UCC Controversy: ओवैसी का अमित शाह पर हमला, बोले- ‘गलतफहमी भरे अहंकार’ का खामियाजा देश भुगत चुका है

UCC Controversy: असदुद्दीन ओवैसी ने समान नागरिक संहिता को लेकर अमित शाह पर निशाना साधा। उन्होंने ‘गलतफहमी भरे अहंकार’ का जिक्र करते हुए सरकार की नीति पर सवाल

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के 2029 से पहले सभी 21 एनडीए शासित राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के बयान पर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

नई दिल्ली: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के 2029 से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के बयान पर एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ओवैसी ने अमित शाह के बयान को लेकर बीजेपी और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने एनडीए के सहयोगी दलों से अपनी स्वतंत्र राजनीतिक भूमिका बनाए रखने की अपील भी की।

ओवैसी ने कहा कि बीजेपी के सहयोगियों को यह दिखाना चाहिए कि उनकी अपनी राजनीतिक आवाज है और वे केवल बीजेपी की लाइन पर चलने वाले दल नहीं हैं। उन्होंने अमित शाह के बयान को ‘गलतफहमी भरा अहंकार’ बताते हुए कहा कि देश पहले भी ऐसे राजनीतिक फैसलों के परिणाम देख चुका है।

UCC पर क्या बोले असदुद्दीन ओवैसी?

असदुद्दीन ओवैसी ने समान नागरिक संहिता को लेकर केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि भारत की पहचान उसकी विविधता और बहुलतावादी व्यवस्था से है। ओवैसी ने दावा किया कि UCC लागू करने का उद्देश्य समानता स्थापित करना नहीं, बल्कि गैर-हिंदू समुदायों पर हिंदू कानून लागू करना होगा।

उन्होंने बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकारों में लागू किए गए कुछ अन्य कानूनों का उदाहरण देते हुए भी सवाल उठाए। ओवैसी ने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों के कानूनों और नीतियों का असर विशेष रूप से मुस्लिम और ईसाई समुदायों पर पड़ता है। हालांकि, इन दावों को ओवैसी के राजनीतिक आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए।

ओवैसी ने यह भी कहा कि जिस विधि आयोग का गठन बीजेपी सरकार के दौरान हुआ था, उसने UCC को लेकर इसे तत्काल आवश्यक या वांछनीय नहीं माना था। उनके मुताबिक, भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में अलग-अलग समुदायों की सामाजिक और धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखना जरूरी है।

‘बीजेपी के सहयोगी अपनी स्वतंत्र आवाज दिखाएं’

ओवैसी ने एनडीए में शामिल क्षेत्रीय दलों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने उम्मीद जताई कि UCC जैसे मुद्दे पर बीजेपी के सहयोगी दल अपना अलग राजनीतिक रुख सामने रखेंगे। उनका कहना है कि सहयोगी दलों को यह साबित करना चाहिए कि वे अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान रखते हैं और केवल बीजेपी की छोटी सहयोगी इकाइयों की तरह काम नहीं करते। ओवैसी ने इस संदर्भ में पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

NRC और SIR को लेकर भी सरकार पर निशाना

ओवैसी ने UCC के अलावा NRC और SIR जैसे मुद्दों को लेकर भी केंद्र सरकार पर हमला बोला। उन्होंने नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों और सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। ओवैसी का दावा है कि ऐसी प्रक्रियाओं में गरीब, अल्पसंख्यक, एससी-एसटी और प्रवासी समुदायों के लोगों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने असम में NRC के अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर देशभर में नागरिकता साबित करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों को दस्तावेज पेश करने पड़ते हैं, तो इसका असर आम नागरिकों पर पड़ सकता है। ओवैसी ने सवाल उठाया कि जिन लोगों के पास जरूरी दस्तावेज नहीं हैं, उनके लिए ऐसी प्रक्रिया कितनी मुश्किल हो सकती है।

अमित शाह ने UCC पर क्या कहा?

दरअसल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान UCC को लेकर केंद्र सरकार की योजना स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा कि 2029 से पहले बीजेपी और एनडीए द्वारा शासित सभी 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू किया जाएगा। अमित शाह ने तीन तलाक को खत्म किए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया गया। 

उन्होंने यह भी कहा कि कई राज्यों में UCC की शुरुआत हो चुकी है और उन्हें विश्वास है कि 2029 से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में इसे लागू किया जा सकेगा।

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