Stock Market Outlook 2026 में ब्रोकरेज मोतीलाल ओसवाल ने बाजार को स्थिर लेकिन सकारात्मक बताया है। अर्निंग्स सुधार, बजट सपोर्ट और मजबूत फंडामेंटल्स के चलते 2026 में निवेश के बेहतर अवसर बन सकते हैं।
Stock Market Outlook 2026: भारतीय शेयर बाजार ने 2025 में उतार-चढ़ाव भरा सफर तय किया, लेकिन साल के अंत तक बाजार ने खुद को संभालते हुए स्थिरता दिखाई। अब निवेशकों की नजर 2026 पर टिकी है। सवाल यह है कि नया साल बाजार के लिए कैसा रहेगा और किन सेक्टर्स में निवेश के बेहतर मौके बन सकते हैं। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) ने अपने New Year Outlook 2026 में बाजार को लेकर विस्तार से आकलन पेश किया है।
2026 में बाजार की संभावित चाल
MOFSL के मुताबिक, 2026 भारतीय शेयर बाजार के लिए अपेक्षाकृत स्थिर लेकिन धीरे-धीरे मजबूती वाला साल हो सकता है। साल 2025 में जहां बाजार ने कंसोलिडेशन का दौर देखा, वहीं 2026 में कॉरपोरेट अर्निंग्स में सुधार, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में धीरे-धीरे बढ़त और सरकारी नीतियों के समर्थन से बाजार को सहारा मिलने की उम्मीद है।
ब्रोकरेज का मानना है कि 2025 में निफ्टी करीब 10 प्रतिशत की सालाना बढ़त के साथ ऑल टाइम हाई के आसपास रहा। हालांकि यह ग्रोथ डबल डिजिट से थोड़ी कम रही, लेकिन बाजार ने मजबूत आधार तैयार किया है। इसी आधार पर 2026 में बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव के साथ पॉजिटिव ट्रेंड बनने की संभावना जताई गई है।
Budget 2026 क्यों है सबसे अहम
MOFSL के अनुसार Budget 2026 बेहद अहम साबित हो सकता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर FY27 की दिशा तय करेगा। सरकार का फोकस कैपेक्स और कंजम्प्शन दोनों पर रहने की उम्मीद है। अगर बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और घरेलू खपत को बढ़ावा देने वाले कदम आते हैं, तो इसका सीधा असर बाजार की सेंटिमेंट पर पड़ेगा।
इनकम टैक्स में राहत, जीएसटी सुधार और सरकारी खर्च बढ़ाने जैसे फैसले बाजार के लिए पॉजिटिव ट्रिगर बन सकते हैं। इसी वजह से निवेशकों को बजट से पहले और बाद में बाजार की चाल पर खास नजर रखने की सलाह दी गई है।
2026 में निवेशकों को क्या रणनीति अपनानी चाहिए
मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि 2026 निवेशकों के लिए ज्यादा सकारात्मक साल हो सकता है, लेकिन इसके लिए अनुशासन बेहद जरूरी होगा। निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर फोकस रखें।
ब्रोकरेज के मुताबिक, बाजार की अस्थिरता को अवसर के रूप में देखना चाहिए। जिन कंपनियों की कमाई मजबूत है, बैलेंस शीट अच्छी है और बिजनेस मॉडल टिकाऊ है, उनमें गिरावट के समय निवेश करना लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दे सकता है।
भारत की लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी क्यों मजबूत
MOFSL का मानना है कि भारत की लॉन्ग टर्म ग्रोथ स्टोरी पूरी तरह बरकरार है। देश की युवा आबादी, डिजिटल अपनाने में तेजी, घरेलू बचत का फाइनैंशल एसेट्स की ओर बढ़ना और लगातार हो रहे स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स भारत को मजबूत स्थिति में रखते हैं।
इसके अलावा अगर अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद जैसे मुद्दों का समाधान होता है, तो यह भारतीय बाजार के लिए बड़ा पॉजिटिव संकेत हो सकता है। इससे एक्सपोर्ट सेक्टर और विदेशी निवेश दोनों को सपोर्ट मिलेगा।
वैल्यूएशन के मोर्चे पर बाजार कहां खड़ा है
MOFSL की रिपोर्ट के अनुसार निफ्टी 50 का फॉरवर्ड P/E करीब 21.5 गुना है, जो इसके लॉन्ग टर्म एवरेज से थोड़ा ही ऊपर है। इसका मतलब यह है कि लार्जकैप शेयर फिलहाल बहुत ज्यादा महंगे नहीं कहे जा सकते।
हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की बात करें, तो वहां वैल्यूएशन अब भी ऊंचे स्तर पर है। निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स अपने लंबे औसत के मुकाबले प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। इसी वजह से ब्रोकरेज ने मिड और स्मॉलकैप में चुनिंदा और मजबूत कंपनियों तक ही सीमित रहने की सलाह दी है।
