी सामान्य प्रशासनिक पद से अलग मानी जा रही है। अयोध्या में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और आने वाले वर्षों में मंदिर परिसर तथा आसपास के क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, परियोजनाओं की निगरानी और भविष्य की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना सीईओ के सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी।
इसी वजह से सीईओ पद के चयन को लेकर ट्रस्ट की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया। हजारों आवेदनों में से उम्मीदवारों की छंटनी, विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन और अंतिम चरण में इंटरव्यू के बाद नामों की सिफारिश की गई। ट्रस्ट का कहना है कि किसी एक व्यक्ति को सीधे चुनने के बजाय पूरी प्रक्रिया को संस्थागत रूप दिया गया था।
जितेंद्र मिश्र के इंटरव्यू को लेकर सामने आई गलत जानकारी के बाद ट्रस्ट की ओर से स्पष्टीकरण देना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राम मंदिर से जुड़े किसी भी बड़े प्रशासनिक निर्णय पर देशभर की नजर रहती है। सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी तेजी से फैल सकती है। ऐसे में ट्रस्ट ने आधिकारिक जानकारी देकर यह बताने की कोशिश की कि सीईओ चयन के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था।
ट्रस्ट की ओर से जारी जानकारी में यह भी स्पष्ट किया गया कि खोज समिति ने देशभर से प्राप्त आवेदनों का मूल्यांकन करने के बाद अंतिम उम्मीदवारों का चयन किया। इससे यह बात सामने आती है कि सीईओ पद के लिए चयन प्रक्रिया व्यापक स्तर पर की गई थी। 5,585 आवेदनों से 16 उम्मीदवारों तक पहुंचने और फिर अंतिम सिफारिश तैयार करने में कई चरण शामिल रहे।
अब स्वामी गोविंददेव गिरि के बयान के बाद सीईओ नियुक्ति को लेकर उठे सवालों पर काफी हद तक स्थिति स्पष्ट हो गई है। ट्रस्ट ने साफ कहा है कि जितेंद्र मिश्र ने इंटरव्यू दिया था और उनकी नियुक्ति किसी अनियमित या गुप्त प्रक्रिया के जरिए नहीं हुई। चयन समिति ने अपनी रिपोर्ट दी और उसके आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की गई।
राम मंदिर ट्रस्ट के लिए आने वाला समय प्रशासनिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, परिसर से जुड़े विकास कार्य, सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, सुविधाओं का विस्तार और विभिन्न परियोजनाओं के संचालन के लिए मजबूत प्रशासनिक तंत्र की जरूरत होगी। ऐसे में सीईओ की भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल ट्रस्ट की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के बाद मुख्य संदेश यही है कि एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ने सीईओ पद के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत इंटरव्यू दिया था और ट्रस्ट के अनुसार चयन में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई। स्वामी गोविंददेव गिरि ने प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए कहा है कि चयन के सभी चरणों का रिकॉर्ड उपलब्ध है और जरूरत पड़ने पर इसकी जांच भी की जा सकती है।











