राजस्थान के अजमेर स्थित विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में देशभर से आए सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने जियारत कर देश और दुनिया में शांति, सौहार्द और खुशहाली की कामना की।
अजमेर: राजस्थान के अजमेर शाहजानी मस्जिद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दरगाह के गद्दीनशीन सैयद रेहान चिश्ती मोईनी ने सभी जायरीनों को जियारत कराई। जियारत के बाद पारंपरिक दस्तारबंदी की रस्म अदा की गई और उपस्थित लोगों को तबर्रुक भेंट किया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का भी मजबूत संदेश लेकर आया। साथ ही विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने सूफी परंपरा की शिक्षाओं को अपनाने पर जोर दिया।
सूफी परंपरा, वैश्विक शांति और भाईचारे का प्रतीक
सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, जिन्हें गरीब नवाज के नाम से भी जाना जाता है, की शिक्षाएं प्रेम, करुणा और सेवा पर आधारित हैं। यही कारण है कि उनकी दरगाह दुनियाभर के लोगों के लिए आस्था और आध्यात्मिक शांति का केंद्र बनी हुई है।
इस आयोजन में वक्ताओं ने कहा कि सूफी विचारधारा आज के समय में और भी प्रासंगिक हो गई है, जब समाज में विभाजन और तनाव की स्थितियां बढ़ रही हैं।
कर्नाटक से आए प्रसिद्ध कवि और नवरंग कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुलकरीम हाशिम पीर ने अपने संबोधन में कहा कि सूफी संतों की शिक्षाएं समाज को जोड़ने का काम करती हैं।
उन्होंने कहा, अमन और मोहब्बत ही किसी भी देश की असली ताकत है। जब समाज में प्रेम और भाईचारा होगा, तभी विकास संभव है।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट से जुड़े अधिवक्ता और नांदेड़ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एम. जेड. सिद्दीकी ने कहा कि ख्वाजा साहब की दरगाह हर धर्म और समुदाय के लिए समान रूप से खुली है और यह स्थान शांति और सहिष्णुता का प्रतीक है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान वैश्विक माहौल में आपसी सहयोग और समझदारी बेहद जरूरी है, ताकि समाज में स्थिरता और सद्भाव बना रहे।
सामाजिक संगठनों की भागीदारी और एकता का संदेश
इस आयोजन में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। अखिल भारतीय दारुल कजात और गुलबर्गा शरीफ दरगाह समिति के उपाध्यक्ष डॉ. हामिद फैसल सिद्दीकी ने कहा कि सूफी परंपरा ने सदियों से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ख्वाजा साहब की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाएं और समाज में शांति और सद्भाव को बढ़ावा दें।
हुबली, कर्नाटक से रेलवे मुस्लिम कर्मचारी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हामिद कोप्पाड ने कहा कि इस तरह के आयोजन विभिन्न संगठनों को एक मंच पर लाते हैं, जिससे राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
कार्यक्रम में एआईसीसी के पूर्व कोऑर्डिनेटर अब्दुल वाहिद अत्तार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
वैश्विक संदर्भ में सूफी संदेश की प्रासंगिकता
आज के समय में जब दुनिया के कई हिस्सों में सामाजिक और धार्मिक तनाव देखने को मिल रहा है, ऐसे में सूफी संतों का संदेश और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
अजमेर दरगाह जैसे स्थल न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी शांति और सहिष्णुता के प्रतीक माने जाते हैं। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु विभिन्न देशों से आते हैं, जो इसे एक वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र बनाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सूफी परंपरा का मूल संदेश—प्रेम, सेवा और समानता—आज की दुनिया के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत हो सकता है।









