मुंबई में शरद पवार ने कहा कि देश के सम्मान और विदेश नीति पर राजनीतिक मतभेद नहीं होने चाहिए। उन्होंने पीएम मोदी की अंतरराष्ट्रीय भूमिका की सराहना की और कहा कि राष्ट्रीय हित हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर होना चाहिए।
मुंबई: महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भले ही उनकी राजनीतिक विचारधारा प्रधानमंत्री से अलग हो, लेकिन यह स्वीकार करना चाहिए कि प्रधानमंत्री के रूप में वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
पवार के इस बयान को राजनीतिक गलियारों में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राष्ट्रीय हित और देश का सम्मान राजनीतिक मतभेदों से ऊपर होना चाहिए।
पुणे में कार्यक्रम के दौरान दिया बयान
शरद पवार मंगलवार को पुणे में लक्ष्मणराव गुट्टे रूरल डेवलपमेंट फाउंडेशन द्वारा आयोजित पूर्व राज्य और जिला पदाधिकारियों के सम्मान समारोह में शामिल हुए थे। इसी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने यह टिप्पणी की।
अपने संबोधन में पवार ने कहा कि जब भी देश के हित में सामूहिक प्रयास का अवसर मिले, तब सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को एक साझा उद्देश्य के साथ आगे आना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय सम्मान और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर एकजुटता आवश्यक है।
पीएम मोदी की अंतरराष्ट्रीय भूमिका की प्रशंसा
पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रियता और भारत की छवि को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंचों पर भारत की प्रतिष्ठा को बनाए रखने में प्रधानमंत्री की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचार रखना स्वाभाविक है, लेकिन राष्ट्रीय हित से जुड़े मामलों में राजनीतिक मतभेदों को पीछे रखना चाहिए। पवार के अनुसार, देश की छवि और सम्मान किसी भी दलगत राजनीति से ऊपर है।
राजनीतिक मतभेदों से ऊपर राष्ट्रीय हित
अपने भाषण में पवार ने एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि लोकतंत्र में असहमति और बहस जरूरी है, लेकिन जब बात देश की प्रतिष्ठा और हित की हो, तो सभी को एक साथ खड़ा होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों का उद्देश्य अलग हो सकता है, लेकिन राष्ट्र की गरिमा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे मुद्दों पर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को पीछे छोड़ देना चाहिए।

नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी तक का किया जिक्र
अपने संबोधन में शरद पवार ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़े कई पुराने अनुभव भी साझा किए।
नेहरू से मुलाकात का किस्सा
पवार ने बताया कि 1958 में 18 वर्ष की उम्र में वे Baramati से Pune आए थे, क्योंकि उनके शहर में उस समय कॉलेज नहीं था। उन्होंने बताया कि उन्होंने युवा आंदोलन से राजनीति की शुरुआत की और धीरे-धीरे संगठनात्मक राजनीति में आगे बढ़े।
उन्होंने याद किया कि जब वे तीन मूर्ति भवन में जवाहरलाल नेहरू से मिले थे, तब उन्होंने किसानों और युवाओं से जुड़े कई सवाल तैयार किए थे, लेकिन नेहरू के प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण वे अपने सवाल पूछना ही भूल गए।
इंदिरा गांधी से जुड़ा अनुभव
पवार ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ जुड़ा एक किस्सा भी साझा किया। उन्होंने कहा कि सोवियत संघ की एक आधिकारिक यात्रा के दौरान इंदिरा गांधी ने भारत के प्रधानमंत्री के सम्मान को लेकर कड़ा रुख अपनाया था।
पवार के अनुसार, इंदिरा गांधी ने स्पष्ट कहा था कि भारत जैसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री का सम्मान आवश्यक है और इसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
2022 में भी पीएम मोदी की कर चुके हैं सराहना
यह पहली बार नहीं है जब शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली की तारीफ की हो। वर्ष 2022 में भी उन्होंने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री की प्रशासनिक क्षमता की सराहना की थी।
उस समय पवार ने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली में निर्णय लेने की क्षमता और उसे पूरा कराने की दृढ़ता दिखाई देती है। उन्होंने यह भी कहा था कि मोदी किसी भी कार्य को शुरू करने के बाद उसे निष्कर्ष तक पहुंचाने पर जोर देते हैं।
राजनीतिक हलकों में चर्चा
पवार के ताजा बयान को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे विपक्ष के प्रमुख नेताओं में से एक हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की सार्वजनिक सराहना और राष्ट्रीय हित पर उनकी टिप्पणी ने विभिन्न राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान आकर्षित किया है।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक सोच और विचारधारा प्रधानमंत्री से अलग है, लेकिन राष्ट्रीय सम्मान और विदेश नीति जैसे विषयों पर एक साझा दृष्टिकोण आवश्यक है।










