उत्तराखंड के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में करीब 600 PG रेजिडेंट डॉक्टर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। कार्यबहिष्कार से OPD सेवाएं और रूटीन ऑपरेशन प्रभावित हुए हैं, जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है।
उत्तराखंड: राज्य के देहरादून, हल्द्वानी, अल्मोड़ा और श्रीनगर स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेजों में करीब 600 PG रेजिडेंट डॉक्टर स्टाइपेंड बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं। डॉक्टरों के कार्यबहिष्कार का असर अस्पतालों की OPD और रूटीन ऑपरेशन पर पड़ रहा है। इलाज के लिए पहुंच रहे मरीजों को इस वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
1 लाख रुपये स्टाइपेंड की मांग को लेकर हड़ताल
उत्तराखंड के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में PG रेजिडेंट डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। देहरादून, हल्द्वानी, अल्मोड़ा और श्रीनगर के मेडिकल कॉलेजों में करीब 600 PG डॉक्टर स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर कार्यबहिष्कार कर रहे हैं।

PG रेजिडेंट डॉक्टरों की मुख्य मांग स्टाइपेंड को बढ़ाकर 1 लाख रुपये करना है। डॉक्टरों के कार्यबहिष्कार के कारण अस्पतालों में नियमित चिकित्सा सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है।
OPD और रूटीन ऑपरेशन पर पड़ा असर
डॉक्टरों की हड़ताल का सबसे सीधा असर अस्पतालों की OPD सेवाओं पर देखने को मिल रहा है। इसके अलावा रूटीन ऑपरेशन भी प्रभावित हुए हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज इलाज और जांच के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में PG डॉक्टरों के कार्यबहिष्कार के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
देहरादून और हल्द्वानी के प्रमुख अस्पतालों में भी हड़ताल का असर बताया जा रहा है। मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि नियमित चिकित्सा सेवाओं को संचालित करने के लिए उपलब्ध स्टाफ पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है।
चार मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों का प्रदर्शन
यह हड़ताल राज्य के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चल रही है। इनमें देहरादून, हल्द्वानी, अल्मोड़ा और श्रीनगर शामिल हैं। PG रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि स्टाइपेंड में बढ़ोतरी उनकी प्रमुख मांग है और इसी को लेकर उन्होंने कार्यबहिष्कार का फैसला लिया है।
हड़ताल के चलते अस्पताल प्रशासन के सामने मरीजों की नियमित स्वास्थ्य सेवाएं बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ गई है। OPD और रूटीन प्रक्रियाओं पर असर के बीच मरीजों और उनके परिजनों को जल्द समाधान की उम्मीद है।
आगे डॉक्टरों और सरकार के बीच बातचीत में क्या निर्णय होता है, इस पर हड़ताल खत्म होने और अस्पतालों में सामान्य सेवाएं बहाल होने की स्थिति निर्भर करेगी।










