27 दिसंबर को CWC बैठक, सरकार के खिलाफ रणनीति तय करेगी कांग्रेस, जानिए किन मुद्दों पर होगी चर्चा

27 दिसंबर को CWC बैठक, सरकार के खिलाफ रणनीति तय करेगी कांग्रेस, जानिए किन मुद्दों पर होगी चर्चा

कांग्रेस ने मौजूदा राजनीतिक हालात और संसद में जारी टकराव के बीच 27 दिसंबर को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक बुलाई है। बैठक में एमएनआरईजीए, अल्पसंख्यक मुद्दों और आगे की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा होगी।

CWC Meeting: देश की मौजूदा राजनीतिक हलचल और संसद में चल रहे तीखे टकराव के बीच कांग्रेस पार्टी ने एक अहम फैसला लिया है। कांग्रेस कार्य समिति यानी CWC की बैठक 27 दिसंबर को बुलाई गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में वर्तमान राजनीतिक स्थिति का गहराई से आकलन किया जाएगा और आने वाली रणनीति पर चर्चा होगी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब संसद में सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है और कई बड़े विधेयकों पर विवाद खड़ा हो गया है।

संसद की गरम राजनीति के बीच कांग्रेस की तैयारी

कांग्रेस कार्य समिति की बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब लोकसभा में विकसित भारत-ग्राम रोजगार और आजीविका मिशन संशोधन विधेयक पर करीब 14 घंटे लंबी बहस हो चुकी है। इस बहस के दौरान विपक्ष ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए और विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक विधेयक नहीं बल्कि ग्रामीण रोजगार और आजीविका से जुड़े करोड़ों लोगों के अधिकारों का मामला है।

दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इस विधेयक का मजबूती से बचाव किया और इसे 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया। भाजपा का दावा है कि यह कानून देश की आर्थिक संरचना को मजबूत करेगा और ग्रामीण भारत को नई दिशा देगा।

एमएनआरईजीए के नाम परिवर्तन पर कांग्रेस का विरोध

लोकसभा की बहस के साथ-साथ संसद परिसर में भी विरोध देखने को मिला। कांग्रेस नेताओं और कई विपक्षी सांसदों ने गांधी प्रतिमा से मकर द्वार तक मार्च निकालकर एमएनआरईजीए का नाम बदलकर वीबी जी राम जी किए जाने का विरोध किया। सांसदों ने हाथों में पोस्टर लेकर “महात्मा गांधी का अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे” जैसे नारे लगाए।

कांग्रेस का कहना है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम सिर्फ एक योजना नहीं बल्कि गरीबों के काम के अधिकार का प्रतीक है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि नाम बदलने और फंडिंग पैटर्न में बदलाव के जरिए सरकार इस कानून की मूल भावना को कमजोर करना चाहती है।

अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर भी विपक्ष का प्रदर्शन

एमएनआरईजीए के विरोध के साथ-साथ विपक्षी सांसदों ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित अत्याचारों का मुद्दा भी संसद परिसर में उठाया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि देश में सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है और सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखा रही है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, 27 दिसंबर को होने वाली कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में इन सभी मुद्दों को एक साथ जोड़कर रणनीति तैयार की जाएगी। कांग्रेस नेतृत्व यह तय करेगा कि संसद के अंदर और बाहर सरकार के खिलाफ किस तरह का राजनीतिक और जन आंदोलन खड़ा किया जाए।

लोकसभा सत्र में किन मुद्दों पर हुई चर्चा

18वीं लोकसभा के छठे सत्र में इस बार कई विधायी, नीतिगत और समिति से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। नियम 193 के तहत दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी NCR में वायु प्रदूषण पर विशेष ध्यान दिया गया। विपक्ष का कहना है कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है, लेकिन सरकार के पास इसका कोई ठोस समाधान नहीं है।

इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि और भाजपा सांसद बंसुरी स्वराज जैसे नेता अपनी बात रखेंगे। माना जा रहा है कि वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य से जुड़े सवाल भी कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।

सदन की कार्यवाही की शुरुआत

लोकसभा की कार्यवाही पूर्व सांसदों दारूर पुल्लैया, प्रोफेसर महादेवराव शिवंकर, कुसुमा कृष्ण मूर्ति और शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शुरू हुई। इसके बाद प्रश्नकाल और चर्चा का दौर चला, जहां सदस्यों ने अपने सवाल रखे और संबंधित मंत्रियों ने उनके जवाब दिए।

हालांकि, सदन की कार्यवाही के दौरान कई बार हंगामा भी देखने को मिला। विपक्ष ने सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने विपक्ष पर बेवजह बाधा डालने का आरोप लगाया।

कांग्रेस कार्य समिति की बैठक क्यों है अहम

कांग्रेस कार्य समिति पार्टी का सर्वोच्च निर्णय लेने वाला मंच है। इसमें पार्टी अध्यक्ष, वरिष्ठ नेता और राज्यों के प्रमुख नेता शामिल होते हैं। 27 दिसंबर की बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें संसद सत्र के अनुभव, विपक्षी एकता और आगामी राजनीतिक रणनीति पर चर्चा होगी।

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