अभिषेक बनर्जी ने आंखों के इलाज के लिए विदेश यात्रा की अनुमति मांगी, सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला

Abhishek Banerjee News: टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने आंखों के इलाज के लिए विदेश यात्रा की अनुमति मांगते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। मामले की सुनवाई के

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी ने आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगते हुए अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें पहले एसएसकेएम अस्पताल के नेत्र विभाग में चिकित्सकीय जांच कराने और विशेषज्ञों की रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी ने आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगते हुए भारत के सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है। इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया था कि वे पहले कोलकाता स्थित एसएसकेएम अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञों से जांच कराएं और उनकी मेडिकल रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करें। अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में 3 अगस्त को सुनवाई होने की संभावना है।

यह मामला केवल एक व्यक्ति की चिकित्सा यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें न्यायिक प्रक्रिया, चिकित्सकीय आवश्यकता और जांच एजेंसियों से जुड़े कानूनी पहलुओं का भी समावेश है।

सुप्रीम कोर्ट में क्यों पहुंचे अभिषेक बनर्जी?

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में अभिषेक बनर्जी की ओर से कहा गया है कि आंखों के उपचार के लिए विदेश यात्रा की अनुमति संबंधी उनकी याचिका पर कलकत्ता हाई कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिल सकी। ऐसे में उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की है। याचिका के अनुसार, अभिषेक लंबे समय से आंखों की एक विशेष चिकित्सकीय समस्या का उपचार विदेश में कराते रहे हैं और नियमित मेडिकल फॉलो-अप भी वहीं होता रहा है। उनका कहना है कि निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया जारी रखने के लिए विदेश यात्रा आवश्यक है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा था?

इस मामले की सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट ने पहले यह जानना चाहा कि क्या अभिषेक बनर्जी ने कोलकाता के किसी विशेषज्ञ अस्पताल में अपनी आंखों की जांच कराई है। अभिषेक की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि वह पिछले लगभग दस वर्षों से अमेरिका में अपनी आंखों का इलाज करवा रहे हैं और वहां उनकी नियमित मेडिकल जांच होती है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि यदि यह दावा किया जा रहा है कि आवश्यक उपचार भारत में उपलब्ध नहीं है, तो पहले कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल के नेत्र विभागाध्यक्ष द्वारा चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि विशेषज्ञ यह राय देते हैं कि बेहतर इलाज के लिए विदेश जाना चिकित्सकीय रूप से आवश्यक है, तो उस रिपोर्ट के आधार पर विदेश यात्रा की अनुमति पर विचार किया जा सकता है।

राज्य सरकार ने क्यों किया विरोध?

सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने अभिषेक बनर्जी को विदेश जाने की अनुमति देने का विरोध किया। राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि अभिषेक बनर्जी कुछ मामलों में जांच के दायरे में हैं। ऐसे में विदेश यात्रा की अनुमति दिए जाने से जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। सरकार का पक्ष था कि अदालत को इस पहलू को भी ध्यान में रखना चाहिए। दूसरी ओर, अभिषेक के वकीलों ने दलील दी कि विदेश यात्रा का उद्देश्य केवल चिकित्सकीय उपचार है और इसका किसी जांच प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है।

विदेश जाकर इलाज कराने की अनुमति के लिए अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में अलग से भी एक याचिका दायर कर रखी है। उन्होंने उस याचिका पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया था, लेकिन अदालत ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की। हालांकि, मूल याचिका अभी भी विचाराधीन है और उस पर आगे सुनवाई होनी बाकी है। इसी बीच राहत पाने के उद्देश्य से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

2016 की दुर्घटना के बाद शुरू हुआ इलाज

अभिषेक बनर्जी की आंखों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्या वर्ष 2016 की एक सड़क दुर्घटना के बाद सामने आई थी। अक्टूबर 2016 में मुर्शिदाबाद से कोलकाता लौटते समय उनका वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें उनकी आंख के नीचे गंभीर चोट आई थी। इसके बाद उन्होंने भारत के विभिन्न अस्पतालों में उपचार कराया और बाद में विशेषज्ञ चिकित्सा के लिए विदेश में भी इलाज शुरू कराया।

उनकी ओर से अदालत में यही तर्क रखा गया है कि वर्तमान यात्रा उसी उपचार प्रक्रिया का हिस्सा है और नियमित मेडिकल फॉलो-अप के लिए विदेश जाना आवश्यक है।

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