आगरा पुलिस पर 14 लाख के जेवर हड़पने का आरोप, ठगी के आरोपित जेल भेजे बरामदगी में नकली माल दिखाने की शिकायत

आगरा में सर्राफ ने ट्रांस यमुना पुलिस पर 14 लाख के सोने के जेवर हड़पने और बरामदगी में नकली माल दिखाने का आरोप लगाया है। डीसीपी स्तर से जांच शुरू हुई।
आगरा पुलिस पर 14 लाख के जेवर हड़पने का आरोप, ठगी के आरोपित जेल भेजे बरामदगी में नकली माल दिखाने की शिकायत
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आगरा में ठगी के एक मामले की जांच के दौरान पुलिस पर ही करीब 14 लाख रुपये के सोने के जेवर हड़पने का गंभीर आरोप लगा है। ताजगंज क्षेत्र के सर्राफ सुनील कुमार ने ट्रांस यमुना थाने की पुलिस पर आरोप लगाया कि ठगी के आरोपितों से पुलिस ने उसके करीब 114 ग्राम सोने के जेवर बरामद किए थे, लेकिन बाद में असली सोने की जगह नकली आभूषण बरामदगी में दिखा दिए गए। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।

सर्राफ के मुताबिक, 19 अगस्त को उनके परिचित राजामंडी निवासी संजय वर्मा ने उन्हें सोने के जेवर दिखाने के लिए शाहदरा स्थित एक दुकान पर बुलाया था। सुनील अपने साथ करीब 114 ग्राम सोने की आठ चूड़ियां और एक ब्रेसलेट लेकर पहुंचे थे। वहां ननुआ उर्फ लियाकत और इमरान नाम के दो लोगों ने जेवरों के बदले रुपये देने की बात कही। इसके बाद जेवरों की जांच कराने के नाम पर दोनों उन्हें लेकर चले गए। काफी देर तक वापस नहीं लौटने और मोबाइल बंद मिलने के बाद सर्राफ को ठगी का शक हुआ। उन्होंने पुलिस को सूचना दी।

शिकायत के बाद पुलिस ने संजय वर्मा और इमरान को पकड़ लिया। इसके बाद सादाबाद में दबिश देकर लियाकत उर्फ ननुआ को भी पकड़े जाने की बात सामने आई है। सर्राफ का दावा है कि पुलिस ने आरोपितों से पूरा सोना बरामद कर लिया था। उन्होंने पुलिस को जेवरों की तस्वीरें भी उपलब्ध कराई थीं और बरामद सामान का फोटो से मिलान भी कराया गया था। उनके अनुसार, उस समय पुलिस ने उन्हें बताया था कि उनका पूरा माल बरामद हो गया है।

सर्राफ का आरोप है कि बरामदगी के बाद मामले का रुख बदल गया। उनका कहना है कि एक दरोगा ने उनसे तहरीर लिखवाई और जीएसटी जांच का डर दिखाते हुए तहरीर में पूरा माल दर्ज नहीं करने को कहा। आरोप है कि उन्हें सिर्फ एक जोड़ी चूड़ी का उल्लेख करने के लिए कहा गया। सर्राफ के अनुसार, उन्होंने पुलिस की बात मानकर तहरीर दे दी, क्योंकि उन्हें भरोसा था कि बरामद किए गए उनके सभी जेवर बाद में वापस मिल जाएंगे।

सुनील का कहना है कि पुलिस ने बरामदगी का सामान उन्हें उसी समय नहीं दिखाया और अगले दिन थाने बुलाया गया। वहां उन्हें कथित तौर पर बताया गया कि सिर्फ एक जोड़ी चूड़ी बरामद हुई है। जब उन्हें बरामद सामान दिखाया गया तो उन्होंने उसे अपना माल नहीं माना। उनका आरोप है कि करीब 14 लाख रुपये कीमत के असली सोने के जेवरों की जगह बेहद कम कीमत का नकली सामान सील कर बरामदगी के कागजों में दर्ज किया गया।

पुलिस की कार्रवाई में तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। सर्राफ के अनुसार, आरोपितों से पूछताछ और बरामदगी के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया। इसके बाद जब सर्राफ ने अपने स्तर पर आरोपितों और उनके परिवार से संपर्क किया तो उसे बरामदगी को लेकर अलग जानकारी मिली। यही वजह है कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और अपना वास्तविक सोना वापस दिलाने की मांग की।

सर्राफ ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस जब लियाकत के घर पहुंची तो वहां रखे जेवरात के साथ नकदी भी अपने कब्जे में ली गई। उनके मुताबिक, लियाकत और उसके स्वजन ने बताया कि पुलिस ने घर को घेरकर अलमारी में रखे जेवर बरामद किए थे। एक रिपोर्ट में आरोपित पक्ष की ओर से करीब पांच हजार रुपये पुलिस द्वारा ले जाने का आरोप भी सामने आया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

मामला सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने भी शिकायत को गंभीरता से लिया है। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास के अनुसार, पुलिस पर जेवर बदलने के आरोप लगाए गए हैं और मामले की जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि साक्ष्य जुटाने के बाद यदि कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का यह भी कहना है कि बरामदगी से जुड़े दस्तावेजों में शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर मौजूद हैं, इसलिए जांच के दौरान सभी संबंधित दस्तावेजों और साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा।

अब जांच में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि 19 अगस्त को पुलिस ने आरोपितों से वास्तव में क्या बरामद किया था। इसके लिए बरामदगी की प्रक्रिया, आरोपितों के बयान, पुलिस रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, जेवरों की तस्वीरें और सर्राफ द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों का मिलान किया जा सकता है। इसके अलावा बरामद सामान की गुणवत्ता और उसकी वास्तविक कीमत की जांच भी मामले में अहम होगी।

सर्राफ का दावा है कि उनके पास जेवरों के फोटो और अन्य विवरण मौजूद हैं। यदि जांच में इन दस्तावेजों से बरामदगी वाले सामान का मिलान होता है तो इससे पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं पुलिस की ओर से बरामदगी की फर्द और अन्य केस डायरी से जुड़े दस्तावेज भी जांच का हिस्सा होंगे। फिलहाल किसी पुलिसकर्मी के खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं हुआ है और जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बरामदगी में वास्तव में कोई गड़बड़ी हुई थी या नहीं।

इस मामले ने पुलिस द्वारा की जाने वाली बरामदगी और उसके दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। किसी भी आपराधिक मामले में बरामद सामान की पहचान, वजन, कीमत और सीलिंग की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। खासकर सोने जैसे कीमती सामान के मामले में उसकी फोटो, वजन, पहचान संबंधी विवरण और बरामदगी के समय मौजूद गवाहों का रिकॉर्ड जांच में अहम भूमिका निभाता है।

फिलहाल आगरा पुलिस ने शिकायत की जांच शुरू कर दी है। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर यह तय होगा कि सर्राफ के आरोपों में कितनी सच्चाई है और बरामदगी के दौरान किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विभागीय या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। वहीं जांच में आरोप पुष्ट नहीं होने पर उसकी स्थिति भी स्पष्ट की जाएगी।

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