UCC पर NDA में मतभेद, TDP-शिवसेना और HAM समर्थन में; JDU का बिहार में विरोध

UCC पर NDA सहयोगियों के अलग-अलग रुख सामने आए। TDP, शिवसेना और HAM समर्थन में हैं, जबकि JDU ने बिहार में समान नागरिक संहिता लागू नहीं होने देने की बात कही।

समान नागरिक संहिता को लेकर NDA में अलग-अलग रुख सामने आए हैं। TDP, शिंदे गुट की शिवसेना और HAM ने UCC का समर्थन किया है, जबकि JDU ने राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन के बावजूद बिहार में इसे लागू नहीं होने देने की बात कही है।

नई दिल्ली: समान नागरिक संहिता यानी Uniform Civil Code (UCC) को लेकर NDA के भीतर अलग-अलग रुख सामने आने लगे हैं। NDA के तीन सहयोगी दलों—तेलुगु देशम पार्टी (TDP), शिंदे गुट की शिवसेना और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर)—ने UCC के समर्थन की बात कही है। वहीं, जनता दल (यूनाइटेड) यानी JDU ने स्पष्ट किया है कि वह बिहार में UCC लागू नहीं होने देगा। यह स्थिति केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान के बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने 13 सितंबर को कहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP-NDA शासित 21 राज्यों में UCC लागू कर दिया जाएगा।

2029 तक 21 राज्यों में UCC लागू करने का लक्ष्य

अमित शाह के बयान के अनुसार, 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP और NDA द्वारा शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

दिए गए विवरण के मुताबिक, फिलहाल देश में 22 राज्यों में NDA की सरकार है। इनमें उत्तराखंड में जनवरी 2025 से UCC लागू है। इस लिहाज से बाकी 21 राज्यों में इसे लागू करने का लक्ष्य बताया गया है।

UCC का उद्देश्य नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और अन्य व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। हालांकि, इसके स्वरूप और लागू होने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक तथा सामाजिक स्तर पर अलग-अलग मत मौजूद हैं।

गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में प्रस्ताव पारित

दिए गए विवरण के अनुसार, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में UCC लागू करने का प्रस्ताव विधानसभा से पारित हो चुका है।

अब इन राज्यों में आगे की प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना जारी होने का इंतजार बताया गया है। किसी राज्य में कानून को लागू करने के लिए विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यक संवैधानिक और प्रशासनिक औपचारिकताएं भी पूरी करनी होती हैं।

इसके अलावा महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ ने UCC से संबंधित कानून तैयार करने के लिए समितियां गठित की हैं।

TDP ने UCC को समर्थन देने की बात कही

लोकसभा में TDP के नेता लावू कृष्ण देवरायुलु ने कहा है कि उनकी पार्टी UCC का समर्थन करेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसे लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से बातचीत की जाएगी।

उन्होंने कहा कि फिलहाल इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई है। इस तरह TDP का समर्थन सामने आने के बावजूद पार्टी ने व्यापक विचार-विमर्श की जरूरत पर जोर दिया है।

यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि TDP और JDU पहले UCC से जुड़े कानून का विरोध कर चुके हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद TDP के NDA में शामिल होने से पहले चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि UCC के मुद्दे पर पार्टी मुस्लिम समुदाय के साथ खड़ी रहेगी।

JDU का बिहार में अलग रुख

NDA के भीतर UCC को लेकर सबसे स्पष्ट अलग रुख JDU की ओर से सामने आया है। JDU नेता श्याम रजक ने कहा कि पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर UCC का समर्थन करती है, लेकिन बिहार में इसे लागू नहीं होने देगी।

उन्होंने कहा कि JDU अपने इस रुख पर कायम है। इस मुद्दे को लेकर JDU नेता संजय झा के अमित शाह से मुलाकात करने की बात भी सामने आई है।

इस रुख से स्पष्ट है कि राष्ट्रीय स्तर पर UCC को लेकर समर्थन और बिहार में इसके कार्यान्वयन का विरोध—दोनों बातें JDU की मौजूदा स्थिति का हिस्सा हैं।

