Zomato से खाना मंगवाना पड़ा महंगा, प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी

Zomato ने प्लेटफॉर्म फीस 12.50 से बढ़ाकर 14.90 रुपये कर दी। बढ़ती लागत और ईंधन कीमतों के बीच यूजर्स के फूड ऑर्डर खर्च पर असर पड़ेगा।

Zomato ने प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाकर 12.50 रुपये से 14.90 रुपये प्रति ऑर्डर कर दी है, जिससे यूजर्स का खर्च बढ़ेगा। Swiggy भी लगभग समान शुल्क ले रहा है, जबकि बढ़ती ऑपरेशन लागत और ईंधन कीमतों के कारण कंपनियां यह कदम उठा रही हैं।

Zomato Platform Fee Hike: भारत में फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने अपने यूजर्स के लिए प्रति ऑर्डर प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाकर 14.90 रुपये कर दी है, जो पहले 12.50 रुपये थी। यह बदलाव हाल ही में लागू किया गया है और हर ऑर्डर पर लागू होगा। कंपनी ने यह कदम बढ़ती डिलीवरी लागत और ईंधन कीमतों के दबाव के चलते उठाया है। Swiggy जैसी अन्य कंपनियां भी लगभग समान फीस ले रही हैं, जबकि नए प्लेयर्स की एंट्री से प्रतिस्पर्धा और तेज हो रही है, जिसका असर यूजर्स के खर्च पर साफ दिख रहा है।

पहले कितना था और अब कितना देना होगा

Zomato की प्लेटफॉर्म फीस पहले प्रति ऑर्डर 12.50 रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर 14.90 रुपये कर दिया गया है। GST जोड़ने के बाद यह राशि और बढ़ जाती है, जिससे कुल बिल पर असर साफ नजर आता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि सितंबर 2025 के बाद यह दूसरी बार है जब कंपनी ने प्लेटफॉर्म फीस में इजाफा किया है। इससे संकेत मिलता है कि फूड डिलीवरी सेक्टर में कीमतों का दबाव लगातार बना हुआ है।

Swiggy और नए प्लेयर्स से बढ़ती टक्कर

Zomato की प्रतिद्वंदी कंपनी Swiggy फिलहाल प्रति ऑर्डर करीब 14.99 रुपये प्लेटफॉर्म फीस ले रही है। दोनों कंपनियां लगभग समान प्राइसिंग स्ट्रेटजी अपनाती नजर आ रही हैं, जिससे यूजर्स के पास विकल्प सीमित हो जाते हैं।

इसी बीच, रैपिडो ने बेंगलुरु में अपनी फूड डिलीवरी सर्विस शुरू की है, जिसमें दावा किया गया है कि प्लेटफॉर्म फीस नहीं ली जाएगी। यह कदम मौजूदा कंपनियों के लिए चुनौती बन सकता है और आने वाले समय में प्राइसिंग पर असर डाल सकता है।

क्यों बढ़ रही है प्लेटफॉर्म फीस

फूड डिलीवरी कंपनियों के लिए ऑपरेशन लागत लगातार बढ़ रही है, खासकर ईंधन की कीमतों में उछाल के कारण। डिलीवरी खर्च बढ़ने से कंपनियां प्लेटफॉर्म फीस के जरिए लागत को संतुलित करने की कोशिश कर रही हैं।

इसका असर सिर्फ ग्राहकों पर ही नहीं, बल्कि रेस्टोरेंट पार्टनर्स और डिलीवरी एजेंट्स पर भी पड़ता है। हालांकि, बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनियों को कीमत और सर्विस के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।

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