AI और क्लाउड के दौर में भारत में साइबर सुरक्षा टैलेंट की कमी

भारत में 70% से ज्यादा कंपनियां साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ नहीं ढूंढ पा रहीं। AI और क्लाउड के बढ़ते उपयोग से स्किल्ड प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है।

भारत में साइबर सुरक्षा पेशेवरों की भारी कमी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार 70% से अधिक कंपनियां योग्य प्रतिभा नहीं ढूंढ पा रहीं, जबकि AI और क्लाउड तकनीकों के बढ़ते उपयोग से कुशल विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

New Delhi: Cybersecurity skills shortage in India अब एक गंभीर चुनौती बनकर उभर रही है, जहां Data Security Council of India और SANS Institute की रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश कंपनियां योग्य पेशेवरों की कमी से जूझ रही हैं। तेजी से बढ़ती AI और क्लाउड तकनीकों के बीच उद्योग की जरूरतों और उम्मीदवारों की कौशल क्षमता में बड़ा अंतर सामने आया है, जिससे भर्ती और डेटा सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

भारत में साइबर सिक्योरिटी टैलेंट की भारी कमी, AI और क्लाउड बढ़ा रहे मांग का दबाव

नई दिल्ली। डिजिटल इकोनॉमी के तेजी से विस्तार के बीच साइबर सिक्योरिटी अब सबसे अहम क्षेत्रों में शामिल हो गई है, लेकिन भारत में कुशल पेशेवरों की कमी एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। Data Security Council of India और SANS Institute की रिपोर्ट के अनुसार, 73 प्रतिशत कंपनियां और 68 प्रतिशत सर्विस प्रोवाइडर्स योग्य साइबर सिक्योरिटी टैलेंट की कमी से जूझ रहे हैं।

रिपोर्ट ‘Indian Cyber Security Skilling Landscape 2025–26’ बताती है कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की गति और वर्कफोर्स की तैयारी के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है, जिससे इंडस्ट्री में भर्ती और स्किलिंग दोनों स्तरों पर दबाव बढ़ रहा है।

भर्ती में देरी और स्किल गैप बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के मुताबिक, 84 प्रतिशत कंपनियों को साइबर सिक्योरिटी से जुड़े पद भरने में एक से छह महीने तक का समय लग रहा है। इससे स्पष्ट है कि योग्य उम्मीदवारों की उपलब्धता सीमित है और कंपनियों को लंबे समय तक पद खाली रखने पड़ रहे हैं।

सबसे बड़ी समस्या उम्मीदवारों के स्किल सेट को लेकर सामने आई है। करीब 63 प्रतिशत कंपनियों और 59 प्रतिशत सर्विस प्रोवाइडर्स का मानना है कि उम्मीदवारों में प्रैक्टिकल अनुभव की कमी है। वहीं, 58 से 60 प्रतिशत संगठनों को क्लाउड, एप्लिकेशन और पहचान (identity) सिस्टम्स में क्रॉस-डोमेन विशेषज्ञता वाले पेशेवर नहीं मिल रहे हैं।

AI और GenAI ने बढ़ाई विशेषज्ञों की मांग

रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जेनरेटिव AI अब साइबर सिक्योरिटी की मांग को और तेज कर रहे हैं। करीब 83 प्रतिशत संगठनों ने AI सिक्योरिटी स्किल्स को महत्वपूर्ण बताया है, जबकि 78 प्रतिशत को AI सिक्योरिटी इंजीनियरों की जरूरत है।

वर्तमान में 62 प्रतिशत कंपनियां AI और GenAI प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं, जिससे साइबर हमलों का खतरा और जटिल हो गया है। इसके चलते एडवांस्ड सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है।

खास भूमिकाओं में भारी कमी

रिपोर्ट के अनुसार, सिक्योरिटी आर्किटेक्ट, OT/ICS सिक्योरिटी स्पेशलिस्ट और एडवांस्ड थ्रेट इंटेलिजेंस एक्सपर्ट जैसे पदों पर भर्ती सबसे कठिन साबित हो रही है। लगभग 40 प्रतिशत कंपनियों और आधे सर्विस प्रोवाइडर्स ने इन भूमिकाओं को भरने में गंभीर चुनौतियों की बात कही है।

इसके अलावा, बेहतर वेतन के कारण टैलेंट का पलायन भी बड़ी समस्या बन रहा है। करीब 70 प्रतिशत सर्विस प्रोवाइडर्स और 42 प्रतिशत कंपनियां कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धियों के पास खो रही हैं।

स्किलिंग और ट्रेनिंग में सुधार की जरूरत

रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि मौजूदा स्थिति को सुधारने के लिए ट्रेनिंग सिस्टम और इंडस्ट्री की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। साथ ही, लगातार अपस्किलिंग और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर जोर देना होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर सिक्योरिटी अब केवल तकनीकी जरूरत नहीं, बल्कि डिजिटल भरोसे और डेटा सुरक्षा का आधार बन चुकी है। ऐसे में कुशल पेशेवरों की कमी को दूर करना भारत के डिजिटल भविष्य के लिए बेहद अहम होगा।

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