स्विट्जरलैंड की कंपनी Meteomatics के Strato ड्रोन ने 34,245 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने का दावा किया है। यह ड्रोन समताप मंडल से मौसम संबंधी डेटा जुटाकर पूर्वानुमान बेहतर बनाने और एयरलाइंस व एयरोस्पेस कंपनियों की मदद करने के लिए तैयार किया गया है।
Tech: मौसम की सटीक जानकारी जुटाने के लिए स्विट्जरलैंड की वेदर टेक्नोलॉजी कंपनी Meteomatics ने एक खास मल्टीकोप्टर ड्रोन विकसित किया है। कंपनी के अनुसार, Strato ड्रोन ने 34,245 फीट यानी करीब 10,438 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरी। यह ड्रोन तापमान, नमी, हवा का दबाव और हवा की गति जैसे आंकड़े एकत्र कर सकता है। इससे मौसम पूर्वानुमान के मॉडल बेहतर बनाने और विमानन क्षेत्र को उपयोगी जानकारी देने में मदद मिल सकती है।
Strato ड्रोन ने 34,245 फीट की ऊंचाई तक भरी उड़ान
मौसम की सटीक जानकारी जुटाने के लिए अब ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। स्विट्जरलैंड की वेदर टेक्नोलॉजी कंपनी Meteomatics ने Strato नाम का एक मल्टीकोप्टर ड्रोन पेश किया है। कंपनी के मुताबिक, इस ड्रोन ने 34,245 फीट यानी करीब 10,438 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भरकर रिकॉर्ड बनाया।

इतनी ऊंचाई पर पहुंचकर मौसम संबंधी डेटा जुटाने की क्षमता इस तकनीक को खास बनाती है। अब तक ऊपरी वायुमंडल की जानकारी लेने के लिए मौसम संबंधी उपकरणों से लैस वेदर बैलून का व्यापक इस्तेमाल होता रहा है। Strato ड्रोन का उद्देश्य इस प्रक्रिया में एक ऐसा विकल्प उपलब्ध कराना है, जिसे जरूरत के मुताबिक उड़ाया जा सके और उड़ान के बाद वापस लाया जा सके।
कंपनी के CEO डॉ. मार्टिन फेंगलार के अनुसार, कुछ साल पहले समताप मंडल तक पहुंचकर मौसम का डेटा जुटाने वाले ड्रोन की कल्पना करना भी मुश्किल था। अब इस तकनीक को वास्तविक रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
तेज हवाओं और बर्फीले माहौल में काम करने की क्षमता
Strato ड्रोन को ऊंचाई पर मौजूद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। Interesting Engineering की रिपोर्ट के अनुसार, यह लगभग 80 मील प्रति घंटे यानी करीब 128 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज हवाओं का सामना कर सकता है।
इसमें डी-आइसिंग सिस्टम भी दिया गया है, जो अत्यधिक ठंड में प्रोपेलर पर बर्फ जमने की समस्या को कम करने के लिए बनाया गया है। ऊंचाई पर तापमान कम होने और मौसम तेजी से बदलने के कारण ऐसी तकनीक ड्रोन के संचालन में अहम भूमिका निभा सकती है।
इस ड्रोन की एक अन्य खासियत इसका दोबारा इस्तेमाल किया जा सकना है। पारंपरिक वेदर बैलून हवा के साथ दूर निकल जाते हैं और सामान्य तौर पर वापस नहीं लाए जाते। इसके विपरीत, Strato को उड़ान के बाद उसके लॉन्च पैड पर वापस लाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इससे जरूरत के अनुसार दोबारा डेटा जुटाने की संभावना बढ़ सकती है।
मौसम पूर्वानुमान और विमानन क्षेत्र को कैसे होगा फायदा?
Strato ड्रोन का मुख्य काम वायुमंडल की अलग-अलग ऊंचाइयों से मौसम संबंधी आंकड़े जुटाना है। उड़ान के दौरान यह तापमान, नमी, हवा का दबाव और हवा की गति जैसे डेटा एकत्र कर सकता है। कंपनी के अनुसार, इससे मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल उसके US1k और Euro1k जैसे हाई-रिजॉल्यूशन मौसम पूर्वानुमान मॉडल को बेहतर बनाने में किया जाएगा।
इस तकनीक से एयरलाइंस और एयरोस्पेस कंपनियों को भी लाभ मिलने की संभावना है। उड़ान मार्गों और रॉकेट लॉन्च की योजना बनाते समय मौसम की सटीक जानकारी महत्वपूर्ण होती है। जरूरत के समय किसी विशेष स्थान पर डेटा जुटाने की क्षमता संबंधित कंपनियों को निर्णय लेने में मदद कर सकती है।
हालांकि, इस ड्रोन की उपयोगिता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि यह अलग-अलग मौसम परिस्थितियों में कितनी विश्वसनीय जानकारी जुटाता है और इसके संचालन को कितनी आसानी से दोहराया जा सकता है। फिलहाल Strato ऊंचाई पर मौसम संबंधी डेटा जुटाने की तकनीक में एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में सामने आया है।












