Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने AI को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से आर्थिक समस्याएं हल नहीं होंगी। उन्होंने कंपनियों द्वारा AI के नाम पर हो रही छंटनी और बढ़ते आर्थिक दबाव पर भी सवाल उठाए।
Tech: Zoho Founder Sridhar Vembu ने AI को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि दुनिया की आर्थिक चुनौतियों का समाधान केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संभव नहीं है। वर्क फ्रॉम होम पॉलिसी पर अपने हालिया फैसले के बाद उन्होंने कहा कि कंपनियां बढ़ती लागत और आर्थिक दबाव को छिपाने के लिए AI को छंटनी का कारण बता रही हैं, जिससे लोगों के बीच इस तकनीक को लेकर शक बढ़ रहा है।
AI के नाम पर छंटनी बढ़ने की चिंता
Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने कहा है कि कंपनियां अब नौकरी में कटौती को AI से जोड़कर पेश कर रही हैं। उनके मुताबिक, इससे कंपनियां खुद को भविष्य की टेक्नोलॉजी अपनाने वाली दिखाती हैं, लेकिन असल में यह बढ़ते आर्थिक दबाव और लागत को संभालने का तरीका बन गया है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका जैसे टेक्नोलॉजी लीडर देश में भी लोग AI को लेकर शक्की होते जा रहे हैं। यहां तक कि कॉलेज के छात्र भी अब इस बदलाव को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं।
आर्थिक संकट का पूरा हल नहीं है AI
वेम्बु का मानना है कि दुनिया इस समय जिन आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है, उन्हें केवल AI के भरोसे हल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि टेक और AI सेक्टर में अरबों डॉलर का निवेश जरूर हो रहा है, लेकिन इससे बेरोजगारी, आर्थिक मंदी और बाजार की बुनियादी कमजोरियां खत्म नहीं हो रही हैं।
उनके अनुसार, मौजूदा निवेश केवल अर्थव्यवस्था को कुछ समय तक संभाल सकता है, लेकिन इससे लंबे समय की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं मिलेगा।
AI को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा
श्रीधर वेम्बु ने कहा कि AI को लेकर कंपनियां और बाजार जरूरत से ज्यादा उम्मीदें बना रहे हैं। उनका मानना है कि यह तकनीक कई क्षेत्रों में मददगार जरूर हो सकती है, लेकिन इसे हर आर्थिक समस्या का समाधान बताना सही नहीं होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है, इसलिए कंपनियों को केवल AI पर निर्भर रहने के बजाय वास्तविक आर्थिक चुनौतियों पर भी ध्यान देना होगा।









