CM ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी, दो गिरफ्तार; 5.13 लाख ई-मेल आईडी बरामद

गाँधी नगर मुख़्यमंत्री ऑफिस और सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी मामले में दो आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस को 5.13 लाख ई-मेल आईडी और पासवर्ड की सूची मिली है।

गांधीनगर सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी वाले ई-मेल मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में 5,13,847 ई-मेल आईडी और पासवर्ड की सूची मिली है। पुलिस बांग्लादेश से कथित कनेक्शन और क्रिप्टो भुगतान की जांच कर रही है।

गांधीनगर: मुख्यमंत्री कार्यालय और सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी वाले ई-मेल की जांच में साइबर पुलिस को एक बड़े ई-मेल नेटवर्क का पता चला है। मामले में बिहार के भागलपुर से रोशन कुमार और झारखंड के देवघर से गुलशन कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपियों के पास से 5,13,847 यूनिक ई-मेल आईडी और उनके पासवर्ड की सूची बरामद हुई है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में इन ई-मेल खातों का इस्तेमाल धमकी भरे संदेश भेजने के लिए किए जाने की बात सामने आई है। जांचकर्ताओं को यह भी पता चला है कि इस नेटवर्क के तार बांग्लादेश तक जुड़े हो सकते हैं और कथित तौर पर आरोपियों को वहां मौजूद सह-आरोपियों से आर्थिक मदद मिलती थी।

10 सितंबर को मिला था सचिवालय को धमकी भरा ई-मेल

गांधीनगर सचिवालय को 10 सितंबर को बम से उड़ाने की धमकी वाला ई-मेल मिलने के बाद साइबर टीम ने मामले की तकनीकी जांच शुरू की। जांचकर्ताओं ने ई-मेल के तकनीकी विवरण और उसके इस्तेमाल से जुड़े डिजिटल संकेतों का विश्लेषण किया।

तकनीकी जांच के दौरान धमकी वाला ई-मेल इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की लोकेशन बिहार के भागलपुर में सामने आई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रोशन कुमार को गिरफ्तार किया।

रोशन से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद जांच की कड़ी झारखंड के देवघर तक पहुंची। यहां से पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे गुलशन कुमार सिंह को गिरफ्तार किया।

5,13,847 ई-मेल आईडी और पासवर्ड बरामद

साइबर सेल ऑफ एक्सीलेंस के एसपी विवेक भेड़ा के अनुसार, जांच में गुलशन कुमार सिंह द्वारा पांच लाख से अधिक यूनिक Gmail ई-मेल आईडी और पासवर्ड तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस के अनुसार, गुलशन का काम केवल ई-मेल आईडी और पासवर्ड तैयार करने तक सीमित नहीं था। वह कथित तौर पर ऑथेंटिकेटर और सीड कोड भी तैयार करता था। इसके बाद इन डिजिटल विवरणों को आगे बेचे जाने की बात सामने आई है।

गिरफ्तार आरोपियों के पास से 5,13,847 यूनिक ई-मेल आईडी और पासवर्ड की सूची बरामद होने की जानकारी पुलिस ने दी है। जांच एजेंसियां अब इन खातों के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।

धमकी वाले ई-मेल भेजने में रोशन की भूमिका

पुलिस जांच में 10 सितंबर को सचिवालय को भेजे गए धमकी भरे ई-मेल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण डिजिटल सुराग भी मिला है। जांचकर्ताओं के अनुसार, जिस ई-मेल आईडी से धमकी भेजी गई थी, उसका विवरण गुलशन के पास से बरामद सूची में मौजूद था।

हालांकि, पुलिस के मुताबिक, उस ई-मेल आईडी का इस्तेमाल करके धमकी वाला संदेश बिहार से रोशन कुमार ने भेजा था।

जांच के प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार, दोनों आरोपियों की कथित भूमिकाएं अलग-अलग थीं। गुलशन ई-मेल आईडी और उनसे जुड़े पासवर्ड तैयार करके उन्हें आगे उपलब्ध कराता था, जबकि रोशन इन खातों का इस्तेमाल धमकी भरे ई-मेल भेजने के लिए करता था।

ई-मेल आईडी बनाने और बेचने का कथित नेटवर्क

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी संख्या में ई-मेल आईडी क्यों तैयार की गईं और उन्हें किन लोगों या नेटवर्क को बेचा गया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इन खातों का इस्तेमाल केवल सचिवालय को धमकी भेजने के लिए हुआ या देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के ई-मेल भेजे गए।

इतनी बड़ी संख्या में ई-मेल खातों की सूची मिलने के बाद जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह केवल एक घटना तक सीमित गतिविधि नहीं हो सकती। हालांकि, इस नेटवर्क की वास्तविक पहुंच और इसके इस्तेमाल के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

बांग्लादेश से कथित कनेक्शन की जांच

मामले की जांच के दौरान गुलशन कुमार सिंह के संपर्क बांग्लादेश में मौजूद कुछ राष्ट्र-विरोधी तत्वों से होने की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है।

पुलिस के प्रारंभिक निष्कर्ष के अनुसार, गुलशन कथित तौर पर ई-मेल आईडी और पासवर्ड तैयार करके उन्हें बांग्लादेश भेजता था। वहां इन डिजिटल खातों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाता था, इसकी जांच अभी जारी है।

जांच एजेंसियां बांग्लादेश में मौजूद कथित सह-आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं। साथ ही, यह भी जांचा जा रहा है कि गुलशन और इन लोगों के बीच संपर्क किस माध्यम से स्थापित हुआ था।

USDT में भुगतान मिलने की जानकारी

जांच में गुलशन को कथित तौर पर USDT के जरिए क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान मिलने की जानकारी भी सामने आई है।

पुलिस इस डिजिटल लेनदेन के स्रोत और लाभार्थियों का पता लगाने की कोशिश कर रही है। जांच का एक प्रमुख हिस्सा यह पता लगाना भी है कि ई-मेल आईडी की बिक्री से प्राप्त रकम और कथित क्रिप्टो भुगतान के बीच क्या संबंध है।

इसके अलावा, जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि डिजिटल भुगतान का नेटवर्क किन अन्य लोगों तक फैला हुआ है।

धमकी वाले ई-मेल की जांच से खुला नेटवर्क

सचिवालय को भेजे गए एक धमकी भरे ई-मेल की जांच अब एक बड़े डिजिटल नेटवर्क की पड़ताल में बदल गई है। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के जरिए पहले ई-मेल भेजने वाले व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश की और फिर उसके कथित सहयोगी तक जांच को आगे बढ़ाया।

इस मामले में बरामद बड़ी संख्या में ई-मेल आईडी, पासवर्ड, ऑथेंटिकेटर और सीड कोड जांच के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य माने जा रहे हैं।

कई पहलुओं पर जांच जारी

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि ई-मेल आईडी तैयार करने की प्रक्रिया कैसे संचालित होती थी, इन्हें किन लोगों को बेचा जाता था और धमकी वाले ई-मेल भेजने के लिए इनका इस्तेमाल किस स्तर पर किया गया।

बांग्लादेश से कथित संपर्क, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए भुगतान और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

फिलहाल पुलिस की जांच प्रारंभिक चरण में है। बांग्लादेश से जुड़े कथित नेटवर्क और वहां मौजूद लोगों की सटीक भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

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