अग्रिम जमानत को लेकर बड़ा फैसला? सुप्रीम कोर्ट करेगा तीन जजों की बेंच से सुनवाई

अग्रिम जमानत को लेकर बड़ा फैसला? सुप्रीम कोर्ट करेगा तीन जजों की बेंच से सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट अब एक महत्वपूर्ण कानूनी सवाल पर सुनवाई करने जा रहा है: क्या हाई कोर्ट सीधे अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अर्जी सुन सकता है, बिना पहले सेशन कोर्ट का दरवाजा खटखटाए? इस मसले पर अब सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच विचार करेगी।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच अब इस कानूनी मसले पर विचार करेगी कि क्या हाई कोर्ट सीधे अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की याचिकाओं पर सुनवाई कर सकता है, जब मामला पहले सेशन कोर्ट में नहीं गया हो। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले को तीन जजों की बेंच को रेफर कर दिया है। 

मुख्य सवाल यह है कि क्या हाई कोर्ट को यह अधिकार है कि वह सीधे अग्रिम जमानत की अर्जी पर निर्णय ले सके, बिना यह देखे कि मामला पहले सेशन कोर्ट में दाखिल हुआ है या नहीं। इस फैसले का भविष्य में अग्रिम जमानत की प्रक्रियाओं पर गहरा असर पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ, जिनमें जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता शामिल थे, ने बुधवार को इस मामले को तीन जजों की बेंच के सामने रखने का आदेश दिया। यह मुद्दा मोहम्मद रसाल बनाम केरल राज्य के मामले में उठाया गया था, जिसमें केरल हाई कोर्ट द्वारा सीधे अग्रिम जमानत याचिकाओं को स्वीकार करने की प्रथा पर सवाल उठाया गया था। 

पीठ ने यह भी कहा कि सीआरपीसी की धारा 438 (जो अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 482 में समाहित है) हाई कोर्ट और सेशन कोर्ट दोनों को समान अधिकार देती है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह सुझाव दिया कि अग्रिम जमानत की अर्जी सामान्यतः पहले सेशन कोर्ट में दायर की जानी चाहिए, और केवल असाधारण परिस्थितियों में ही सीधे हाई कोर्ट को ही सुनवाई करनी चाहिए।

सीआरपीसी और हाई कोर्ट का अधिकार

सीआरपीसी की धारा 438 के अनुसार, कोर्ट को आरोपी को गिरफ्तारी से पहले जमानत देने का अधिकार है। इसके तहत हाई कोर्ट और सेशन कोर्ट को समान अधिकार प्राप्त हैं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि सीधे हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दायर करना केवल विशेष परिस्थितियों में ही उचित होगा। इससे अदालतों में मामलों की जटिलताओं और प्रक्रियागत विवाद को कम करने की कोशिश की जा रही है।

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा को एमिकस क्यूरी (amicus curiae) के रूप में नियुक्त किया। लूथरा ने पिछले महीने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट को सीधे अग्रिम जमानत याचिकाएं केवल चार असाधारण परिस्थितियों में सुननी चाहिए। बुधवार को लूथरा ने सुझाव दिया कि यह मामला तीन जजों की बेंच को भेजा जाए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे तीन जजों की बेंच के पास भेजने का आदेश दे दिया।

 

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