Adhik Maas Tulsi Puja Vidhi: जानें तुलसी पूजा के सही नियम और शुभ उपाय

Adhik Maas में तुलसी पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। जानें सही पूजा विधि, दीपदान, परिक्रमा और जरूरी नियम।

अधिक मास में भगवान विष्णु के साथ तुलसी पूजा का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान नियमपूर्वक तुलसी पूजन, दीपदान और परिक्रमा करने से सुख-समृद्धि और पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

 Adhik Maas Tulsi Puja Vidhi: हिंदू धर्म में अधिक मास को पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने भगवान विष्णु की आराधना के साथ तुलसी पूजा करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि सही विधि और नियमों के साथ तुलसी पूजन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

अधिक मास में क्यों खास मानी जाती है तुलसी पूजा

हिंदू धर्म में अधिक मास को भगवान विष्णु की आराधना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। इस माह को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का कई गुना अधिक फल मिलता है। चूंकि तुलसी जी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए अधिक मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि पूरे महीने श्रद्धा से तुलसी पूजन करने पर घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

तुलसी पूजा की सही विधि क्या है

अधिक मास में रोज सुबह स्नान के बाद साफ और पवित्र वस्त्र धारण करें। इसके बाद तांबे या पीतल के लोटे में जल लें और उसमें थोड़ा गंगाजल तथा कच्चा दूध मिलाएं। फिर तुलसी के पौधे की जड़ में ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते हुए जल अर्पित करें।

जल चढ़ाने के बाद तुलसी माता को हल्दी, चंदन और कुमकुम का तिलक लगाएं। पूजा के दौरान पीले फूल और सुहाग की सामग्री भी अर्पित की जा सकती है। शाम के समय तुलसी के पास घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि दीपक सीधे जमीन पर न रखें, उसके नीचे अक्षत या फूल की पंखुड़ियां जरूर रखें। पूजा के अंत में तुलसी जी की आरती करें और कम से कम तीन, पांच या ग्यारह परिक्रमा करें।

अधिक मास में किन नियमों का रखना चाहिए ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार, एकादशी और द्वादशी के दिन तुलसी में जल अर्पित नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि इन दिनों तुलसी माता भगवान विष्णु के लिए व्रत रखती हैं। इसके अलावा रविवार और एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से भी बचना चाहिए। सूर्यास्त के बाद तुलसी दल तोड़ना शुभ नहीं माना जाता।

तुलसी के पौधे के आसपास साफ-सफाई बनाए रखना भी जरूरी माना गया है। वहां जूते-चप्पल, झाड़ू या कूड़ेदान जैसी चीजें नहीं रखनी चाहिए। साथ ही हमेशा शुद्ध जल ही अर्पित करें और गंदे हाथों से तुलसी के पौधे को स्पर्श करने से बचें।

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