अजमेर में नकली नोट गिरोह का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 13.06 लाख रुपये की फर्जी करेंसी बरामद

राजस्थान के अजमेर जिले की पुलिस ने 13.06 लाख रुपये के नकली नोटों के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया। मामले में पूरे फर्जी करेंसी नेटवर्क की जांच जारी है।

राजस्थान के अजमेर में गंज थाना पुलिस ने 13.06 लाख रुपये के नकली 500 रुपये के नोटों के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब फर्जी करेंसी नेटवर्क, प्रिंटिंग स्रोत और अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।

अजमेर: राजस्थान के अजमेर जिले में गंज थाना पुलिस ने नकली भारतीय मुद्रा तैयार करने और उसे बाजार में खपाने की साजिश रचने वाले एक कथित मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 13 लाख 6 हजार रुपये अंकित मूल्य के नकली 500 रुपये के नोट, प्रिंटेड शीटें और अन्य सामग्री बरामद की है। मामले को आर्थिक अपराध की दृष्टि से गंभीर मानते हुए पुलिस अब पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी नोटों को असली मुद्रा की तरह बाजार में चलाने की तैयारी कर रहा था। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं तथा नकली नोट कहां-कहां सप्लाई किए जाने थे।

मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, गंज थाना क्षेत्र में शनिवार को एक विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक युवक घी मंडी स्थित सरकारी स्कूल के पास संदिग्ध बैग के साथ खड़ा है। सूचना में बताया गया कि उसके पास बड़ी मात्रा में नकली नोट मौजूद हैं।

सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तुरंत विशेष टीम का गठन किया और बताए गए स्थान पर घेराबंदी कर संदिग्ध युवक को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान उसकी पहचान 27 वर्षीय विक्रम जोन के रूप में हुई, जो अजमेर के बड़ी नागफणी क्षेत्र स्थित प्रिंस हिल्स कॉलोनी का निवासी है। पुलिस के अनुसार आरोपी पेशे से वेल्डर है।

बैग से मिले लाखों रुपये के नकली नोट

पुलिस ने आरोपी के पास मौजूद आसमानी रंग के बैग की तलाशी ली तो उसमें 500-500 रुपये के नकली नोटों के कई बंडल मिले। इसके अलावा नोटों की प्रिंटिंग में इस्तेमाल होने वाली छपी हुई शीटें भी बरामद की गईं।

जब बरामद नकली नोटों की गणना की गई तो उनकी कुल अंकित कीमत 13 लाख 6 हजार रुपये निकली। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि बरामद सभी नोट नकली हैं। इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले को आर्थिक अपराध मानते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी।

नकली नोटों के नेटवर्क की जांच तेज

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि केवल नकली नोट बरामद होना ही इस मामले का अंतिम पहलू नहीं है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या किसी बड़े गिरोह का हिस्सा था।

जांच एजेंसियां यह भी जानने की कोशिश कर रही हैं कि नकली नोटों की छपाई कहां की गई, उन्हें तैयार करने में किस प्रकार के उपकरणों का इस्तेमाल हुआ और उनकी सप्लाई किन-किन इलाकों में की जानी थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका क्या रही।

सोशल मीडिया के जरिए सामने आया था नेटवर्क

इस पूरे मामले का एक दिलचस्प पहलू सोशल मीडिया से भी जुड़ा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नकली नोटों से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचने में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की जा रही कुछ रीलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बताया जा रहा है कि कुछ वीडियो में नकली नोटों को नोट गिनने वाली मशीन में चलाकर यह दावा किया जा रहा था कि ये नोट सामान्य जांच में आसानी से पकड़े नहीं जाएंगे। इन दावों ने जांच एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया और इसके बाद संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जाने लगी।

हालांकि पुलिस ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन जांच के दौरान डिजिटल गतिविधियों और ऑनलाइन संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है।

बाजार में खपाने की थी तैयारी

जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से नकली नोटों को बाजार में चलाने की योजना बना रहा था। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या इन नोटों का इस्तेमाल पहले कहीं किया गया था या फिर इन्हें पहली बार बाजार में उतारने की तैयारी थी।

यदि जांच में यह साबित होता है कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था, तो मामले में कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस संबंधित वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध संपर्कों की भी जांच कर रही है।

आर्थिक अपराधों पर सख्ती

विशेषज्ञों का मानना है कि नकली मुद्रा केवल वित्तीय नुकसान का कारण नहीं बनती, बल्कि इससे देश की अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नकली नोटों का इस्तेमाल धोखाधड़ी, अवैध कारोबार और अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी किया जा सकता है।

इसी कारण ऐसे मामलों में पुलिस और जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क का पता लगाने पर विशेष ध्यान देती हैं ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

विशेष टीम ने दिया कार्रवाई को अंजाम

इस कार्रवाई को सफल बनाने के लिए पुलिस की विशेष टीम ने समन्वित तरीके से अभियान चलाया। यह कार्रवाई अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर एवं मुख्यालय) हिमांशु जांगिड़ के सुपरविजन तथा सीओ (दरगाह) लक्ष्मण राम चौधरी के निर्देशन में गंज थाना प्रभारी महावीर सिंह राठौड़ के नेतृत्व में की गई।

मामले की आगे की जांच दरगाह थाना प्रभारी दिनेश जीवनानी को सौंपी गई है। जांच अधिकारी बरामद सामग्री की फॉरेंसिक जांच कराने के साथ-साथ आरोपी के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और संपर्कों की भी जांच करेंगे।

आगे क्या होगी कार्रवाई?

पुलिस का कहना है कि बरामद नकली नोटों और प्रिंटेड शीटों की वैज्ञानिक जांच कराई जाएगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि नकली मुद्रा तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए गए उपकरण कहां हैं और इस पूरे नेटवर्क का संचालन किस स्तर पर किया जा रहा था।

अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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