2025 की मार्केट यात्रा में निवेशकों ने सीखा सबक, 2026 में बदलाव जरूरी

2025 की मार्केट यात्रा में निवेशकों ने सीखा सबक, 2026 में बदलाव जरूरी

2025 में निवेशकों ने डर और लालच के चलते कई भावनात्मक निवेश निर्णय लिए। 2026 में एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि अनुशासन, विविध पोर्टफोलियो और लंबी अवधि के नजरिए के साथ निवेश करना लाभदायक रहेगा।

Business: 2025 का साल निवेशकों के लिए अनुभव और सीख से भरा रहा। यह सिर्फ बाजार के उतार-चढ़ाव का साल नहीं था, बल्कि यह साल यह भी दिखाने वाला रहा कि निवेशक अपने फैसलों में कैसे भावनाओं से प्रभावित होते हैं। 

SIP में लगातार निवेश से लेकर चांदी और हाई-बीटा शेयरों में जोखिम लेने तक, रिटेल निवेशकों ने दिखाया कि डर और लालच निवेश निर्णयों में आज भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कम शोर, अनुशासन और सही एसेट एलोकेशन 2026 के लिए जरूरी सबक हैं।

निवेशक अनुशासित भी रहे, लेकिन भीड़ के पीछे भी भागे

SIP की मजबूती 2025 की बड़ी खासियत रही। आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स के डायरेक्टर थॉमस स्टीफन के अनुसार, हर महीने SIP में निवेश लगातार बना रहा, जो निवेशकों की समझदारी को दर्शाता है। स्क्रिपबॉक्स के मैनेजिंग पार्टनर सचिन जैन भी मानते हैं कि साल भर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद लोग अपने सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान को नियमित रूप से जारी रखते रहे। 

हालांकि, अनुशासन के साथ-साथ भीड़ की मानसिकता भी दिखी। चांदी और हाई-बीटा सेक्टरों में तेजी का आकर्षण कई निवेशकों को अपनी ओर खींचा। डिफेंस, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों में निवेशकों का उत्साह इतना बढ़ा कि कई शेयरों की मार्केट वैल्यू बाद में 60 से 70 फीसदी तक गिर गई।

चांदी और F&O में भावनाओं की ताकत

चांदी 2025 में निवेशकों की भावनाओं का सबसे बड़ा उदाहरण रही। स्टीफन के अनुसार, चांदी ने लगभग 100 फीसदी रिटर्न दिया। इससे पेपर सिल्वर में रिकॉर्ड निवेश आया और कुछ AMC ने नई सब्सक्रिप्शन अस्थायी रूप से रोक दी। सचिन जैन के मुताबिक, SEBI की एक स्टडी में सामने आया कि 91 फीसदी रिटेल F&O ट्रेडर्स को नुकसान हुआ, औसतन घाटा एक लाख रुपये से अधिक रहा। यह लालच और डर से लिए गए फैसलों का क्लासिक उदाहरण है, जहां निवेशकों ने जल्दी मुनाफे की उम्मीद में जोखिम लिया लेकिन नुकसान झेला।

2025 में हुईं महंगी व्यवहारिक गलतियां

विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल निवेशकों ने तीन बड़ी गलतियां कीं, जो उनके पोर्टफोलियो को नुकसान पहुँचा सकती हैं। मौका छूट जाने का डर (FOMO) चारों तरफ तेजी देख कर निवेशकों ने चांदी खरीदने से खुद को नहीं रोका। 

कमजोर शेयरों को पकड़े रहना कई निवेशक पुराने अच्छे रिटर्न या भावनात्मक लगाव के कारण कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों को हाथ से नहीं छोड़ पाए। हाई-बीटा थीम्स के पीछे भागना डिफेंस, फार्मा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टरों में उत्साह खत्म होने पर शेयरों की कीमतें तेजी से गिर गईं।

वैश्विक घटनाओं ने बढ़ाई निवेशकों की बेचैनी

अमेरिका के चुनाव नतीजों से लेकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव तक, वैश्विक घटनाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। जैन कहते हैं कि 2025 में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिनसे बाजार गिर सकता था, लेकिन टिके रहने वाले निवेशकों ने फायदा उठाया। 

स्टीफन बताते हैं कि ट्रंप दौर के टैरिफ, वैश्विक विकास में सुस्ती और लगातार FII का पैसा निकलना घरेलू निवेशकों के मूड पर प्रभाव डालता रहा। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि ग्लोबल संकेतों पर नजर जरूर रखें, लेकिन फैसले लंबी अवधि के फंडामेंटल्स और सही एसेट एलोकेशन के आधार पर लें।

क्यों जरूरी है 2026 में सावधानी

आने वाले साल में निवेशकों को कुछ मानसिक जालों से बचना चाहिए। जल्दबाजी में फैसले लेना मुश्किल साल के बाद अगर पोर्टफोलियो में हड़बड़ी में बदलाव किए गए, तो फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है। भीड़ के साथ भागना धातुओं या नई थीम्स में फिर से भीड़ दौड़ सकती है। हाल की घटनाओं को ज्यादा तवज्जो देना अगर इक्विटी में कुछ समय तक कम रिटर्न मिले, तो निवेशक शेयर बाजार पर शक करने लगते हैं, जबकि लंबी अवधि में अनुशासन से ही असली फायदा मिलता है।

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