भारत रक्षा और एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया जा रहा स्वदेशी अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल (UCAV) Ghatak UCAV अब अपने अंतिम विकास चरण की ओर बढ़ रहा है।
नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना को जल्द ही स्वदेशी तकनीक से विकसित स्टील्थ ड्रोन मिल सकते हैं, जिन्हें अत्याधुनिक लड़ाकू क्षमताओं के साथ तैयार किया जा रहा है। Defence Research and Development Organisation के चेयरमैन डॉ. Samir V. Kamat ने हाल ही में एक कार्यक्रम में बताया कि भारत “घातक” अनमैन्ड कॉम्बैट एरियल व्हीकल (UCAV) यानी स्टील्थ ड्रोन तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है।
इन स्वदेशी ड्रोन की खास बात यह होगी कि इन्हें रडार से पकड़ना बेहद मुश्किल होगा और ये दुश्मन क्षेत्र में लंबी दूरी तक मिशन को अंजाम देने में सक्षम होंगे।
तेजस जैसा आकार, स्टील्थ फाइटर जैसी क्षमता
DRDO चेयरमैन के मुताबिक यह UCAV आकार और वजन में हल्के लड़ाकू विमान HAL Tejas के बराबर होगा। इसका वजन लगभग 13 टन श्रेणी में रखा गया है, जिससे यह आधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट्स के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम होगा। यह पूरी तरह मानव रहित प्लेटफॉर्म है, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के रडार सिस्टम से बचते हुए लंबी दूरी तक गहराई में जाकर हमला कर सके।
Ghatak UCAV की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वदेशी इंजन होगा। इसे कावेरी इंजन के डेरिवेटिव वर्जन से शक्ति मिलेगी, जिसे भारत में ही विकसित किया जा रहा है। यह इंजन लगभग 49 kN थ्रस्ट क्षमता प्रदान करने में सक्षम होगा, जिससे ड्रोन को बेहतर ईंधन दक्षता और लंबी उड़ान क्षमता मिलेगी। अनुमान है कि यह UCAV लगभग 8 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकेगा।
स्टील्थ डिजाइन: दुश्मन के रडार से अदृश्य

इस ड्रोन को पूरी तरह स्टील्थ तकनीक के आधार पर डिजाइन किया गया है। इसका बाहरी ढांचा रडार सिग्नेचर को कम करने के लिए तैयार किया गया है, जिससे यह दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम से बच सके। इसमें हथियारों को बाहरी हिस्से में नहीं, बल्कि दो इंटरनल वेपन बे (internal weapon bays) में रखा जाएगा। इससे इसकी स्टील्थ क्षमता और मजबूत होगी।
Ghatak UCAV लगभग 1.5 टन तक का पेलोड ले जाने में सक्षम होगा। इसमें स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन (SAAW), प्रिसिजन गाइडेड बम और अन्य आधुनिक हथियार शामिल हो सकते हैं। यह क्षमता इसे गहरे दुश्मन क्षेत्र में जाकर सटीक और घातक हमले करने में सक्षम बनाती है।
1000 किलोमीटर तक स्ट्राइक क्षमता
रिपोर्ट्स के अनुसार यह UCAV लगभग 1000 किलोमीटर तक दुश्मन क्षेत्र में घुसकर ऑपरेशन करने में सक्षम होगा। यह बिना पायलट के जोखिम के जटिल सैन्य मिशनों को अंजाम दे सकता है। DRDO का मानना है कि यह तकनीक भारत की एयर पावर को एक नए स्तर पर ले जाएगी।
इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम को हाल ही में रक्षा खरीद परिषद (DPC) से लगभग ₹39,000 करोड़ की मंजूरी मिली है। इससे इसके विकास और उत्पादन प्रक्रिया को तेज गति मिलने की उम्मीद है।











