प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) पर की गई छापेमारी के बाद पश्चिम बंगाल से दिल्ली तक राजनीतिक तनाव तेज हो गया है। इस कार्रवाई के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और केंद्रीय एजेंसी आमने‑सामने आ गई हैं।
गुरुवार को ED ने I-PAC और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की। I-PAC तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक और चुनावी रणनीति तैयार करने वाली संस्था है। छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं मौके पर पहुंचीं। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि मुख्यमंत्री वहां से एक फाइल और लैपटॉप अपने साथ लेकर गईं, जिसे एजेंसी ने जांच में बाधा और सबूतों से छेड़छाड़ करार दिया है।
ED ने कहा है कि छापेमारी के दौरान दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जबरन हटाए गए, जो कानून के तहत गंभीर मामला है। एजेंसी के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को, पद चाहे जो भी हो, जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। इन्हीं आरोपों के आधार पर ED ने कोलकाता हाई कोर्ट का रुख किया।
तृणमूल कांग्रेस ने ED की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव से पहले केंद्रीय एजेंसियां उसके रणनीतिक दस्तावेजों और चुनावी डेटा तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। तृणमूल नेताओं का कहना है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और विपक्ष को डराने के उद्देश्य से की जा रही है।

इस विवाद को लेकर ED और तृणमूल कांग्रेस दोनों कोलकाता हाई कोर्ट पहुंचे। अदालत में मामले की सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन हाई कोर्ट परिसर में भारी भीड़, नारेबाजी और हंगामे के कारण स्थिति बिगड़ गई। हालात को देखते हुए अदालत ने सुनवाई स्थगित कर दी।
कोलकाता हाई कोर्ट ने कानून‑व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए मामले की सुनवाई 14 जनवरी तक टाल दी। अदालत ने कहा कि संवेदनशील मामले की सुनवाई शांत वातावरण में ही संभव है।
सुनवाई टलने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में ED की कार्रवाई के विरोध में निकाले गए मार्च का नेतृत्व किया। उन्होंने केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
इस मुद्दे पर दिल्ली में भी विरोध प्रदर्शन हुए। तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पार्टी के आठ सांसदों को हिरासत में लिया।
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को हिरासत में लिया जा रहा है, जबकि अपराध करने वाले आसानी से जमानत पा रहे हैं।











