2026 से 2030 के बीच पूंजीगत व्यय बढ़ाने की रणनीति, NMP 2.0 बना सरकार का बड़ा दांव

वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने NMP 2.0 लॉन्च किया। 2026-2030 के बीच 16.72 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य। राजमार्ग, रेलवे, बिजली और बंदरगाह सेक्टर पर फोकस

वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने NMP 2.0 लॉन्च किया, जिसके तहत 2026 से 2030 के बीच 16.72 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है। राजमार्ग, रेलवे और बिजली क्षेत्र की संपत्तियों के मुद्रीकरण से पूंजीगत व्यय को मजबूती मिलेगी।

New Delhi: केंद्र सरकार ने आर्थिक संसाधन जुटाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन यानी NMP 2.0 के दूसरे चरण का अनावरण किया। इस योजना के तहत सरकार ने 16.72 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2030 के बीच पूरा किया जाएगा।

इस पहल का मकसद केंद्र सरकार के मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों यानी PSU की संपत्तियों के मुद्रीकरण के जरिए पूंजी जुटाना है। सरकार का कहना है कि इससे नई परियोजनाओं और पूंजीगत व्यय यानी Capital Expenditure के लिए संसाधन उपलब्ध होंगे।

NMP 2.0 क्या है और क्यों अहम है

राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन का उद्देश्य पहले से मौजूद उत्पादक सार्वजनिक संपत्तियों का बेहतर उपयोग करना है। सरकार इन संपत्तियों को स्थायी रूप से बेच नहीं रही, बल्कि तय अवधि के लिए निजी भागीदारी के जरिए उनका उपयोग कर राजस्व जुटा रही है।

वित्त मंत्री ने कहा कि इस मॉडल से सार्वजनिक संपत्तियों का पुनर्चक्रण होता है। इससे सरकार को नई परियोजनाओं में निवेश करने के लिए पूंजी मिलती है और राजकोष पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता। यह तरीका इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देने में मदद करता है।

किन क्षेत्रों से जुटेगा सबसे ज्यादा राजस्व

नीति आयोग के मुख्य कार्याधिकारी BVR Subrahmanyam ने बताया कि NMP 2.0 में राजमार्ग, बिजली, बंदरगाह और रेलवे जैसे प्रमुख सेक्टर शामिल हैं। इन क्षेत्रों की 2,000 से ज्यादा संपत्तियों में निजी भागीदारी लाई जाएगी।

सरकार को उम्मीद है कि कुल लक्ष्य का एक चौथाई से अधिक हिस्सा राजमार्ग परियोजनाओं से आएगा। इसके अलावा बंदरगाह, कोयला और खनिज क्षेत्र से भी अच्छी राशि जुटने की संभावना है। ये वे सेक्टर हैं जिन्होंने पहले चरण में बेहतर प्रदर्शन किया था।

निजी निवेश को भी मिलेगा बढ़ावा

NMP 2.0 की खास बात यह है कि इसमें पहली बार पांच वर्षों में 5.8 लाख करोड़ रुपये के निजी निवेश का अनुमान शामिल किया गया है। इसका मतलब यह है कि सरकार सिर्फ संपत्ति के उपयोग से राजस्व ही नहीं जुटाएगी, बल्कि Private Sector की भागीदारी भी बढ़ाएगी।

इससे इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में नई ऊर्जा आएगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। सरकार का मानना है कि यह मॉडल सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच संतुलन बनाते हुए विकास को गति देगा।

मुद्रीकरण के तरीके क्या होंगे

दूसरे चरण में संपत्ति मुद्रीकरण के कई तरीके अपनाए जाएंगे। इसमें तय अवधि के लिए संपत्तियों का हस्तांतरण शामिल है। इसके अलावा सूचीबद्ध कंपनियों में सरकारी हिस्सेदारी घटाकर पूंजी जुटाई जाएगी।

नकद प्रवाह का प्रतिभूतिकरण यानी Securitisation भी इस योजना का हिस्सा है। इसका अर्थ है कि भविष्य में मिलने वाले राजस्व के आधार पर अभी पूंजी जुटाई जाएगी। इन उपायों से सरकार को बिना संपत्ति बेचे वित्तीय संसाधन मिलेंगे।

वित्त वर्ष 2026 का लक्ष्य

सरकार ने वित्त वर्ष 2026 में संपत्ति मुद्रीकरण से 2.49 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि नीति आयोग का अनुमान है कि इसमें से लगभग 2 लाख करोड़ रुपये ही प्राप्त हो सकते हैं।

यह अंतर बताता है कि लक्ष्य महत्वाकांक्षी है और इसके लिए मजबूत कार्यान्वयन की जरूरत होगी। पहले चरण के अनुभव को देखते हुए सरकार ने इस बार बेहतर योजना और निगरानी तंत्र पर जोर दिया है।

रेलवे को मिला बड़ा लक्ष्य

पहली राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना में रेलवे अपने लक्ष्य का केवल 29 प्रतिशत ही हासिल कर पाया था। इसके बावजूद NMP 2.0 में रेलवे को 2.62 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया है।

इसमें सात सूचीबद्ध रेलवे PSU में सरकारी हिस्सेदारी घटाने के जरिए 83,700 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य शामिल है। सरकार को उम्मीद है कि इस बार रेलवे सेक्टर बेहतर प्रदर्शन करेगा और निवेशकों की रुचि बढ़ेगी।

सरकार की रणनीति

सरकार का मानना है कि NMP 2.0 से पूंजीगत व्यय को मजबूती मिलेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता खर्च अर्थव्यवस्था को गति देने में अहम भूमिका निभाता है। सड़कों, रेलवे, बंदरगाह और ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश से लंबी अवधि में विकास दर पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

यह योजना ऐसे समय में लाई गई है जब सरकार विकास परियोजनाओं को तेज करना चाहती है। मुद्रीकरण से मिलने वाली राशि का उपयोग नई परियोजनाओं में किया जाएगा, जिससे अर्थव्यवस्था में पूंजी का प्रवाह बना रहेगा।

निवेशकों और राज्यों के लिए क्या मायने

NMP 2.0 के तहत राज्यों और केंद्र सरकार की सार्वजनिक कंपनियों की संपत्तियों में निजी भागीदारी बढ़ेगी। इससे निवेशकों को इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में हिस्सेदारी का अवसर मिलेगा।

राज्यों के लिए भी यह योजना फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि इससे उन्हें अतिरिक्त संसाधन मिलेंगे। हालांकि पारदर्शिता और समयबद्ध क्रियान्वयन इस योजना की सफलता के लिए जरूरी होंगे।

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