VPVV Techno Construction केरल समन्वयक गिरफ्तार, ₹700 करोड़ की कथित निवेश धोखाधड़ी की जांच

केरलम VPVV Techno Construction पर ₹700 करोड़ से अधिक की कथित निवेश धोखाधड़ी का आरोप है। पुलिस ने केरल समन्वयक पी. प्रदीप कुमार को गिरफ्तार किया है।

VPVV Techno Construction पर ₹700 करोड़ से अधिक की कथित निवेश धोखाधड़ी के मामले में केरल समन्वयक पी. प्रदीप कुमार गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, कंपनी ने US Defence Department के कथित अनुबंध दिखाकर निवेश जुटाया और परियोजनाएं शुरू नहीं कीं।

तिरुवनंतपुरम: पुलिस ने VPVV Techno Construction के केरल समन्वयक पी. प्रदीप कुमार को गिरफ्तार किया है। कंपनी पर निवेश योजना के जरिए देशभर के लोगों से ₹700 करोड़ से अधिक की कथित धोखाधड़ी करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, कंपनी ने निवेशकों को भरोसा दिलाने के लिए अमेरिका के रक्षा विभाग (US Department of Defence) से अनुबंध मिलने का दावा किया था।

कौन है गिरफ्तार आरोपी?

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए व्यक्ति की पहचान पारिपल्ली, कोल्लम जिले के निवासी पी. प्रदीप कुमार के रूप में हुई है। उसे वर्कला में दर्ज एक मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। यह मामला ए. एम. मुनीर की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था, जिन्होंने कथित तौर पर इस निवेश योजना में ₹70 लाख गंवाए हैं।

वर्कला पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने बताया कि मुनीर ने रविवार शाम चेरथला के एक होटल में कुमार को देखा। उन्होंने कुमार को रोकने के बाद पुलिस को इसकी सूचना दी।

चेरथला पुलिस ने हिरासत में लिया

सूचना मिलने के बाद चेरथला पुलिस मौके पर पहुंची और कुमार को हिरासत में लिया। बाद में उसे वर्कला पुलिस स्टेशन की टीम को सौंप दिया गया। पुलिस ने सोमवार को आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

पुलिस अब मामले की आगे की जांच के लिए कुमार की हिरासत मांगने के लिए अदालत का रुख करने की तैयारी में है।

US Defence Department के अनुबंध का दावा

पुलिस के मुताबिक, VPVV Techno Construction ने निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए कथित तौर पर ऐसे दस्तावेज दिखाए, जिन्हें अमेरिका के रक्षा विभाग से जुड़े अनुबंधों से संबंधित बताया गया था।

आरोप है कि इन दस्तावेजों के आधार पर लोगों को विश्वास दिलाया गया कि कंपनी को अमेरिका के रक्षा विभाग से कई अनुबंध हासिल हुए हैं। इसके बाद निवेशकों से कहा गया कि कंपनी देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग परियोजनाएं शुरू करेगी। पुलिस का कहना है कि इन्हीं दावों के आधार पर देशभर से लोगों से निवेश जुटाया गया।

कई राज्यों में जमीन खरीदने का दावा

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, कंपनी ने कथित तौर पर कई राज्यों में जमीन खरीदी थी। हालांकि, इन जमीनों पर उन परियोजनाओं को लागू नहीं किया गया, जिनका निवेशकों के सामने दावा किया गया था।

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि निवेश के रूप में जुटाई गई रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया और कंपनी की कथित गतिविधियों में कौन-कौन लोग शामिल थे।

कंपनी के नाम का मतलब क्या है?

पुलिस के अनुसार, VPVV Techno Construction का नाम कंपनी के चेयरमैन, निदेशकों और समन्वयकों के नाम के शुरुआती अक्षरों से बनाया गया है।

मामले में प्रदीप कुमार के अलावा कंपनी के चेयरमैन वेंकिट्टा वेंकिट, कंपनी के निदेशक और समन्वयक डॉ. साब, येलाथी पद्मराजा गोपाल और जी. एस. बीजू भी आरोपी बताए गए हैं।

दिल्ली में भी दर्ज है इसी तरह का मामला

अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने हाल ही में VPVV के चेयरमैन वेंकिट और दो अन्य लोगों को दिल्ली में दर्ज इसी तरह के एक मामले में गिरफ्तार किया था।

इससे जांच का दायरा केरल से बाहर भी बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित निवेश योजना कितने लोगों तक पहुंची और अलग-अलग राज्यों में इससे जुड़े कितने मामले दर्ज हैं।

केरल में कई अन्य मामले भी दर्ज

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि VPVV के खिलाफ केरल में भी कई अन्य मामले सामने आए हैं। इनमें से कुछ मामलों में आरोपियों को अदालतों से जमानत मिल चुकी है।

पुलिस अब प्रदीप कुमार से पूछताछ के जरिए मामले से जुड़े अन्य आरोपियों, निवेश जुटाने के तरीके और कथित दस्तावेजों की वास्तविकता के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश करेगी।

जांच में सामने आएंगे निवेश योजना के पहलू

₹700 करोड़ से अधिक की कथित धोखाधड़ी के आरोपों के बीच पुलिस की जांच का मुख्य फोकस निवेशकों से जुटाई गई रकम, कंपनी द्वारा किए गए दावों, कथित अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुबंधों से जुड़े दस्तावेजों और विभिन्न राज्यों में खरीदी गई जमीन पर है।

फिलहाल पुलिस ने आरोपों की जांच शुरू कर दी है और गिरफ्तार आरोपी से आगे की पूछताछ के लिए अदालत से हिरासत की मांग करने की तैयारी कर रही है। मामले में लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और अदालत में इनकी पुष्टि होना बाकी है।

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