वक्फ संशोधन विधेयक आज राज्यसभा में पेश होगा। एनडीए को बहुमत मिलने की उम्मीद है। सरकार वक्फ संपत्तियों के बेहतर उपयोग की बात कर रही है, जबकि विपक्ष विरोध की रणनीति बना रहा है।
Waqf Bill in Rajya Sabha today: लोकसभा में पारित होने के बाद वक्फ संशोधन विधेयक गुरुवार को राज्यसभा में पेश होने जा रहा है। सरकार को यहां ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा क्योंकि एनडीए गठबंधन में शामिल जेडीयू, टीडीपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी का समर्थन पहले से तय माना जा रहा है। संसदीय और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू दोपहर 1 बजे इस बिल को सदन में पेश करेंगे।
राज्यसभा में बहुमत का गणित
इस समय राज्यसभा में कुल 236 सदस्य हैं और बहुमत के लिए 119 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है। बीजेपी के पास 98 सांसद हैं, जबकि एनडीए गठबंधन को मिलाकर यह संख्या 115 तक पहुंचती है। अगर सरकार को मनोनीत 6 सांसदों का समर्थन भी मिलता है, तो यह आंकड़ा 121 तक चला जाएगा, जो बहुमत के लिए जरूरी 119 से अधिक है।
वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के पास 85 सांसद हैं, जिसमें कांग्रेस के 27 और अन्य सहयोगी दलों के 58 सदस्य शामिल हैं। इसके अलावा, वाईएसआर कांग्रेस के 9, बीजेडी के 7 और एआईएडीएमके के 4 सांसद भी राज्यसभा में मौजूद हैं, जो किसी भी पक्ष के लिए निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
जेपीसी रिपोर्ट के बाद संशोधित विधेयक पेश
विधेयक को पहली बार 8 अगस्त 2024 को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन विपक्ष के विरोध के चलते इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा गया था। जेपीसी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल के नेतृत्व में समिति ने इस पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की और संशोधित विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी के बाद दोबारा सदन में लाया गया।
विधेयक के फायदे, सरकार की दलीलें
सरकार का कहना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों को हल करने और उनके बेहतर उपयोग की अनुमति देगा। इसके अलावा, इसका लाभ मुस्लिम समाज की महिलाओं को भी मिलेगा, क्योंकि संपत्तियों के इस्तेमाल में पारदर्शिता आएगी। सरकार इस विधेयक को मुस्लिम समाज के हित में बताते हुए इसे पारित कराने की पूरी तैयारी कर चुकी है।
विपक्ष का विरोध और संभावित रणनीति
हालांकि सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत के पर्याप्त आंकड़े हैं, लेकिन विपक्ष इस बिल को लेकर हमलावर रुख अपना सकता है। कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के अन्य दलों की ओर से वक्फ संपत्तियों पर सरकारी हस्तक्षेप का आरोप लगाया जा सकता है। इसके अलावा, विपक्षी दल सरकार पर मुस्लिम समुदाय को लेकर राजनीति करने का भी आरोप लगा सकते हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्यसभा में इस विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार किस तरह की रणनीति अपनाती है।