2026 में स्मार्टफोन की बिक्री में गिरावट, महंगी चिप से दाम में हो सकती है बढ़ोतरी

2026 में स्मार्टफोन की बिक्री में गिरावट, महंगी चिप से दाम में हो सकती है बढ़ोतरी

2026 में भारतीय स्मार्टफोन बाजार में चुनौती दिख सकती है। मेमरी चिप की कमी से कीमतें 40% तक बढ़ सकती हैं। प्रवेश स्तर के फोन सबसे प्रभावित होंगे, जबकि प्रीमियम सेगमेंट पर असर कम रहेगा।

New Delhi: भारत के स्मार्टफोन बाजार को 2026 में मांग और शिपमेंट दोनों मोर्चों पर चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। वैश्विक स्तर पर मेमरी चिप की लगातार हो रही कमी के कारण इस साल जून तिमाही तक चिप की कीमतों में 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है। इस वृद्धि का असर सीधे स्मार्टफोन की कीमतों पर पड़ेगा और कंपनियों को लागत बढ़ोतरी का भार ग्राहकों पर डालने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

मेमरी चिप की किल्लत

काउंटरपॉइंट रिसर्च के निदेशक तरुण पाठक का कहना है कि उनके संशोधित अनुमानों के आधार पर आने वाले साल में यह गिरावट काफी गंभीर हो सकती है। उन्होंने बताया कि प्रवेश स्तर के स्मार्टफोन, जिनकी कीमत लगभग 10,000 रुपये के दायरे में है, की शिपमेंट वॉल्यूम अगले साल 15 प्रतिशत से अधिक घट सकती है। इस सेगमेंट का स्मार्टफोन बाजार में कुल वॉल्यूम में 18 प्रतिशत योगदान होता है। कुल मिलाकर सभी श्रेणियों में औसतन 3 से 5 प्रतिशत की कमी देखने को मिल सकती है।

स्मार्टफोन की कुल लागत में मेमरी चिप की हिस्सेदारी 12 से 16 प्रतिशत होती है। इस कारण कीमत में बढ़ोतरी का दबाव अधिकतर मध्यम और प्रवेश स्तर के स्मार्टफोन पर पड़ेगा। उच्च श्रेणी के प्रीमियम फोन पर इसका असर अपेक्षाकृत कम रहेगा। यह गिरावट इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि पिछले दो वर्षों से स्मार्टफोन की वॉल्यूम शिपमेंट लगभग स्थिर रही है।

2025 का बाजार प्रदर्शन

साल 2025 में भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट लगभग 15.3 करोड़ यूनिट रहने का अनुमान है, जो 2024 के लगभग बराबर है। मूल्य के लिहाज से स्मार्टफोन बाजार ने 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जिसका मुख्य कारण प्रीमियम सेगमेंट की ओर बढ़ते रुझान और औसत बिक्री मूल्य में वृद्धि रहा।

लेकिन तरुण पाठक का कहना है कि 2026 में कीमतों में 5 से 9 प्रतिशत की वृद्धि की संभावना है, जो प्रीमियम की ओर बढ़ते रुझान के कारण नहीं बल्कि उत्पादन लागत में बढ़ोतरी के कारण होगी।

कंपनियों की तैयारी

मोबाइल कंपनियां इस चुनौती को स्वीकार कर रही हैं। श्याओमी इंडिया के मुख्य परिचालन अधिकारी सुधीन माथुर ने कहा, “हमें कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं और अधिकांश कंपनियां पहले ही ऐसा कर चुकी हैं। मेमरी की कीमत में तेजी से बढ़ी हुई लागत को पूरी तरह से झेलना संभव नहीं है।” उन्होंने यह भी बताया कि ईएमआई के माध्यम से फोन खरीदने वाले ग्राहकों पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा।

बड़े ब्रांडों को आपूर्ति करने वाली एक प्रमुख ईएमएस कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि “मेमरी की कमी पूरे साल बनी रहेगी क्योंकि एआई डेटा सेंटरों द्वारा मौजूदा क्षमता का उपयोग किया जा रहा है और नई क्षमता आने में समय लगेगा।”

लावा इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा कि मेमरी चिप की कमी के कारण फोन की कीमतें बढ़ेंगी, खासकर प्रवेश स्तर के स्मार्टफोन के सेगमेंट में। उन्होंने इसे 2026 के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया।

लागत बढ़ोतरी का ग्राहक पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि मेमरी चिप की बढ़ी कीमतों के कारण कंपनियों को 8 से 15 प्रतिशत की लागत बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा। इस बढ़ोतरी का भार ग्राहकों पर डालना अनिवार्य होगा, जिससे स्मार्टफोन की कुल मांग प्रभावित हो सकती है। प्रवेश स्तर के फोन, जिनकी बिक्री वॉल्यूम ज्यादा होती है, उस पर सबसे अधिक दबाव पड़ेगा।

वैश्विक कारण और मेमरी किल्लत

वैश्विक स्तर पर मेमरी चिप की कमी कई कारणों से हो रही है। एआई और डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग, उत्पादन क्षमता की सीमितता और नई फैक्ट्री लगाने में लगने वाला समय मुख्य कारण हैं। इससे मेमरी चिप की कीमतों में तेजी जारी रहने की संभावना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति में स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों के लिए लागत नियंत्रण और मूल्य निर्धारण रणनीति महत्वपूर्ण होगी। कंपनियों को यह तय करना होगा कि उत्पादन लागत बढ़ने पर किस हद तक कीमतों में इजाफा किया जाए ताकि मांग पर असर कम पड़े।

स्मार्टफोन बाजार में दीर्घकालिक प्रभाव

यदि मेमरी चिप की कीमतें उच्च बनी रहती हैं, तो स्मार्टफोन बाजार की कुल शिपमेंट में कमी लंबे समय तक रह सकती है। यह स्थिति प्रवेश स्तर के फोन सेगमेंट को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगी, जो भारतीय बाजार में वॉल्यूम की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

प्रीमियम सेगमेंट पर इसका असर अपेक्षाकृत कम रहेगा क्योंकि वहां मूल्य संवेदनशीलता कम होती है। हालांकि, कुल मिलाकर, भारत में स्मार्टफोन बिक्री की वृद्धि दर अगले साल धीमी रह सकती है।

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