भारत और वियतनाम की दोस्ती अब केवल कूटनीतिक बैठकों तक सीमित नहीं रहने वाली है। सोमवार को दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में मिलकर हथियारों के निर्माण, आपसी कारोबार बढ़ाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने समेत कई अहम फैसलों पर सहमति जताई।
नई दिल्ली: भारत और वियतनाम ने अपने रणनीतिक रिश्तों को नई दिशा देते हुए रक्षा, व्यापार, तकनीक और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वियतनाम के विदेश मंत्री ले होआई ट्रुंग के बीच हुई बैठक में दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों की आपूर्ति के साथ-साथ संयुक्त उत्पादन और तकनीक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। यह पहल ऐसे समय में हुई है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
भारत-वियतनाम संबंधों में अब पारंपरिक कूटनीतिक सहयोग के अलावा रक्षा उद्योग, सप्लाई चेन, डिजिटल तकनीक और आर्थिक साझेदारी को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन पर जोर
भारत और वियतनाम रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों पक्ष भारतीय रक्षा उपकरणों की आपूर्ति बढ़ाने के साथ-साथ कुछ रक्षा प्रणालियों के संयुक्त उत्पादन की संभावनाओं पर काम करेंगे। इसके अलावा सैन्य प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, तकनीक हस्तांतरण और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
दोनों देशों के बीच जल्द पहला विदेश-रक्षा 2+2 संवाद आयोजित करने पर सहमति बनी है। इस व्यवस्था में विदेश और रक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी रणनीतिक एवं सुरक्षा मुद्दों पर व्यापक चर्चा करेंगे।
2030 तक 25 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य

रक्षा सहयोग के साथ आर्थिक रिश्तों को मजबूत करना भी भारत-वियतनाम एजेंडे का प्रमुख हिस्सा है। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय कारोबार को 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए व्यापार से जुड़ी बाधाओं को कम करने, बाजार तक पहुंच आसान बनाने और निवेश के अवसर बढ़ाने पर काम किया जाएगा।
भारत ने विशेष रूप से वियतनाम के बाजार में भारतीय दवाइयों, कृषि उत्पादों और समुद्री उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने से कंपनियों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं और क्षेत्रीय सप्लाई चेन में सहयोग को भी गति मिल सकती है।
कनेक्टिविटी और सीधी उड़ानों पर फोकस
भारत और वियतनाम ने लोगों और कारोबार के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए कनेक्टिविटी को भी प्राथमिकता दी है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की संख्या बढ़ाने पर चर्चा हुई है। इसके साथ ही सड़क, रेल और बंदरगाह संपर्क को मजबूत करने की दिशा में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा। बेहतर कनेक्टिविटी से पर्यटन, व्यापार, शिक्षा और निवेश के अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे दोनों देशों के कारोबारी समुदायों के बीच संपर्क भी आसान होगा।
भारत-वियतनाम साझेदारी अब उभरती तकनीकों तक भी विस्तार ले रही है। दोनों पक्षों ने परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, डिजिटल तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इन क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाएं और विशेषज्ञों के बीच आदान-प्रदान दोनों देशों की तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर सकते हैं। सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने को भी द्विपक्षीय रिश्तों का अहम हिस्सा बनाया गया है।
दक्षिण चीन सागर पर साझा रुख
भारत और वियतनाम की बढ़ती नजदीकी का रणनीतिक पहलू भी महत्वपूर्ण है। बैठक में दक्षिण चीन सागर और पश्चिम एशिया की स्थिति समेत क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने समुद्री विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन का समर्थन किया। विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के नियमों के अनुरूप समुद्री गतिविधियों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में वियतनाम को भारत की एक्ट ईस्ट नीति और व्यापक समुद्री दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण साझेदार माना जा रहा है।










