बिहार के पश्चिम चम्पारण के जैनेंद्रजीत ने 10वीं में 54% अंक आने और लोगों के तानों के बावजूद हार नहीं मानी। बीमारी के बाद उन्होंने पढ़ाई का तरीका बदला और JEE की तैयारी कर IIT Bombay में जगह बनाई।
IIT Success Story: बिहार के जैनेंद्रजीत का सफर बताता है कि एक खराब रिजल्ट भविष्य तय नहीं करता। 10वीं में Maths में 41 अंक और कुल 54% हासिल करने के बाद उन्हें निराशा और लोगों के तानों का सामना करना पड़ा। बीमारी के कारण बोर्ड परीक्षा से पहले करीब 40-50 दिन बिस्तर पर रहने के बावजूद उन्होंने आगे की पढ़ाई पर फोकस किया और JEE की तैयारी के लिए अपना पूरा रूटीन बदल दिया।
10वीं के खराब रिजल्ट ने दिया बड़ा झटका
बिहार के पश्चिम चम्पारण के रहने वाले जैनेंद्रजीत आज IIT Bombay के Student हैं, लेकिन उनकी पढ़ाई का सफर हमेशा आसान नहीं रहा। 10वीं कक्षा में उनके सिर्फ 54 प्रतिशत अंक आए थे। Maths में उन्हें 41, Science में 48 और Hindi में 49 अंक मिले थे। Social Science में 54 और English में 79 अंक आने के बाद उनका कुल प्रतिशत 54% रहा।
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यह परिणाम जैनेंद्रजीत के लिए निराशाजनक था, क्योंकि उन्हें इससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी। उनकी पढ़ाई बेतिया के वृंदावन स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में हुई। बोर्ड परीक्षा के समय उनकी तबीयत भी खराब थी, जिसके कारण उन्हें करीब 40 से 50 दिन तक बिस्तर पर रहना पड़ा। बीमारी की वजह से उनकी तैयारी प्रभावित हुई और इसका असर रिजल्ट पर भी दिखाई दिया।
रिजल्ट सामने आने के बाद उन्हें अपने अंकों को लेकर लोगों के तानों का सामना करना पड़ा। उनके कई साथियों के 90 प्रतिशत से अधिक अंक आए थे, जिससे उनकी निराशा और बढ़ गई। हालांकि, उन्होंने इस नतीजे को अपनी पूरी क्षमता का पैमाना मानने के बजाय आगे बेहतर करने की ठानी।
लोगों के तानों को बनाया Motivation
जैनेंद्रजीत ने एक YouTube Video में 10वीं का रिजल्ट देखने का अनुभव साझा किया था। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने वेबसाइट पर अपना स्कोर देखा तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि यह उनका रिजल्ट है।
खराब अंकों और आसपास के लोगों की प्रतिक्रियाओं के बावजूद उन्होंने पढ़ाई छोड़ने या निराश होकर रुकने के बजाय अपनी रणनीति बदलने का फैसला किया। उन्होंने समझा कि एक परीक्षा में कम अंक आना उनके भविष्य का अंतिम फैसला नहीं है।
इसके बाद उनका फोकस 12वीं की पढ़ाई के साथ Engineering Entrance Exams की तैयारी पर हो गया। JEE और JEE Advanced जैसी कठिन परीक्षाओं के लिए उन्होंने अपनी पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदल दिया।
JEE की तैयारी के लिए बनाया सख्त Routine
जैनेंद्रजीत ने तैयारी के दौरान एक Balanced Time-Table तैयार किया। उन्होंने पढ़ाई के दौरान ध्यान भटकाने वाली चीजों को कम किया और Social Media का इस्तेमाल काफी सीमित कर दिया। धीरे-धीरे उनका पढ़ाई का समय बढ़कर रोजाना करीब 10 घंटे तक पहुंच गया।
उनकी तैयारी की एक खास बात यह थी कि वह Class में जाने से पहले Educational Videos के जरिए Topics की Basic Understanding बनाने की कोशिश करते थे। इससे Classroom Lectures के दौरान उन्हें कठिन Concepts पर ज्यादा ध्यान देने में मदद मिली।
उन्होंने पूरे Syllabus को एक साथ खत्म करने का दबाव लेने के बजाय रोजाना छोटे और आसानी से पूरे किए जा सकने वाले Goals बनाए। इस Strategy से पढ़ाई ज्यादा व्यवस्थित रही और लगातार Progress करना आसान हुआ।
PYQs और Mock Tests पर दिया जोर
JEE की तैयारी के दौरान जैनेंद्रजीत ने Previous Year Questions यानी PYQs को काफी महत्व दिया। पुराने प्रश्नपत्र हल करने से उन्हें परीक्षा के Pattern और पूछे जाने वाले सवालों की प्रकृति समझने में मदद मिली।
इसके साथ ही उन्होंने नियमित रूप से Mock Tests भी दिए। इससे उन्हें अपनी Problem-Solving Skills को बेहतर करने और अपनी तैयारी का आकलन करने का मौका मिला। गलत सवालों पर दोबारा काम करना उनकी तैयारी का अहम हिस्सा रहा।
10वीं में 54 प्रतिशत अंक आने के बाद भी लगातार मेहनत और बेहतर Strategy के जरिए जैनेंद्रजीत ने अपनी पढ़ाई का स्तर पूरी तरह बदल दिया। उनकी कहानी बताती है कि किसी एक परीक्षा का खराब परिणाम किसी Student की क्षमता या भविष्य को तय नहीं करता। सही दिशा, लगातार मेहनत और अनुशासित तैयारी के जरिए कमजोर शुरुआत के बाद भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।











