सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के जयकवाड़ी बांध पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना का विरोध करने पर एक एनजीओ को कड़ी फटकार लगाई। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि हर परियोजना का विरोध करना देश के विकास में बाधा है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के जयकवाड़ी बांध में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना का विरोध करने के लिए एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने सवाल किया कि अगर हर परियोजना का विरोध किया जाएगा, तो देश कैसे प्रगति करेगा। जयकवाड़ी बांध क्षेत्र को एक आरक्षित पक्षी अभयारण्य और पारिस्थितिकी-संवेदनशील क्षेत्र के रूप में नामित किया गया है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का उद्देश्य पर्यावरण के अनुकूल विकास को बढ़ावा देना है। ऐसे में इस तरह के विरोध से विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
एनजीओ की प्रामाणिकता पर सवाल
पीठ ने एनजीओ 'कहार समाज पंच समिति' की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाया और पूछा कि इस संगठन को किसने खड़ा किया और किसने फंडिंग की? कोर्ट ने कहा, 'क्या टेंडर हासिल करने में नाकाम रहने वाली कंपनी ने आपको वित्त पोषित किया है?' कोर्ट ने इस मामले को 'तुच्छ मुकदमेबाजी' बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ सिर्फ परियोजना में बाधा डालने के उद्देश्य से की जा रही हैं।
सौर ऊर्जा परियोजना से भी आपत्ति?
एनजीओ ने दलील दी कि जयकवाड़ी बांध क्षेत्र पारिस्थितिकी के लिहाज से संवेदनशील है और 'तैरता हुआ सौर ऊर्जा संयंत्र' वहां की जैव विविधता को स्थायी नुकसान पहुँचा सकता है। इस पर कोर्ट ने कहा, 'आप एक भी परियोजना को काम करने नहीं दे रहे हैं। अगर हर परियोजना का विरोध किया जाएगा, तो देश कैसे तरक्की करेगा?'
एनजीटी ने सही फैसला दिया: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने इस परियोजना को मंजूरी देने में कोई गलती नहीं की। एनजीटी ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से जवाब मांगकर सही कदम उठाया। मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा एवं ईंधन का उत्पादन प्रोत्साहित की जाने वाली गतिविधियों में शामिल है।
परियोजना को क्यों बताया जरूरी?
जयकवाड़ी बांध पर 'तैरता हुआ सौर ऊर्जा संयंत्र' स्थापित करने की योजना टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड ने बनाई है। यह परियोजना राज्य के संभाजीनगर जिले के पैठण तालुका में गोदावरी नदी पर स्थित है। महाराष्ट्र सरकार और विद्युत मंत्रालय ने इस परियोजना को राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण बताया है।
देश के विकास में बाधा क्यों?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में लगातार बाधा डालना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अगर हर परियोजना का विरोध किया जाएगा, तो देश कैसे आगे बढ़ेगा? अदालत ने कहा कि परियोजनाओं को रोकने से न केवल ऊर्जा संकट गहराएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर विकास कार्य भी ठप हो जाएंगे।
अंततः सुप्रीम कोर्ट ने एनजीओ की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि एनजीटी के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मुकदमेबाजी का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए, विशेषकर जब परियोजनाओं का उद्देश्य जनहित में हो।