सर्दियों में नवजात बच्चों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। बुखार, दूध न पीना, उल्टी-दस्त और सुस्ती जैसे लक्षण शुरुआती चेतावनी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार माता-पिता को इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। साफ-सफाई, हाथ धोना और समय पर टीकाकरण से संक्रमण से बचाव संभव है।
नवजात में इंफेक्शन का खतरा: सर्दियों के मौसम में अधिक बढ़ जाता है और माता-पिता को इसके शुरुआती लक्षणों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। गाजियाबाद के जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग के डॉक्टरों के अनुसार, बुखार 100 डिग्री से ऊपर, दूध न पीना, बार-बार उल्टी-दस्त और सुस्ती संक्रमण के संकेत हैं। यह खतरा जन्म के पहले महीने में सबसे अधिक होता है, इसलिए साफ-सफाई, उचित देखभाल और समय पर टीकाकरण आवश्यक है।
बच्चे में बुखार और दूध न पीना
सर्दियों के मौसम में नवजात बच्चों में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। गाजियाबाद के जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग के डॉ. विपिनचंद्र उपाध्याय के अनुसार, अगर नवजात का शरीर सामान्य से ज्यादा गर्म हो और बुखार 100 डिग्री से ऊपर हो, तो इसे गंभीर माना जाता है। माता-पिता को थर्मामीटर से तापमान जांचकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
इसके अलावा, नवजात यदि दूध नहीं पी रहा है या सुस्त है, तो यह भी संक्रमण का संकेत हो सकता है। बार-बार रोना या फीड के दौरान असहज होना भी महत्वपूर्ण लक्षण हैं। इन संकेतों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।

उल्टी और दस्त के संकेत
नवजात बच्चे में लगातार उल्टी या दस्त होना भी इंफेक्शन का प्रमुख लक्षण है। छोटे बच्चे की इम्यूनिटी कमजोर होने के कारण यह संक्रमण तेजी से फैल सकता है। माता-पिता को ऐसे मामलों में देरी नहीं करनी चाहिए और तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
इंफेक्शन के कारण
बच्चे को संक्रमण के प्रमुख कारणों में बैक्टीरिया या वायरस का संपर्क, गंदे हाथों से छूना, समय से पहले जन्म और कमजोर इम्यूनिटी शामिल हैं। नवजात बच्चों में संक्रमण बहुत तेजी से बढ़ता है, इसलिए शुरुआती देखभाल पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
बचाव के उपाय
नवजात बच्चे को अनावश्यक रूप से ज्यादा लोग न छुएं। अगर कोई बच्चे को छूने जा रहा है, तो पहले हाथ अच्छी तरह धोएं। साफ कपड़े और बिस्तर का उपयोग करें। साथ ही, सभी निर्धारित टीकाकरण समय पर कराएं, ताकि बच्चे की इम्यूनिटी मजबूत रहे और संक्रमण का खतरा कम हो।









