भारत और एशिया के सबसे बड़े उद्योगपतियों में शामिल गौतम अडानी ने एल्युमीनियम सेक्टर में उतरने का बड़ा ऐलान किया है। इस दिशा में उन्होंने अबू धाबी के निवेश समूह IHC के साथ 11.5 अरब डॉलर का संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) स्थापित किया है।
बिजनेस न्यूज़: भारत के तेजी से बढ़ते एल्युमीनियम उद्योग में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल अडानी ग्रुप ने एल्युमीनियम सेक्टर में प्रवेश की घोषणा की है। इस कदम के साथ ही बाजार में पहले से मजबूत स्थिति में मौजूद वेदांता ग्रुप और आदित्य बिड़ला ग्रुप की हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के सामने नई प्रतिस्पर्धा खड़ी हो सकती है।
अडानी ग्रुप ने अबू धाबी स्थित निवेश समूह IHC (International Holding Company) के साथ मिलकर लगभग 11.5 अरब डॉलर के संयुक्त निवेश वाले वेंचर की शुरुआत की है। यह निवेश भारत के एल्युमीनियम उद्योग को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।
भारत में एल्युमीनियम बाजार का मौजूदा परिदृश्य
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एल्युमीनियम उत्पादक देश है, लेकिन इसके बावजूद घरेलू मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भरता बनी हुई है। यही कारण है कि यह सेक्टर निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक माना जाता है। वर्तमान में देश के एल्युमीनियम उत्पादन में लगभग 90% हिस्सेदारी वेदांता और हिंडाल्को की है। इसके अलावा सरकारी क्षेत्र की कंपनी नालको (NALCO) भी उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रमुख कंपनियों की क्षमता:
- वेदांता ग्रुप: लगभग 2.4 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता, जिसे 2028 तक 3.1 मिलियन टन तक बढ़ाने की योजना
- हिंडाल्को इंडस्ट्रीज: करीब 1.34 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन क्षमता, ओडिशा में ₹21,000 करोड़ के निवेश से विस्तार जारी
- नालको: सरकारी क्षेत्र की प्रमुख एल्युमीनियम उत्पादक कंपनी
बढ़ती मांग बना रही है बड़ा अवसर
भारत में एल्युमीनियम की खपत लगातार बढ़ रही है। पिछले वर्ष देश का कुल उत्पादन लगभग 4.2 मिलियन टन रहा, जबकि खपत 5.5 मिलियन टन तक पहुंच गई। इस अंतर के कारण भारत एल्युमीनियम का शुद्ध आयातक (Net Importer) बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में प्रति व्यक्ति एल्युमीनियम खपत अभी केवल 3.4 से 3.9 किलोग्राम है, जबकि वैश्विक औसत 8 से 12 किलोग्राम के बीच है। इससे स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में मांग में बड़ा उछाल संभव है।
अनुमान है कि वर्ष 2047 तक भारत में एल्युमीनियम की खपत 28 मिलियन टन तक पहुंच सकती है, खासकर ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लीन एनर्जी सेक्टर की बढ़ती जरूरतों के चलते।

अडानी ग्रुप की बड़ी योजना
अडानी ग्रुप और IHC का संयुक्त प्रोजेक्ट भारत के एल्युमीनियम उद्योग में गेम-चेंजर साबित हो सकता है। कंपनी ओडिशा में एक विशाल एकीकृत एल्युमीनियम परिसर विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित परियोजना में शामिल हैं:
- 2 मिलियन टन से अधिक वार्षिक क्षमता वाला एल्युमीनियम स्मेल्टर
- 4 मिलियन टन एल्युमिना रिफाइनरी
- 4 गीगावॉट का कैप्टिव पावर प्लांट
- 1 मिलियन टन क्षमता वाला डाउनस्ट्रीम एल्युमीनियम पार्क
यह पूरी परियोजना दो चरणों में विकसित की जाएगी। पहले चरण में लगभग ₹66,000 करोड़ और दूसरे चरण में लगभग ₹44,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। कुल मिलाकर यह प्रोजेक्ट भारत की मौजूदा एल्युमीनियम उत्पादन क्षमता में लगभग 50% तक की वृद्धि कर सकता है।