बंगाल में BJP ने प्रक्रिया जल्द शुरू करने की बात कही

पश्चिम बंगाल में भी UCC को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने के संकेत मिले हैं। बंगाल BJP अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा है कि राज्य में UCC लागू करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।

हालांकि, BJP की सहयोगी NCPI ने अभी इस मुद्दे पर अपना फैसला नहीं किया है। पार्टी की ओर से प्रस्ताव सामने आने के बाद इस पर चर्चा करने की बात कही गई है।

इससे पता चलता है कि NDA के अलग-अलग सहयोगी दलों के बीच UCC को लेकर समान रुख नहीं है और राज्यों के स्तर पर राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार दृष्टिकोण अलग हो सकता है।

शिवसेना ने UCC का समर्थन किया

महाराष्ट्र में शिंदे गुट की शिवसेना ने भी UCC के समर्थन में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पार्टी नेता श्रीकांत शिंदे ने समान नागरिक संहिता को समानता, न्याय और राष्ट्रीय एकता से जुड़ा विषय बताया और इसका समर्थन किया।

उनका रुख NDA के भीतर UCC के पक्ष में सामने आए समर्थन को और मजबूत करता है।

HAM भी समर्थन में

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) यानी HAM के अध्यक्ष संतोष कुमार सुमन ने भी अमित शाह के बयान का स्वागत किया है।

उन्होंने UCC के समर्थन की बात कही। इस तरह TDP, शिवसेना और HAM उन NDA सहयोगी दलों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने हालिया बयानबाजी में समान नागरिक संहिता के पक्ष में रुख जाहिर किया है।

केरल में मुस्लिम संस्था ने किया विरोध

दूसरी ओर, केरल की मुस्लिम संस्था समस्त केरल जेम-इयातुल उलमा UCC का विरोध कर रही है।

संस्था के अध्यक्ष मोहम्मद जिफ्री का कहना है कि केवल मुस्लिम ही नहीं, बल्कि ईसाई, बौद्ध और जैन समुदाय के लोग भी यूनिवर्सल सिविल कोड को स्वीकार नहीं कर पाएंगे।

उनके अनुसार, मुस्लिम समुदाय में विवाह, तलाक और विरासत जैसे विषय धार्मिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और इनके लिए निर्धारित नियमों का पालन किया जाता है।

क्या UCC सभी धर्मों पर लागू होगा?

UCC को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसके दायरे से जुड़ा है। इसका मूल उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करना बताया जाता है।

दिए गए विवरण के अनुसार, संविधान के तहत अनुसूचित जनजातियों को विशेष छूट मिल सकती है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों में प्रस्तावित या तैयार किए जा रहे कानूनों के प्रावधानों के आधार पर वास्तविक व्यवस्था स्पष्ट होगी।

क्या धार्मिक रीति-रिवाज खत्म हो जाएंगे?

UCC मुख्य रूप से नागरिक मामलों से संबंधित है। इसका सीधा उद्देश्य धार्मिक पूजा-पद्धति या आस्था को नियंत्रित करना नहीं है।

विवाह, तलाक और विरासत जैसे नागरिक मामलों के लिए समान कानूनी व्यवस्था बनाने और धार्मिक आस्था तथा पूजा-पद्धति के बीच अंतर करना इस बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

राज्य में UCC लागू कैसे होगा?

किसी राज्य में UCC लागू करने के लिए विधायी और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके तहत विधेयक विधानसभा से पारित होने के बाद राज्यपाल की मंजूरी और फिर आवश्यक अधिसूचना जारी होने के बाद कानून प्रभावी होगा।

फिलहाल UCC को लेकर NDA के भीतर समर्थन और विरोध दोनों तरह के स्वर सामने आ रहे हैं। जहां कुछ सहयोगी दल इसे समानता और राष्ट्रीय एकता से जोड़कर समर्थन कर रहे हैं, वहीं JDU ने बिहार में इसके कार्यान्वयन का विरोध किया है।

आने वाले समय में राज्यों की समितियों, विधानसभा प्रक्रियाओं और केंद्र तथा राज्य सरकारों के फैसलों से यह स्पष्ट होगा कि UCC को कितने राज्यों में और किस स्वरूप में लागू किया जाता है।

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