वेदांता में Q1 FY27 में 4.9 लाख नए रिटेल निवेशक जुड़े FII हिस्सेदारी भी बढ़ी

वेदांता के खुदरा शेयरधारकों की संख्या Q1 FY27 में करीब 4.9 लाख बढ़ी, जबकि FII हिस्सेदारी 13.93% से बढ़कर 15.77% हुई।

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी जून 2026 को समाप्त तिमाही में अनिल अग्रवाल की अगुवाई वाली वेदांता लिमिटेड के खुदरा शेयरधारकों की संख्या में करीब 4.9 लाख की वृद्धि हुई। कैपिटल मार्केट डेटा के अनुसार, ट्रैक की गई कंपनियों में यह सबसे बड़ी तिमाही वृद्धि रही। इसी अवधि में कंपनी में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की हिस्सेदारी भी बढ़ी।

### खुदरा शेयरधारकों की संख्या में 4.9 लाख की वृद्धि

Q1 FY27 में वेदांता के शेयरधारकों की संख्या में लगभग 4.9 लाख का इजाफा हुआ। इस मामले में कंपनी ने विप्रो, बजाज ऑटो, HDFC Bank और Reliance Industries जैसी बड़ी कंपनियों को पीछे छोड़ा। इन कंपनियों में भी खुदरा निवेशकों की संख्या बढ़ी, लेकिन वेदांता में दर्ज वृद्धि तुलनात्मक रूप से अधिक रही।

इसके विपरीत, कुछ प्रमुख कंपनियों में खुदरा शेयरधारकों की संख्या घटी। इनमें टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, यस बैंक, सुजलॉन एनर्जी, अडानी ग्रीन एनर्जी और BHEL शामिल हैं।

### FII हिस्सेदारी बढ़कर 15.77 प्रतिशत हुई

वेदांता में विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी 31 मार्च 2026 के 13.93% से बढ़कर 30 जून 2026 तक 15.77% हो गई। यह करीब 1.84 प्रतिशत अंक की वृद्धि है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ जब इसी अवधि में भारतीय इक्विटी बाजार में विदेशी निवेशकों का रुझान अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

### वैल्यूएशन और डिविडेंड यील्ड

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वेदांता का P/E अनुपात करीब 5.9 रहा, जबकि डिविडेंड यील्ड लगभग 13% बताई गई है। कंपनी ने जून तिमाही में परिचालन स्तर पर भी प्रदर्शन दर्ज किया। निरंतर परिचालन से उसका लाभ सालाना आधार पर 152% बढ़कर 5,294 करोड़ रुपये पहुंच गया। EBITDA करीब 98% बढ़कर 8,469 करोड़ रुपये हो गया।

कंपनी ने तिमाही के दौरान अपने शुद्ध कर्ज में भी 2,200 करोड़ रुपये से अधिक की कमी की। कर्ज में कमी के साथ कंपनी की वित्तीय स्थिति और बैलेंस शीट में बदलाव दर्ज हुआ।

CRISIL और ICRA ने वेदांता को AA+/Stable रेटिंग दी है।

### डीमर्जर के बाद कारोबार पर फोकस

वेदांता समूह ने अपने अलग-अलग कारोबार को स्वतंत्र इकाइयों के रूप में विकसित करने की रणनीति अपनाई है। डीमर्जर के बाद सूचीबद्ध हुई कंपनियों के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में पहली तिमाही के दौरान 71,000 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि बताई गई है। समूह के अनुसार, अलग-अलग कारोबार को स्वतंत्र कंपनियों के रूप में संचालित करने से प्रत्येक व्यवसाय पर अधिक स्पष्ट रणनीतिक फोकस बनाया जा सकता है और निवेशकों को अलग-अलग कारोबार की वैल्यू समझने में आसानी हो सकती है।

वेदांता समूह की प्रमुख कंपनी Hindustan Zinc ने भी जून तिमाही में प्रदर्शन किया। मजबूत चांदी की कीमतों, बेहतर परिचालन दक्षता और लागत नियंत्रण से कंपनी को फायदा मिला। Hindustan Zinc ने तिमाही के दौरान 11 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की। इससे वेदांता समूह की कैश रिटर्न और डिविडेंड-केंद्रित रणनीति को बल मिला।

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