2026 में किन सेक्टर्स पर रखें नजर
MOFSL ने 2026 के लिए लार्जकैप शेयरों को प्राथमिकता दी है, खासकर उन सेक्टर्स में जहां अर्निंग्स की विजिबिलिटी साफ दिखाई दे रही है।
फाइनैंशियल सेक्टर को लेकर ब्रोकरेज का नजरिया पॉजिटिव है। मजबूत क्रेडिट ग्रोथ, बेहतर रिटर्न रेशियो और मजबूत बैलेंस शीट के चलते बैंक और एनबीएफसी सेक्टर में आगे भी ग्रोथ की संभावना है।
कंजम्प्शन सेक्टर में कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी को मजबूत बताया गया है। ऑटोमोबाइल और उससे जुड़े सेक्टर में मांग में सुधार से फायदा मिलने की उम्मीद है।
इंडस्ट्रियल और कैपिटल गुड्स सेक्टर को इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, मैन्युफैक्चरिंग में तेजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और एनर्जी ट्रांजिशन से सपोर्ट मिल रहा है। यह सेक्टर 2026 में बाजार की ग्रोथ का बड़ा हिस्सा बन सकता है।
आईटी सर्विसेज को लेकर MOFSL का मानना है कि मीडियम टर्म में यह सेक्टर सकारात्मक रह सकता है। ग्लोबल टेक खर्च में सुधार और AI तथा डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर बढ़ता फोकस आईटी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।
हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर को डिफेंसिव ग्रोथ के लिए अहम माना गया है। ये सेक्टर पोर्टफोलियो को स्थिरता देते हैं और अनिश्चित समय में सुरक्षा का काम करते हैं।
2025 बाजार के लिए क्यों रहा रीसेट का साल
साल 2025 भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव और रीसेट का साल रहा। अमेरिका के टैरिफ, FII की बिकवाली, रुपये में कमजोरी और वैश्विक तनाव ने पूरे साल बाजार पर दबाव बनाए रखा।
हालांकि साल के अंत में निफ्टी ने जोरदार वापसी की और 1 दिसंबर 2025 को 26,325 का रिकॉर्ड स्तर छू लिया। मिडकैप शेयरों ने सीमित बढ़त दिखाई, जबकि स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा गिरावट देखने को मिली।
RBI की भूमिका रही बेहद अहम
2025 में RBI ने बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभाई। इस दौरान चार बार ब्याज दरों में कटौती की गई और कुल 125 बेसिस पॉइंट की कमी आई। रीपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गई।
इसके अलावा जून 2025 में कैश रिजर्व रेशियो में 1 प्रतिशत की कटौती का ऐलान किया गया, जिसे चार चरणों में लागू किया गया। इससे बैंकिंग सिस्टम में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकदी आई।
RBI ने ओपन मार्केट ऑपरेशन के जरिए भी बाजार में लिक्विडिटी बनाए रखी। दिसंबर 2025 में 1 लाख करोड़ रुपये के सरकारी बॉन्ड खरीदे गए, जिससे सिस्टम में लंबे समय तक पर्याप्त नकदी बनी रही।
इकॉनमी की स्थिति रही मजबूत
2025 में भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रही। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में जीडीपी 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी। इसकी मुख्य वजह घरेलू खपत में तेजी रही। नवंबर 2025 में खुदरा महंगाई घटकर 0.71 प्रतिशत पर आ गई, जो RBI के लक्ष्य से काफी नीचे है। खाने-पीने की चीजों के दाम कम होना और जीएसटी सुधार इसकी बड़ी वजह रहे।
अर्निंग्स में कमजोरी लेकिन सुधार की उम्मीद
अर्निंग्स के मोर्चे पर निफ्टी 50 में 2025 के दौरान सुस्त ग्रोथ देखने को मिली। दूसरी तिमाही में कंपनियों का मुनाफा सालाना आधार पर सिर्फ 2 प्रतिशत बढ़ा। यह लगातार छठी तिमाही थी जब अर्निंग्स कमजोर रहीं।
हालांकि दूसरी छमाही में कई सेक्टर्स जैसे OMCs, टेलीकॉम, मेटल्स, टेक्नोलॉजी, NBFC, सीमेंट और कैपिटल गुड्स में सुधार के संकेत मिले। इसी वजह से FY26 और FY27 के लिए EPS अनुमान बढ़ाए गए हैं।
DII की बढ़ती ताकत
2025 में एक बड़ा बदलाव यह देखने को मिला कि DII की हिस्सेदारी पहली बार FII से ज्यादा हो गई। मजबूत घरेलू निवेश और प्राइमरी मार्केट की गतिविधियों ने इसमें अहम भूमिका निभाई।
वहीं FII पूरे साल ज्यादातर बिकवाल बने रहे। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ना, डॉलर मजबूत होना और AI तथा सेमीकंडक्टर से जुड़े बाजारों की ओर कैपिटल का रुख इसकी वजह रहा।









