सेंसेक्स 100 अंक चढ़कर खुला लेकिन शुरुआती बढ़त कायम नहीं रही

800 अंकों से अधिक की गिरावट के बाद सेंसेक्स करीब 100 अंक चढ़कर खुला, लेकिन शुरुआती बढ़त कायम नहीं रही। निफ्टी 23,446.60 पर खुला और बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा।

बीते कारोबारी सत्र में सेंसेक्स में 800 अंकों से अधिक की गिरावट के बाद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार ने हल्की बढ़त के साथ शुरुआत की। बाजार खुलते ही सेंसेक्स करीब 100 अंकों की तेजी के साथ हरे निशान में कारोबार करता नजर आया। हालांकि, शुरुआती बढ़त ज्यादा देर कायम नहीं रह सकी। बाजार खुलने के कुछ ही समय बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और सेंसेक्स लाल निशान में पहुंच गया। निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के प्रदर्शन से जुड़े संकेतों पर बनी हुई है।

बुधवार को सेंसेक्स में 800 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी। इसके बाद गुरुवार के कारोबार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 100 अंक ऊपर गया और 74,865 के आसपास पहुंचा। हालांकि, इसकी ओपनिंग 74,742.54 के स्तर पर हुई थी। बढ़त के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ा और इंडेक्स में फिर कमजोरी दिखाई देने लगी।

इसी तरह, निफ्टी भी सकारात्मक रुख के साथ खुला। 50 शेयरों वाला निफ्टी करीब 23,446.60 के स्तर पर खुलने के बाद सीमित दायरे में कारोबार करता नजर आया। शुरुआती कारोबार में बाजार की दिशा स्पष्ट नहीं रही और दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहा।

सेंसेक्स 100 अंक चढ़कर खुला लेकिन शुरुआती बढ़त कायम नहीं रही

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 17 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि 13 शेयरों में गिरावट देखने को मिली। तेजी वाले शेयरों में एनटीपीसी, अडानी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, इटरनल, टाटा स्टील, टाइटन और एशियन पेंट्स प्रमुख रहे। इसके अलावा इंडिगो, मारुति सुजुकी, बजाज फिनसर्व, इंफोसिस और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में भी शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाई दी। इन शेयरों की बढ़त ने बाजार को शुरुआती सहारा दिया।

दूसरी ओर, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस और आईटीसी में दबाव देखने को मिला। कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारती एयरटेल और रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत कई अन्य प्रमुख शेयर भी कमजोरी के साथ कारोबार करते नजर आए।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति मजबूत है और चालू खाता घाटा भी नियंत्रण में है। हालांकि, यदि कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

विशेषज्ञ के मुताबिक, महंगे कच्चे तेल का असर भारत की GDP ग्रोथ के साथ-साथ कंपनियों की कमाई पर भी पड़ सकता है। खास तौर पर वे उद्योग अधिक प्रभावित हो सकते हैं, जिनकी लागत ऊर्जा कीमतों से सीधे जुड़ी है।

महंगे कच्चे तेल की स्थिति में एविएशन, पेंट्स, एडहेसिव्स, टायर और केमिकल्स जैसे ऊर्जा-संवेदनशील सेक्टरों पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इन उद्योगों की उत्पादन या परिचालन लागत में ऊर्जा और पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

इसके विपरीत, FMCG जैसे डिफेंसिव सेक्टर और फार्मास्युटिकल्स तथा हेल्थकेयर जैसे उद्योग अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। इन क्षेत्रों में उत्पादों और सेवाओं की मांग पर कीमतों में बदलाव का प्रभाव तुलनात्मक रूप से सीमित रहता है।

 

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