एस जयशंकर ने बांग्लादेश के मोहम्मद युनूस के दावों को नकारते हुए कहा कि भारत की बंगाल की खाड़ी में सबसे लंबी तटरेखा है, और पूर्वोत्तर क्षेत्र बिम्सटेक कनेक्टिविटी हब है।
S-Jaishankar: बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद युनूस ने चीन यात्रा के दौरान भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर विवादास्पद बयान दिया था, जिसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उन्हें करारा जवाब दिया। 20वें बिम्सटेक मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भाग लेते हुए एस जयशंकर ने बांग्लादेश के दावों को नकारते हुए कहा कि भारत की बंगाल की खाड़ी में सबसे लंबी तटरेखा है, जो लगभग 6,500 किलोमीटर लंबी है। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि भारत न केवल पांच बिम्सटेक देशों के साथ सीमा साझा करता है, बल्कि इन देशों को जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है।
भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र: बिम्सटेक के लिए कनेक्टिविटी हब
जयशंकर ने बांग्लादेश के दावों को नकारते हुए कहा कि भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र बिम्सटेक के लिए कनेक्टिविटी हब के रूप में उभर रहा है। उन्होंने क्षेत्र में सड़कों, रेलवे, जलमार्गों, ग्रिडों और पाइपलाइनों के एक विशाल नेटवर्क का उल्लेख किया। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि भारत, भारतीय उपमहाद्वीप और आसियान देशों के बीच इंटरफेस प्रदान करता है, जो कि इन देशों के बीच व्यापार और सहयोग को प्रोत्साहित करता है।
बांग्लादेश को भूगोल का पाठ
एस जयशंकर ने बिना नाम लिए बांग्लादेश के प्रमुख मोहम्मद युनूस पर हमला करते हुए कहा कि बांग्लादेश का दावा गलत था, और उन्हें भूगोल के बारे में पुनः अध्ययन करने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र समुद्र से चारों ओर घिरा नहीं है, और यहां तक कि भारत के पास बंगाल की खाड़ी तक व्यापक पहुंच है।
युनूस का विवादित बयान
इससे पहले, मोहम्मद युनूस ने चीन यात्रा के दौरान बयान दिया था कि भारत के पूर्वोत्तर राज्य लैंड लॉक्ड हैं और इनका समुद्र तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। युनूस ने यह भी कहा था कि बांग्लादेश बंगाल की खाड़ी के समुद्री क्षेत्र का गार्जियन है। उनके इस बयान के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए इसे आक्रामक और गलत बयान बताया था।
भारत का बिम्सटेक में योगदान
जयशंकर ने कहा कि पिछले दशक में भारत ने बिम्सटेक को मजबूत करने के लिए अपनी ऊर्जा और ध्यान को बढ़ाया है। उन्होंने यह भी बताया कि बिम्सटेक सहयोग एक एकीकृत दृष्टिकोण पर आधारित होना चाहिए, न कि चुनिंदा विषयों पर।