अदाणी एंटरप्राइजेज ने शुक्रवार को उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया, जिनमें कंपनी के हवाई सेवा शुरू करने की योजना का दावा किया गया था। कंपनी ने वाणिज्यिक विमानन क्षेत्र में प्रवेश करने को लेकर चल रही अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ऐसी कोई योजना नहीं है।
Adani Group Airline: अदाणी समूह के एयरलाइन कारोबार में उतरने की अटकलों पर अब कंपनी ने विराम लगा दिया है। अदाणी एंटरप्राइजेज ने शुक्रवार को उन रिपोर्टों का खंडन किया, जिनमें दावा किया गया था कि समूह एक नई वाणिज्यिक एयरलाइन शुरू करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है। कंपनी के स्पष्टीकरण के बाद एयरलाइन क्षेत्र में अदाणी समूह की संभावित एंट्री को लेकर चल रही चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है।
हालांकि, इस पूरे मामले ने भारत के विमानन क्षेत्र में एयरपोर्ट ऑपरेटर और एयरलाइन के बीच संभावित हितों के टकराव को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दरअसल, अटकलों की शुरुआत उन रिपोर्टों के बाद हुई थी, जिनमें कहा गया था कि अदाणी समूह ने सरकार के सामने मौजूदा विमानन नियमों में बदलाव का मुद्दा उठाया है।
क्या अदाणी समूह एयरलाइन शुरू करने की तैयारी कर रहा था?
अदाणी एंटरप्राइजेज ने स्पष्ट किया है कि उसकी एयरलाइन शुरू करने की कोई योजना नहीं है। कंपनी का यह बयान उन रिपोर्टों के बाद आया, जिनमें समूह के वाणिज्यिक विमानन कारोबार में प्रवेश की संभावना जताई गई थी। हालांकि, पहले सामने आई रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि एयरलाइन शुरू करने को लेकर समूह की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया था। ऐसे में कंपनी के ताजा स्पष्टीकरण ने इन अटकलों को फिलहाल समाप्त कर दिया है।
अदाणी समूह पहले से ही भारत के विमानन बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और देश के कई प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन करता है। इसी वजह से समूह के संभावित एयरलाइन कारोबार में प्रवेश की खबरों ने विमानन उद्योग में खासा ध्यान आकर्षित किया।

किस नियम को बदलने की चर्चा थी?
इस विवाद की जड़ एक पुराने नियामक प्रावधान से जुड़ी है। रिपोर्टों के मुताबिक, अदाणी समूह ने सरकार से उस नियम में बदलाव की मांग की थी, जो निजीकरण के दौर में लागू किया गया था। मौजूदा व्यवस्था के तहत दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख हवाई अड्डों के संचालकों को किसी निर्धारित यानी शेड्यूल्ड एयरलाइन में 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखने से प्रतिबंधित किया गया है। इस नियम का उद्देश्य एयरपोर्ट संचालन और एयरलाइन कारोबार के बीच संभावित हितों के टकराव को रोकना है।
अगर इस नियम में बदलाव किया जाता, तो एयरपोर्ट संचालन करने वाले समूहों के लिए एयरलाइन क्षेत्र में प्रवेश का रास्ता अपेक्षाकृत आसान हो सकता था। हालांकि, अदाणी एंटरप्राइजेज के ताजा बयान के बाद फिलहाल यह स्पष्ट है कि कंपनी एयरलाइन शुरू करने की किसी योजना से इनकार कर रही है।
एयरलाइन कंपनियों ने क्यों जताई आपत्ति?
नियमों में संभावित बदलाव की चर्चा के बीच मौजूदा एयरलाइन कंपनियों की ओर से चिंता भी सामने आई। इंडिगो के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने इस तरह के कदम को लेकर हितों के टकराव की आशंका जताई थी। उनका तर्क था कि अगर किसी एयरपोर्ट ऑपरेटर के पास एयरलाइन का भी स्वामित्व हो, तो इससे प्रतिस्पर्धा का माहौल प्रभावित हो सकता है।
एयरपोर्ट और एयरलाइन दोनों क्षेत्रों में एक ही कारोबारी समूह की मौजूदगी से अन्य विमानन कंपनियों को समान अवसर मिलने को लेकर सवाल उठ सकते हैं। उनका मानना था कि ऐसी स्थिति का अंतिम असर यात्रियों और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। हालांकि, सरकारी अधिकारियों की ओर से यह संकेत दिया गया था कि अगर नियमों में कोई बदलाव किया जाता है तो उसके साथ पर्याप्त सुरक्षा उपाय भी लागू किए जाएंगे।
सरकारी पक्ष से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, एयरपोर्ट और एयरलाइन कारोबार के बीच स्पष्ट परिचालन अलगाव बनाए रखना जरूरी होगा। इसके अलावा व्यावसायिक रूप से संवेदनशील जानकारी साझा करने और दोनों कारोबारों के लिए एक समान प्रबंधन व्यवस्था पर भी प्रतिबंध जैसे उपाय किए जा सकते हैं।इन उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी एयरपोर्ट ऑपरेटर को अपनी एयरलाइन या उससे जुड़ी कंपनियों को अनुचित व्यावसायिक लाभ न मिले।










