AI के बढ़ते इस्तेमाल से भारतीय IT सेक्टर दबाव में है। Motilal Oswal Financial Services की रिपोर्ट के अनुसार कम ग्रोथ उम्मीदों, गिरते शेयर और बदलते बिजनेस मॉडल से निवेशकों की चिंता बढ़ रही है।
Indian IT sector outlook: भारतीय आईटी सेक्टर लंबे समय से देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता रहा है, लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के तेज विकास ने इस सेक्टर के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हाल ही में Motilal Oswal Financial Services की एक विस्तृत रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें यह समझाने की कोशिश की गई है कि बाजार भारतीय आईटी कंपनियों को लेकर क्या सोच रहा है और आने वाले वर्षों में इस सेक्टर के सामने कौन सी बड़ी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
IT सेक्टर में लगातार गिरावट
Indian IT sector outlook फिलहाल दबाव में नजर आ रहा है। Nifty IT Index साल 2026 में अब तक करीब 15 प्रतिशत टूट चुका है। यह गिरावट साल 2025 में आई 12.6 प्रतिशत की गिरावट से भी ज्यादा है। लगातार दूसरे साल आई कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
फरवरी महीने में आई हालिया गिरावट के बाद आईटी सेक्टर की 10 प्रमुख कंपनियों का कुल मार्केट कैप 50 अरब डॉलर से अधिक घट गया। भारतीय शेयर बाजार में आईटी शेयरों की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत है। यही वजह है कि जब इस सेक्टर में कमजोरी आती है, तो उसका असर निफ्टी और सेंसेक्स जैसे बड़े इंडेक्स पर साफ दिखाई देता है।
AI से बदलता बिजनेस मॉडल
जानकारों का मानना है कि निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि भारतीय आईटी कंपनियां आने वाले समय में अपनी कमाई और प्रोडक्टिविटी को बनाए रख पाएंगी या नहीं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण कई काम ऑटोमेट हो सकते हैं और प्रोजेक्ट पहले के मुकाबले कम समय में पूरे किए जा सकते हैं।
यह बदलाव भारतीय आईटी कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। अब तक कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा मैनपावर पर आधारित सेवाओं से आता रहा है। अगर AI के कारण कम लोगों में ज्यादा काम होने लगा, तो सर्विसेज की डिमांड पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती को लेकर उम्मीदें कमजोर पड़ने से भी निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। इन सभी कारणों ने मिलकर भारतीय आईटी शेयरों पर दबाव बढ़ा दिया है।
Global Tech कंपनियों की AI पहल से बढ़ी चिंता
इस महीने की शुरुआत में Amazon और Google के समर्थन वाली एक कंपनी ने नया AI आधारित टूल पेश किया। यह टूल कई तकनीकी काम अपने आप करने में सक्षम बताया गया है।
इसके बाद दुनियाभर के टेक्नोलॉजी शेयरों में दबाव देखने को मिला। साथ ही यह चिंता भी बढ़ी कि ऐसे टूल्स के आने से भारतीय आईटी कंपनियों की सर्विसेज की मांग पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
चार फरवरी से शुरू हुई गिरावट के बाद घरेलू आईटी शेयरों में करीब 15 प्रतिशत की टूट दर्ज की जा चुकी है। इस गिरावट का असर बड़ी कंपनियों की वैल्यूएशन पर भी साफ नजर आया है।
TCS की रैंकिंग में गिरावट
आईटी शेयरों में आई कमजोरी का एक बड़ा उदाहरण Tata Consultancy Services है। TCS पहले देश की चौथी सबसे ज्यादा वैल्यूएशन वाली कंपनी थी, लेकिन हालिया गिरावट के बाद वह छठे स्थान पर खिसक गई है।
यह बदलाव इस बात का संकेत है कि बाजार फिलहाल आईटी सेक्टर को लेकर सतर्क हो गया है। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आने वाले समय में कंपनियों की ग्रोथ कितनी टिकाऊ रहेगी।
क्या कहती है Motilal Oswal की रिपोर्ट
Motilal Oswal Financial Services की रिपोर्ट में विश्लेषकों ने यह समझाने की कोशिश की है कि बाजार भारतीय आईटी सर्विसेज सेक्टर को किस नजर से देख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा शेयर कीमतें यह संकेत देती हैं कि बाजार अगले दस वर्षों में इस सेक्टर की नकद कमाई में औसतन करीब 6.5 प्रतिशत सालाना बढ़त की उम्मीद कर रहा है।
यह आंकड़ा पहले के मुकाबले काफी कम है। उदाहरण के तौर पर, वैश्विक वित्तीय संकट के समय नकद कमाई में वृद्धि दर करीब 40 प्रतिशत थी। वर्ष 2016 से 2019 के बीच जब ग्रोथ धीमी हुई थी, तब यह दर करीब 13 प्रतिशत रही थी। हाल के वर्षों में यह औसतन 8.5 प्रतिशत के आसपास रही है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सेक्टर की कुल आय का लगभग 12 से 15 प्रतिशत हिस्सा ऐसा है, जिस पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सीधा असर पड़ सकता है। AI के कारण काम तेजी से पूरे होंगे और कुछ सेवाओं की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, इसका असर कब और कितनी तेजी से दिखेगा, यह अभी पूरी तरह साफ नहीं है।
आगे की राह, दो संभावनाओं पर किया गया विश्लेषण
Motilal Oswal के विश्लेषकों ने AI के बढ़ते प्रभाव को लेकर दो संभावनाएं बताई हैं। पहली संभावना यह है कि अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का असर जल्दी और बड़े पैमाने पर दिखता है, तो आने वाले कुछ वर्षों में आय की वृद्धि काफी धीमी हो सकती है। इस स्थिति में बड़ी आईटी कंपनियों की प्रति शेयर कमाई में करीब 10 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।
दूसरी संभावना यह मानी गई है कि बड़ी कंपनियों के जटिल सिस्टम, पुराने स्ट्रक्चर और सख्त नियमों के कारण नई तकनीक को अपनाने में समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में शॉर्ट टर्म में कारोबार की रिकवरी ज्यादा अहम भूमिका निभाएगी और AI का असर धीरे धीरे सामने आएगा।
क्या IT कंपनियों की भूमिका खत्म हो जाएगी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हाल के समय में कुल आय और स्ट्रक्चरल प्रॉफिट का ग्रोथ रेट नीचे के स्तर से संभलता हुआ दिखा है। हाल की तिमाही में बड़ी, मझोली और छोटी सभी कंपनियों में कुछ सुधार नजर आया है।
लंबे समय की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर बड़ी कंपनियां खुद ही कोड बनाने लगें, तो बाहरी सर्विस देने वाली आईटी कंपनियों पर उनकी निर्भरता घट सकती है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी याद दिलाती है कि अतीत में कंपनियों को खुद का बनाया सॉफ्टवेयर संभालने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।
सिक्योरिटी, रखरखाव और सिस्टम को अपडेट रखने जैसी समस्याओं के कारण समय के साथ कंपनियों ने फिर से रेडी सॉफ्टवेयर और एक्सपर्ट आईटी सर्विस कंपनियों की मदद लेना शुरू किया। फिलहाल खुद से बनाया गया सॉफ्टवेयर कुल खर्च का सिर्फ 14 प्रतिशत है, जबकि 1990 के दशक में यह आंकड़ा 35 से 40 प्रतिशत तक था।








