पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने टीएमसी पर जनादेश खोने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी को दो-तिहाई बहुमत का जनादेश मिला है। मदरसों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी की लड़ाई धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि अवैध गतिविधियों वाले संस्थानों से है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बयानबाजी के बीच भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी जनता का विश्वास और जनादेश खो चुकी है। भट्टाचार्य ने कहा कि राज्य की जनता ने भाजपा को दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाने का जनादेश दिया है। भाजपा नेता ने धार्मिक संस्थानों को लेकर पार्टी का रुख भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भाजपा की लड़ाई किसी धर्म, समुदाय या मदरसों के खिलाफ नहीं है। उनका कहना है कि पार्टी उन संस्थानों के खिलाफ है, जो मदरसों की आड़ में कथित तौर पर अवैध गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।
‘टीएमसी ने जनता का विश्वास खो दिया’
समिक भट्टाचार्य ने पत्रकारों से बातचीत में तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी अब जनता का भरोसा खो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में स्पष्ट जनादेश दिया है और पार्टी को दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाने का समर्थन मिला है।
भट्टाचार्य ने टीएमसी नेताओं की सार्वजनिक प्रतिक्रिया को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि स्थिति ऐसी हो गई है कि जब भी टीएमसी नेता लोगों के बीच जाते हैं, तो कुछ लोग उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए अंडे तक फेंकते हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव के बीच आया है।
मदरसों को लेकर भाजपा ने स्पष्ट किया अपना रुख
मदरसों और धार्मिक संस्थानों से जुड़े विवाद पर समिक भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा का विरोध किसी धर्म या मदरसा व्यवस्था के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी की आपत्ति उन संस्थानों को लेकर है, जो कथित तौर पर मदरसों की आड़ में अवैध गतिविधियां चला रहे हैं।
यह मुद्दा पश्चिम बंगाल में उस समय और चर्चा में आया, जब राज्य सरकार की ओर से कथित तौर पर अवैध रूप से संचालित 252 मदरसों को बंद करने का नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई।
इस घटनाक्रम ने राज्य में धार्मिक संस्थानों के नियमन, सरकारी अनुमति और उनके संचालन से जुड़े सवालों पर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।
सरकार की अनुमति के बिना संचालन पर सवाल
सोमवार को पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि या गैर-कानूनी संचालन को अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों को सरकार से आवश्यक अनुमति नहीं मिली है, वे बिना अनुमति अपना कामकाज जारी नहीं रख सकते।
घोष के मुताबिक, यदि ऐसे संस्थान काम करना चाहते हैं तो उन्हें सरकार से आवश्यक अनुमति हासिल करनी होगी। उन्होंने मदरसों के विभिन्न पहलुओं को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं का भी उल्लेख किया।
मंत्री ने कहा कि मदरसों से संबंधित मुद्दा नया नहीं है। उनके अनुसार, पिछले 20 वर्षों से इस विषय को लेकर सवाल और चिंताएं उठती रही हैं। उन्होंने कहा कि कई नेताओं ने अलग-अलग समय पर इन चिंताओं को सामने रखा, लेकिन अब सरकार इस मामले का समाधान निकालने की दिशा में काम करेगी।
252 मदरसों को नोटिस का मुद्दा
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से राज्यभर में 252 कथित अवैध मदरसों को बंद करने का नोटिस जारी किए जाने की खबर के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
सरकार की ओर से जोर इस बात पर है कि केवल उन संस्थानों को संचालन की अनुमति होनी चाहिए, जिनके पास संबंधित सरकारी मंजूरी मौजूद है। दूसरी ओर, भाजपा इस मुद्दे को राज्य में कानून और नियमन के सवाल से जोड़कर उठा रही है।
हालांकि, मदरसों को लेकर भाजपा के रुख को समिक भट्टाचार्य ने धर्म के बजाय कथित अवैध गतिविधियों से जोड़ा है। उनका कहना है कि वैध रूप से संचालित धार्मिक या शैक्षणिक संस्थानों को लेकर पार्टी का विरोध नहीं है।
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक टकराव जारी
मदरसों से जुड़े मुद्दे के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों के बीच विकास और प्रशासन को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। भाजपा लगातार राज्य सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कामकाज पर सवाल उठाती रही है। वहीं, राज्य में सरकार की ओर से विभिन्न विकास परियोजनाओं और निवेश प्रस्तावों को लेकर प्रगति का दावा किया गया है। इसी क्रम में बीते शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कई बड़े प्रोजेक्ट्स का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने पिछले चार महीनों के दौरान राज्य में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ने की बात कही। इनमें 15,000 करोड़ रुपये की एक बड़ी परियोजना, 600 करोड़ रुपये की अमूल सुविधा और रोबोटिक फायर-फाइटिंग सिस्टम जैसे प्रोजेक्ट शामिल बताए गए।
15,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट का भी जिक्र
सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में निवेश से जुड़ी गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले चार महीनों में कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर प्रगति हुई है। उन्होंने गंगोनी में एक परियोजना के लिए 700 करोड़ रुपये के बड़े निवेश प्रतिबद्धता का उदाहरण दिया। इसके अलावा उन्होंने 15,000 करोड़ रुपये की एक बड़ी परियोजना के शुरू होने की जानकारी भी दी। अधिकारी ने 600 करोड़ रुपये की अमूल सुविधा और रोबोटिक फायर-फाइटिंग सिस्टम का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, पिछले चार महीनों में राज्य में कई बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़े महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
विकास बनाम राजनीतिक आरोपों के बीच मुकाबला
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक तरफ जहां भाजपा टीएमसी पर जनता का समर्थन खोने का आरोप लगा रही है, वहीं सरकार विकास परियोजनाओं और निवेश के आंकड़ों को सामने रख रही है। ऐसे में राज्य की राजनीति में चुनावी जनादेश, प्रशासन और विकास के मुद्दे एक साथ चर्चा में हैं।
समिक भट्टाचार्य का बयान विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने टीएमसी के जनाधार पर सवाल उठाने के साथ-साथ मदरसों के मुद्दे पर भाजपा का रुख भी स्पष्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने धार्मिक पहचान के बजाय कथित अवैध गतिविधियों को कार्रवाई का आधार बताया।
दूसरी ओर, सरकार की ओर से कहा गया है कि बिना सरकारी अनुमति संचालित होने वाले संस्थानों को काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सरकार ने इस मामले को लंबे समय से चली आ रही चिंता बताते हुए समाधान निकालने का संकेत दिया है।
आने वाले समय में मदरसों के नियमन, सरकारी अनुमति और कथित अवैध संचालन का मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में और महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके साथ ही बड़े निवेश और विकास परियोजनाओं को लेकर सरकार के दावों के बीच विपक्ष की राजनीतिक रणनीति भी राज्य के आगामी राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकती है।











