AI की बढ़ती मांग से मेमोरी चिप्स महंगी, 500% कीमत बढ़ने पर श्रीधर वेम्बु ने जताई चिंता

AI डेटा सेंटर की बढ़ती मांग से DDR5 मेमोरी की कीमतों में तेज उछाल आया है। श्रीधर वेम्बु ने बढ़ती मेमोरी और AI लागत पर चिंता जताई।

AI डेटा सेंटर्स की बढ़ती मांग के बीच मेमोरी चिप्स की कीमतों में तेज उछाल आया है। अगस्त 2025 से अगस्त 2026 के बीच कुछ DDR5 किट की कीमत कई गुना बढ़ी, जिस पर श्रीधर वेम्बु ने चिंता जताई।

Global Tech Market: डेटा सेंटर्स की बढ़ती जरूरत के कारण मेमोरी चिप्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसका असर कीमतों पर पड़ा है और कुछ DDR5 मेमोरी किट की कीमत एक साल में कई गुना बढ़ी है। Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने बढ़ती मेमोरी और AI टोकन लागत को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इससे बिजनेस की लागत पर दबाव बढ़ रहा है।

AI डिमांड से मेमोरी चिप महंगी, श्रीधर वेम्बु ने जताई चिंता

AI डेटा सेंटर्स के तेजी से विस्तार के बीच मेमोरी चिप्स की मांग में बड़ा इजाफा हुआ है। बढ़ती मांग और सीमित सप्लाई के कारण मेमोरी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसका असर कंप्यूटर, लैपटॉप और स्मार्टफोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के निर्माण की लागत पर भी पड़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने चिंता जताई है।

वेम्बु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए मेमोरी की बढ़ती कीमतों और AI टोकन की लागत को लेकर अपनी चिंता साझा की। उनके मुताबिक पिछले 12 महीनों में मेमोरी की कीमतों में करीब 500 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। उनका कहना है कि इनपुट कॉस्ट में इस तरह की वृद्धि से टेक कंपनियों के लिए बिजनेस ऑपरेशन संभालना मुश्किल हो सकता है।

DDR5 मेमोरी की कीमतों में बड़ा उछाल

मेमोरी मार्केट में कीमतों में बढ़ोतरी का अंदाजा DDR5 किट की कीमतों से लगाया जा सकता है। Tom's Hardware की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 से अगस्त 2026 के बीच कुछ DDR5 मेमोरी किट की औसत कीमत 90 डॉलर से बढ़कर 425 डॉलर तक पहुंच गई।

भारतीय मुद्रा में देखें तो 90 डॉलर की कीमत करीब 8,600 रुपये के आसपास थी, जो बढ़कर लगभग 40,000 रुपये तक पहुंच गई। यानी एक साल के भीतर कीमत में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई। हाई-कैपेसिटी मेमोरी किट में यह बढ़ोतरी और भी ज्यादा देखने को मिली है।

128GB DDR5-6400 किट की कीमत अब करीब 3,399 डॉलर बताई गई है। इसकी तुलना में इसकी पिछली न्यूनतम कीमत लगभग 329 डॉलर थी। इस हिसाब से इस किट की कीमत करीब दस गुना तक बढ़ चुकी है।

AI डेटा सेंटर्स बढ़ा रहे मेमोरी की मांग

मेमोरी चिप्स की बढ़ती कीमतों के पीछे AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती जरूरत एक महत्वपूर्ण वजह मानी जा रही है। AI मॉडल को ट्रेन और रन करने वाले डेटा सेंटर्स में बड़ी मात्रा में हाई-परफॉर्मेंस मेमोरी और अन्य कंप्यूटिंग संसाधनों की जरूरत होती है।

AI कंपनियों और डेटा सेंटर ऑपरेटरों की ओर से बड़े पैमाने पर हार्डवेयर की मांग बढ़ने से मेमोरी सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है। इसका असर पारंपरिक कंप्यूटिंग डिवाइस के लिए उपलब्ध मेमोरी और उसकी कीमतों पर भी पड़ सकता है।

अगर यह दबाव लंबे समय तक बना रहता है, तो डिवाइस निर्माता अपनी बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। इससे आने वाले समय में स्मार्टफोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतों पर असर पड़ने की संभावना है।

वेम्बु ने मेमोरी एफिशिएंसी पर दिया जोर

श्रीधर वेम्बु ने केवल कीमतों में बढ़ोतरी पर चिंता नहीं जताई, बल्कि सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में मेमोरी के बेहतर इस्तेमाल की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका तर्क है कि लंबे समय तक प्रोग्रामिंग और सॉफ्टवेयर डिजाइन में मेमोरी को अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध संसाधन माना जाता रहा है।

उनके अनुसार अब बदलते AI दौर में इस सोच पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। ऐसी प्रोग्रामिंग भाषाओं और स्मार्ट कंपाइलर्स की आवश्यकता बढ़ रही है, जो उपलब्ध मेमोरी का अधिक कुशल तरीके से इस्तेमाल कर सकें।

वेम्बु का मानना है कि बेहतर कोडिंग प्रैक्टिस से मेमोरी की अनावश्यक खपत कम की जा सकती है। खासकर AI आधारित एप्लिकेशन में यह महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि बड़े मॉडल और जटिल कंप्यूटिंग प्रक्रियाएं पहले ही बड़ी मात्रा में मेमोरी और कंप्यूटिंग संसाधनों का इस्तेमाल करती हैं।

मेमोरी की कीमतों में यह उछाल टेक इंडस्ट्री के लिए केवल हार्डवेयर लागत का मुद्दा नहीं है। बढ़ती AI कंप्यूटिंग जरूरतों के बीच कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर, सॉफ्टवेयर और संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर ज्यादा कुशल रणनीति अपनानी पड़ सकती है।

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